IAS Preparation Tips: UPSC MAINS एग्‍जाम के लिए ये हो रणनीति, तभी करेंगे क्‍वालिफाई

IAS Preparation Tips: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वालों की एक बहुत बड़ी कमी है कि अधिकांश प्रतियोगी केवल प्रीलिम्‍स परीक्षा की ही तैयारी करते हैं. उनकी योजना होती है कि प्रीलिम्‍स में सफल होने के बाद मेन की तैयारी करेंगे.

डॉ. विजय अग्रवाल | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 12:37 PM IST
IAS Preparation Tips: UPSC MAINS एग्‍जाम के लिए ये हो रणनीति, तभी करेंगे क्‍वालिफाई
IAS Preparation Tips: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वालों की एक बहुत बड़ी कमी है कि अधिकांश प्रतियोगी केवल प्रीलिम्‍स परीक्षा की ही तैयारी करते हैं. उनकी योजना होती है कि प्रीलिम्‍स में सफल होने के बाद मेन की तैयारी करेंगे.
डॉ. विजय अग्रवाल | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 12:37 PM IST
यह तो एक स्थापित सत्य है कि आईएएस बनाने वाली सिविल सेवा परीक्षा दुनिया की कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. जब मैं युवाओं से पूछता हूंं कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है, तो सभी से एक ही उत्‍तर मिलता है. वह यह कि इसमें 10-12 लाख स्‍टूडेंट्स बैठते हैं, जिनमें से अधिकतम एक हजार का सेलेक्‍शन होता है. उनके द्वारा बताये गये ये आंंकड़े सही होते हैं और अगर सफलता का प्रतिशत 0.1 प्रतिशत हो, तो उसे कठिन कहा ही जाना चाहिए, लेकिन क्या आंंकड़ों का सच इसकी कठिनता के सच को पूरी तरह बयां करता है ? इसके इस दहशत से उबरने के लिए उसकी सच्चाई को जानना जरूरी है.

सिविल सेवा परीक्षा के तीन स्तर होते हैं और यह दस-बारह लाख का आंंकड़ा पहले स्तर का है. प्रत्येक स्तर में सेलेक्ट होने वाला प्रतियोगी अगले स्तर में पहुंंचता जाता है. चौथा स्तर अंतिम चयन सूची का होता है. पहली बात, जो ध्यान में रखी जानी चाहिए, वह यह कि यह संख्या परीक्षा में बैठने वालों की नहीं है, बल्कि बैठने के लिए फार्म भरने वालों की है. मैं सन् 1980 से इस परीक्षा से जुड़ा हुआ हूंं.



नहीं छोड़ते उम्‍मीद 

मुझे एक भी ऐसा साल याद नहीं है, जबकि परीक्षा में बैठने वालों का प्रतिशत आवेदन करने वालों के आधे से अधिक हो. यानी कि पांंच लाख तो इसमें से यूं ही घट गये. अब हमें आंंकड़ों की सच्चाई को पकड़ने के लिए प्रतियोगियों के चरित्र की ओर जाना होगा. जिस परीक्षा में 50 लोग बैठते ही नहीं हैं, वहांं यह सोचने की बात है कि जो लोग बैठते हैं, उनकी तैयारी का स्तर क्या रहता होगा. बहुत से लोग न बैठने से तो बैठ जाना ही अच्छा है कि सिद्धांत का पालन करते हुए बैठते हैं. ये लोग जानते हैं कि इसमें कुछ भी होना-जाना नहीं है. फिर भी वे बैठते हैं, क्योंकि उन्हें अपने पेरेन्टस को जवाब जो देना होता है. सामान्य वर्ग के लोग इस परीक्षा में अधिकतम पांंच बार तथा शेष वर्ग के लोग 7-7 बार तक बैठ सकते हैं.

बिना तैयारी के भी लेते हैं हिस्‍सा

सफलता मिलनी है एक ही बार में. इसलिए भी स्टूडेन्ट बैठने में कंजूसी नही दिखाते. वे बैठ जाते हैं, लेकिन केवल बैठने के लिए, बिना कुछ तैयारी के ही. ऐसे प्रतियोगियों की संख्या कम नहीं होती है. कुल बैठने वालों में 50 फीसदी इसी श्रेणी के होते हैं.  सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वालों की एक बहुत बड़ी कमी यह पाई गई है कि अधिकांश प्रतियोगी केवल प्रारंभिक परीक्षा की ही तैयारी करते हैं. उनकी योजना होती है कि प्रारम्भिक परीक्षा में सफल होने के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी करेंगे. ऐसा सोचकर वे दो ऐसी बड़ी गलतियां कर रहे होते हैं, जो उन्हें फाइनल लिस्ट तक पहुंंचने नहीं देती.
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तैयारी की रणनीति हो सटीक

पहला तो यह कि वे इस स्पष्ट और बड़ी सच्चाई को समझ ही नहीं पाते कि मुख्य परीक्षा की तैयारी के बिना प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी हो ही नहीं सकती. इसलिए आप ऐसे प्रतियोगियों को भी इस दंगल से परीक्षा परिणाम निकलने के पहले ही बाहर किया जा सकता है. और अगर बिल्कुल बार्डर अंक लाकर सफल हो भी जाते हैं, तो दूसरी बात यह है कि मुख्य परीक्षा में उनका बाहर होना उनकी अनिवार्य नियति होती है. यदि कोई सोचता है कि वह केवल तीन महीने में मुख्य परीक्षा की तैयारी कर लेगा, तो उसके लिए यही कहा जा सकता है कि वह बहुत बड़ी गलतफहमी में है.

आपको इस श्रेणी के बहुत सारे लोग मिल जायेंगे, जो हर साल प्रारम्भिक परीक्षा में सफलता का जश्‍न मनाते ही रह गये. अगर आप मेरा विश्‍वास कर सकें, तो प्रारम्भिक स्तर पर अधिकतम एक लाख प्रतियोगी ही ऐसे होते हैं, जिन्हें आप थोड़ी गम्भीरता से ले सकते हैं और एक लाख में एक हजार का चयन बहुत बुरा नहीं कहा जा सकता, विशेषकर उस बात को ध्यान में रखते हुए कि यह आँकड़ा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सामानान्तर ही है.

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First published: August 13, 2019, 12:34 PM IST
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