रामसेतु पर इंजीनियर करें रिसर्च- केंद्रीय मंत्री निशंक ने दी सलाह

News18Hindi
Updated: August 28, 2019, 1:14 PM IST
रामसेतु पर इंजीनियर करें रिसर्च- केंद्रीय मंत्री निशंक ने दी सलाह
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Human resourced development Minister Ramesh Pokhriyal Nishank ) ने आईआईटी खड़गपुर के 65वें दीक्षांत समारोह में इंजीनियरों को रामसेतु पर रिसर्च करने की दी सलाह.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Human resourced development Minister Ramesh Pokhriyal Nishank ) ने आईआईटी खड़गपुर के 65वें दीक्षांत समारोह में इंजीनियरों को रामसेतु पर रिसर्च करने की दी सलाह.

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रामसेतु के बारे में आपने सुना होगा. कहा जाता है कि इसे भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्‍त हनुमान और उनकी पूरी वानर सेना ने तैयार किया है. हालांकि इस बारे में अब तक कोई तथ्‍य साबित नहीं किया जा सका है. इसी तरह संस्‍कृत, गीता और आयुर्वेद के बारे में भी कई मान्‍यताएं हैं. इन विषयों पर लंबे समय से रिसर्च का काम चल रहा है पर अब तक कोई ठोस रिपोर्ट सामने नहीं आई है.

ऐसे में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Human resourced development Minister Ramesh Pokhriyal Nishank ) ने आईआईटी खड़गपुर ( IIT-Kharagpur)  के 65वें दीक्षांत समारोह 65th Annual convocation) में यह कहा कि इंजीनियरिंग छात्रों को इन विषयों पर रिसर्च करने की जरूरत है.



इस दौरान केंद्रीय मंत्री पोखरियाल ने ये भी कहा कि संस्कृत दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है. आज तक, इससे पहले कोई भी किसी अन्य भाषा के अस्तित्व को साबित नहीं कर सका, इसलिए मैं भविष्‍य के होने वाले इंजीनियरिंग छात्रों से अपील करता हूं कि वे इस भाषा पर शोध करें.

कार्यक्रम के दौरान निशंक ने मीडिया को बताया कि भारतीय पुरातत्‍त्‍व सर्वेक्षण (SSI) का कहना है कि यह साबित करने के लिए कोई ऐतिहासिक और वैज्ञानिक साक्ष्‍य नहीं है कि राम सेतु मानव निर्मित है. इसलिए मुझे लगता है कि हमारे युवा इंजीनियरों की भावी पीढ़ी को राम सेतु जैसे ऐतिहासिक चमत्कारों के बारे में नये निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए  रिसर्च करनी चाहिए ताकि हमारे गौरवपूर्ण स्मारकों के बारे में नई और सत्‍य खोजें मिल सकें. साथ ही दुनिया को एक बार फिर इस बारे में बताया जा सके कि सदियों पहले हमने किस- किस का निर्माण किया था.  उन्होंने इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) से फंड देने की बात भी कही है. बस भावी इंजीनियर से उनकी गुजारिश है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाकर दुनिया को भारत के गौरवाशाली इतिहास से दुनिया को रूबरू करवाएं.

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First published: August 28, 2019, 12:55 PM IST
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