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UPSC Preparation Tips: आईएएस इंटरव्यू है मनोविज्ञान का खेल, घबराहट होती है तो अपनाएं ये तरीका

कुछ तरीकों को अपनाकर आईएएस के इंटरव्यू में होने वाली घबराहट से बचा जा सकता है.

कुछ तरीकों को अपनाकर आईएएस के इंटरव्यू में होने वाली घबराहट से बचा जा सकता है.

UPSC Preparation Tips: आईएएस की परीक्षा में इंटरव्यू के वक्त कई बार कैंडीडेट्स को काफी घबराहट होती है. लेकिन इस बात को समझना कि आईएएस जीवन से बढ़कर नहीं है. जीवन का महत्त्व इससे कहीं ज्यादा है.

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जब मैं आईएएस के इंटरव्यू के लिए गया था, उस समय मैं कॉलेज में पढ़ा रहा था. यह मेरे जीवन का तीसरा इन्टरव्यू था. इससे पहले मैं स्टेट सिविल सर्विस और पीएच.डी के लिए इंटरव्यू दे चुका था. इसके बावजूद मैं बुरी तरह डरा हुआ था. जब मैं एक बड़े से हॉल में बैठकर अपने नाम के पुकारे जाने का इंतजार कर रहा था, तो मुझे लग रहा था कि मैं पैदल चलकर इन्टरव्यू के कमरे तक पहुंच पाऊंगा या नहीं. मैं बुरी तरह घबराया हुआ था और चेहरे का पसीना पोंछते-पोंछते मेरा रूमाल पूरी तरह गीला हो चुका था. मैं समझ गया था कि यह मेरे बस की बात नहीं है. लेकिन इससे पांच मिनट पहले कि मेरा नाम पुकारा जाता, न जाने किस ईश्वरीय प्रेरणा से मेरे दिमाग में एक अद्भुत विचार कौंधा और इस विलक्षण विचार ने मेरे अन्दर की सारी कमजोरियों को जलाकर राख कर दिया और देखते ही देखते मेरी लचलचाती हुई रीढ़ की हड्डी कुतुबमीनार की तरह ठोस और मजबूत होकर खड़ी हो गई. क्या आप उस विचार को जानना चाहेंगे?

वह एक बहुत सरल और सीधा-सा विचार था किन्तु था, बहुत शक्तिशाली, और सत्य भी. मुझे विचार आया कि ‘ठीक है, यदि मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ, तो भी क्या हो जाएगा? मैं अभी कॉलेज में लेक्चरर हूं. यहां फेल होने से मेरी लेक्चररशिप तो जाएगी नहीं. मैं समझ लूंगा कि मैं उसी के लायक हूँ. इसमें परेशान होने की आखिर ऐसी क्या बात है? ‘मित्रो, यह एक छोटा-सा विचार था, लेकिन इसने बहुत बड़ा काम किया. इस एक विचार ने, केवल एक छोटे-से विचार ने मुझे मेरी मंजिल तक पहुँचा दिया. यह विचार मात्र एक मनोवैज्ञानिक विचार था.

मैं चाहूँगा कि इन्टरव्यू का सामना करने के लिए आप भी अपने हिसाब से अपने लिए कोई न कोई विचार जरूर तैयार कर लें. यदि आप नौकरी में हैं (चाहे वह कैसी भी नौकरी क्यों न हों) तो वह आपके लिए एक विचार बन सकता है, जैसे कि मेरे लिए बना. यदि आपके पास अटेम्प बाकी हैं, तो वह भी एक सहारा बन सकता है और आप सोच सकते हैं कि शायद अगली बार की सफलता इस बार की सफलता से भी बेहतर हो. ऐसा होता भी है. यह विचार भी आपको सहारा दे सकता है कि ‘यदि मैं सफल नहीं हुआ, तो सीधी-सी बात है कि मैं इसके लायक था ही नहीं और मुझसे बेहतर लोग इसमें सफल हो गए. कोई बात नहीं, अब मैं जो कुछ भी करूँगा, उसमें इतना बेहतर करूँगा कि इसमें सफल न होने का कोई रंज मुझे नहीं रह जाएगा.‘

मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि इससे आपको बहुत मदद मिलेगी. आप मानकर चलें कि इन्टरव्यू मुख्यतः एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है और इसके लिए आपको मनोवैज्ञानिक उपाय ही ढूँढ़ने होंगे. आपने लौकी की बेल देखी होगी, तोरई और सेम की बेल देखी होगी. यदि इन्हें किसी झाड़-झंखाड़ का सहारा मिल जाए, तो ये ऊपर तक पहुँच जाती हैं और तभी इनमें अच्छे फल भी लग पाते हैं. अन्यथा तो इन्हें धरती पर पसरना पड़ता है और फिर ये वैसे फल दे नहीं पाती हैं. जिस तरह लता को फलने-फूलने और फैलने के लिए किसी सहारे की जरूरत पड़ती है, ठीक उसी प्रकार इन्टरव्यू में सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक सहारे की जरूरत पड़ती है.
(लेखक पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक हैं.)

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