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ऐसे हुआ प्रकाश जावड़ेकर का मिशन एजुकेशन 2019 सफल

प्रकाश जावड़ेकर

प्रकाश जावड़ेकर

इस साल भी परीक्षाओं में गड़बड़ी होती तो सवाल सिर्फ सीबीएसई की विश्वसनीयता पर नहीं, बल्कि जावड़ेकर पर भी उठते.

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नई दिल्‍ली: साल 2018 में दिल्ली से लेकर हरियाणा तक बोर्ड की परीक्षाओं में पेपर लीक का ऐसा जोर रहा कि CBSE और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के होश उड़ गए थे. तब आनन-फानन में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अधिकारियों के साथ मंथन किया और फिर कुछ पेपर्स की दोबारा परीक्षा हुई तो न कही पेपर लीक हुआ और न ही कही सवाल उठे. अब बारी 2019 की थी. जावड़ेकर को चिंता खाये जा रही कि कैसे इस बार पेपर लीक फ्री परीक्षा कराई जाए.

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दरअसल इस बार परीक्षा सिर्फ बोर्ड की ही नहीं थी, बल्कि मोदी सरकार और बीजेपी की भी थी. परीक्षाओं में गड़बड़ी होती तो सवाल सिर्फ सीबीएसई की विश्वसनीयता पर नहीं, बल्कि जावड़ेकर पर भी उठते. विपक्ष के निशाने पर मोदी सरकार भी रहती थी और मुद्दा ये कि वो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. ऐसे में जावड़ेकर ने बीड़ा उठाया. सीबीएसई के साथ बैठकों का दौर शुरू हुआ और नतीजा ऐसा आया, जिससे सिर्फ बोर्ड के परीक्षार्थी और अभिभावक ही नहीं, बल्कि सबने एक सुर से कहा कि ये तो कमाल हो गया.

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कैसे सफल हुआ मिशन एग्‍जाम 2019
पहले होता ये था कि प्रश्न पत्र बैंकों को भेज दिए जाते थे. फिर स्कूलों के प्रिंसिपल ले जाया करते थे. ऐसे में प्रश्न पत्र लीक होते ही रहते थे. इस मिशन 2019 को सफलतापूर्वक अंजाम पर पहुंचने के लिए की विशेष योजना बनाई गई. सबसे पहले तो ये फैसला हुआ कि परीक्षार्थी को 10 बजे के बाद परीक्षा केंद्रों में घुसने की इजाज़त नहीं होगी. कड़ाई से इसका पालन हुआ. एक बार छात्र अंदर घुसे तो फिर परीक्षा दे कर ही बाहर आते. मोबाइल फोन पर रोक लगा दी गई. देशभर में 2600 संवेदनशील सेंटरों पर जैमर लगाए गए. 4000 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए. जाहिर है ऐसी गतिविधियों को रोकते ही पेपर लीक की समस्या का समाधान शुरू हो गया.

तमाम प्रश्न पत्रों को एन्क्रिप्टेड पेपर बना कर परीक्षा केंद्रों पर भेज गया. इसका प्रिंट आउट निकलने के लिये पासवर्ड डाल कर ही आगे बढ़ा जा सकता था. साथ ही एक ऐप बनाया गया, जिसके माध्यम से प्रश्‍न पत्रों की पूरी मूवमेंट त्रासक की जा रही थी. किस रास्ते गया, किसने रिसीव किया, ये तमाम जानकारियां लगातार पता चल रही थीं. आखिर सभी पेपर के बंडल की जिओ टैगिंग की गई. जाहिर है पेपर लीक करने वाले दलाल हाथ मलते रह गए.

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छात्रों के लिए स्‍वर्णिम युग
प्रकाश जावडेकर ने बताया कि देश भर में 21 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी बैठे, 213 प्रश्न पत्र सेट हुए और 5000 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई. पहली बार लीक प्रूफ और नकल रहित परीक्षा हुई. किसी को फिर से परीक्षा देने नहीं जाना पड़ा. शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने न्यूज़18 से बातचीत में कहा कि पिछला साल एक बुरे सपने की तरह था, इसलिए साल 2019 की तैयारियां पहले से ही कर ली गईं थीं. जावड़ेकर उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षा से भी खासे खुश नजर आए. जावड़ेकर ने बताया कि मास चीटिंग वाले राज्य में इस बार जरा भी नकल नहीं हुई. नकल उद्योग भी अब बन्द होने की कगार पर है. अगर यही ट्रेंड रहा तो आने वाला वक्‍त छात्रों के लिए स्वर्णिम युग होगा.

जावडेकर आज कल फूले नहीं समा रहे हैं. कहते हैं कि ये गर्व का विषय है कि उनका मिशन एग्जाम 2019 सफल रहा और अब बीजेपी के मिशन 2019 को सफल बनाने के लिए उन जैसे कार्यकर्ता 24/7 भिड़े हुए हैं.

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