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Sunday Special: बिना UGC-NET क्वालिफाई किए भी होता है PhD में एडमिशन, ऐसे साकार होगा पढ़ाने का सपना

Pankaj Soni | News18Hindi
Updated: January 19, 2020, 4:44 PM IST
Sunday Special: बिना UGC-NET क्वालिफाई किए भी होता है PhD में एडमिशन, ऐसे साकार होगा पढ़ाने का सपना
बिना यूजीसी-नेट क्वालिफाई किए भी होता phd में एडमिशन, जानें पूरी प्रक्रिया.

अगर आप UGC-NET क्वॉलिफाई नहीं कर पाए हैं और पीएचडी (PhD ) करना चाहते हैं तो एडमिशन लेने का है ये तरीका. डिग्री अवार्ड होने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) बनना हो जाएगा आसान.

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  • Last Updated: January 19, 2020, 4:44 PM IST
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Sunday Special on Phd Admission 2020 : पिछले महीने मतलब दिसंबर 2019 में NTA ने UGC-NET का रिजल्ट जारी किया था. इस परीक्षा के लिए देश भर में 1034872 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इसमें 793813 लोगों ने एग्जाम दिया था. जिसमें 60147 लोगों ने नेट क्वॉलिफाई किया और 5092 लोगों ने जेआरएफ क्वॉलिफाई किया. इस एग्जाम को क्वालिफाई करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के पात्र हो गये हैं.

इसमें कई हजार लोग ऐसे भी हैं जिनको सफलता नहीं मिली, लेकिन वो आज भी कॉलेज में पढ़ाने का सपना पाले हुए हैं. उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हैं, क्योंकि वो पीएचडी करने के बाद किसी भी सरकारी या निजी कॉलेज में पढ़ा सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले पीएचडी में दाखिला लेना होगा. इसके बारे में न्यूज 18 इंडिया ने गवर्मेंट साइंस कॉलेज रीवा में पदस्थ रसायन शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रसिक बिहारी से बात की. डॉ रसिक बिहारी ने कुछ टिप्स हमसे साझा किए हैं, जिन्हें हम आप तक पहुंचा रहे हैं.

न्यूनतम योग्यता
- उम्मीदवार जिस विषय में पीएचडी करना चाहता है उस विषय में एमए की डिग्री होनी जरूरी है. साथ ही इसमें न्यूनतम 55 फीसदी अंक होने चाहिए तभी वह पीएचडी के लिए आवेदन कर सकता है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को राज्य और केंद्र सरकार के नियमानुसार अंकों में कुछ छूट दी जाती है.

Interdisciplinary Subject
- कुछ विषय Interdisciplinary होते हैं, जिनमें दाखिले के लिए उसी विषय में एमए की डिग्री की जरूरत नहीं होती है. Interdisciplinary Subject के बारे में अलग-अलग विश्वविद्यालय अपने हिसाब से तय करते हैं.

उदाहरण- जैसे कि आपने एमए इन मॉस कम्यूनिकेशन की डिग्री की है और सिनेमा में पीएचडी करना चाहते हैं तो यहां एम इन मॉस कम्यूनिकेशन की डिग्री को तवज्जो दिया जाता है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, English and Foreign Languages University, Hyderabad समेत कई विश्ववद्यालों में यह डिपार्टमेंट है.PhD में एडमिशन लेने के तरीके

1.UGC NET/SET/JRF-
अगर आप यूजीसी नेट या जेआरएफ क्वालिफाई हैं तो यूजीसी के नियमानुसार अभी तक आपको रिटेन टेस्ट नहीं देना पड़ता है. UGC NET/SET/JRF उम्मीदवार इंटरव्यू से नहीं बच सकते. इसे क्वॉलिफाई करने के बाद ही पीएचडी में इनरोलमेंट करा पाएंगे. कई विश्वविद्यालय इसके लिए सिनॉप्सिस प्रजेंटेशन भी लेते हैं. SET (STATE ELIGIBILITY TEST) होता है. यह उम्मीदवार के राज्य के विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश में नेट की तरह काम करता है, लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालयों में नहीं.

2. M.Phil- अगर उम्मीदवार ने एमफिल कर रखा है और वह पीएचडी में प्रवेश चाहता हो तो उसे रिटेन टेस्ट से छूट मिल जाती है. वह केवल इंटरव्यू क्वालिफाई करके पीएचडी में प्रवेश ले सकता है. लेकिन कुछ विश्वविद्यालयों एमफिल वालों को भी रिटेन देना पड़ता है.

3.Entrance Test and Interview- पीएचडी में प्रवेश लेने के लिए यह प्रकिया थोड़ी कठिन मानी जाती है, लेकिन मुश्किल नहीं है. इसके लिए आवेदक को विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एंट्रेस एग्जाम क्वालिफाई करना होता है, जो लोग इसे क्वालिफाई कर लेते हैं उनको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है. इंटरव्यू के बाद मैरिट लिस्ट बनती है, इसमें भी आरक्षण मिलता है. इसके बाद एक फाइनल मैरिट लिस्ट बनती है. इसमें जो उम्मीदवार सबसे ऊपर के क्रम में होते हैं उनका पीएचडी में दाखिला होता है.

आरक्षण (Reservation)
पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की आरक्षण से काफी मदद मिल जाती है. यह केंद्र और राज्य की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में अलग-अलग नियमानुसार मिलता है.

कोर्स की अवधि
विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अनुसार पीएचडी की न्यूयतम अवधि 3 साल और अधिकतम अवधि 5 साल निर्धारित की गई है.

छात्रवृत्ति (Scholarship)
अगर आप पीएचडी करने का मन बना रहे हैं और आपके पास पैसों की कमी है तो आप इस बात से बिल्कुल भी घबराएं नहीं. अगर आप देश के किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीएचडी में दाखिला लेते हैं तो आपको 8,000 रुपये महीने स्टाइपेंट मिलता है. साथ ही साल में 20 हजार रुपये की कंटेंजेंसी भी मिलती है.

- इसके अतिरिक्त भी एससी/एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अलग-अलग तरह की Scholarship मिलती है. इनके लिए उम्मीदवार को सिनॉप्सिस के साथ अप्लाई करना पड़ता है.

पीएचडी करने के दो तरीके 
पीएचडी करने के दो तरीके हैं. पहला रेगुलर पीएचडी और दूसरा पार्ट टाइम पीएचडी. अगर आप कामकाजी हैं तो पार्ट टाइम पीएचडी किसी भी सरकारी, प्राइवेट या डीम्ड यूनिवर्सिटी से कर सकते हैं. रेगुलर पीएचडी के लिए आपको तीन साल तक विश्वविद्यालय में रहना होता है. पार्ट टाइम पीएचडी में आप अपना काम कर सकते हैं. इसकी अवधि पांच साल की होती है.

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First published: January 12, 2020, 4:39 PM IST
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