कैसे बनें साइकोलोजिस्ट, जानें साइकोलॉजी के प्रमुख कोर्स और दाखिले के बारे में

बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी में एडमिशन के लिए 12वीं कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी होता है.

बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी में एडमिशन के लिए 12वीं कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी होता है.

साइकोलॉजी में डिग्री या पीजी डिप्लोमा के बाद छात्रों के सामने करियर के तमाम अवसर मौजूद रहते हैं. सरकारी और प्राइवेट स्कूलों, हॉस्पिटल्स (Hospitals) कॉलेजों, कंपनियों, रिसर्च एजेंसियों, रिहैबिलिटेशन सेन्टर और एनजीओ (NGO) आदि में साइकोलोजिस्ट की डिमांड हमेशा रहती है.

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नई दिल्ली. कोविड महामारी (Covid-19) और लॉकडाउन (Lockdown) के चलते ज़िंदगी के बदलते तौर-तरीकों ने मानसिक (Mentally) रूप से सभी लोगों को प्रभावित किया है. कोई पढ़ाई न होने से परेशान है, तो कोई काम बंद होने के चलते डिप्रेशन में है. इस तरह के तनावों (Stress) के चलते सभी को मानसिक उपचार की जरूरत है. ऐसे में आने वाले समय में साइकोलॉजी (Psychology) में कैरियर (Career) की संभावनाएं (Opportunities) काफी बढ़ गई हैं. चलिए आज जानते हैं साइकोलॉजी और इससे संबंधित कैरियर विकल्पों के बारे में:

क्या है साइकोलॉजी:

मानव व्यवहार को जानने, पढ़ने और समझने वाले व्यक्ति को साइकोलोजिस्ट (Psychologist) कहा जाता है. एक साइकोलोजिस्ट अपने मरीज को उसकी मानसिक स्थिति के लिहाज से बिना दवाओं के ट्रीटमेंट (Treatment) से उसकी सोच में बदलाव लाने का काम करता है. अगर आपको भी दूसरों के व्यवहार को पढ़ने और समझने का शौक है तो साइकोलॉजी का कैरियर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. तमाम संस्थान साइकोलॉजी में डिग्री (Degree) कोर्स से लेकर पीजी डिप्लोमा (PG Diploma) तक ऑफर करते हैं.

ये हैं साइकोलॉजी के प्रमुख कोर्स (Course):
बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी

एमए/एमएससी इन साइकोलॉजी

पीजी डिप्लोमा इन साइकोलॉजी



ऐसे होता है एडमिशन (Admission):

बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी में एडमिशन के लिए 12वीं कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी होता है. अगर आपने 12वीं कक्षा में एक विषय के तौर पर साइकोलॉजी पढ़ी है तो आपको इस कोर्स में एडमिशन में प्राथमिकता दी जाती है. इस विषय में आप पोस्ट ग्रेजुएट या डिप्लोमा भी कर सकते हैं. इसके लिए 55 प्रतिशत अंकों के साथ साइकोलॉजी विषय में ग्रेजुएशन पास होना जरूरी होता है.

इस कोर्स में क्या है:

इस कोर्स के तहत छात्र व्यवहार और मानसिक विज्ञान, फीलिंग्स, मानसिक स्थितियों और सामाजिक समस्याओं के विषय में जानते और सीखते हैं. इसके अलावा वे सामाजिक तनाव, अपराधियों की मानसिकता, लोगों की पसंद-नापसंद, कार्यस्थल पर कर्मचारियों के व्यवहार आदि का अध्ययन भी करते हैं.

कोर्स के बाद ये हैं करियर ऑप्शन्स:

साइकोलॉजी में डिग्री या पीजी डिप्लोमा के बाद छात्रों के सामने करियर के तमाम अवसर मौजूद रहते हैं. सरकारी और प्राइवेट स्कूलों, हॉस्पिटल्स (Hospitals) कॉलेजों, कंपनियों, रिसर्च एजेंसियों, रिहैबिलिटेशन सेन्टर और एनजीओ (NGO) आदि में साइकोलोजिस्ट की डिमांड हमेशा रहती है.

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