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IAS Interview Preparation Tips: आईएएस के इंटरव्यू में क्या होता है पहला सवाल, जानें यहां

UPSC Preparation Tips: औसतन 25 मिनट तक चलने वाले इन्‍टरव्‍यू का लगभग एक-तिहाई भाग सामान्‍य बातचीत में गुजर जाता है.

UPSC Preparation Tips: औसतन 25 मिनट तक चलने वाले इन्‍टरव्‍यू का लगभग एक-तिहाई भाग सामान्‍य बातचीत में गुजर जाता है.

IAS Interview Preparation Tips: इंटरव्यू की शुरूआत उसके निजी जीवन-वृत्त से करते हैं. उनका पहला ही प्रश्‍न कुछ इस तरह का होता है कि वह उसका बड़ा सरल और सहज तरीके से उत्तर दे सकें

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IAS Interview Preparation Tips: नई दिल्‍ली में पेड़ों से घिरे शाहजहां रोड के एक कोने पर स्थित धौलपुर हाऊस में आई ए एस के इन्‍टरव्‍यू शुरू हो गये हैं. अपने जीवन के सपनों को साकार करने के इस अंतिम अत्‍यंत संवेदनशील क्षणों के बीच अपना संतुलन कायम रखने की कोशिश करते हुए युवक एवं युवतियों को संघ लोक सेवा आयोग के इस मुख्‍य द्वार में प्रवेश करते और निकलते हुये देखा जा सकता है. इन्‍टरव्‍यू देकर बाहर आये इन उम्‍मीदवारों के साक्षात्‍कार को वीडियो कैमरे में कैद करके कुछ लोगों ने यूट्यूब पर डालना शुरू कर दिया है. यह एक अच्‍छी कोशिश है और इससे भविष्‍य में आई ए एस बनने का स्‍वप्‍न देखने वाले युवाओं को निश्चित रूप से एक व्‍यावहारिक मार्गदर्शन मिल सकेगा.

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. पहले से होता आया है और आगे भी होता रहेगा कि बोर्ड के सदस्‍य इन्‍टरव्‍यू की शुरूआत उसके निजी जीवन-वृत्त से करते हैं. उनका पहला ही प्रश्‍न कुछ इस तरह का होता है कि वह उसका बड़ा सरल और सहज तरीके से उत्तर दे सकें, ताकि तनाव से भरा उनका मस्तिष्‍क थोड़ी राहत महसूस कर सके. इसलिए आरम्‍भ में उनके राज्‍य पर प्रश्‍न किये जाते हैं. उनके शैक्षणिक संस्‍थान पर प्रश्‍न किये जाते हैं. उनकी पृष्‍ठभूमि पर प्रश्‍न किये जाते हैं. और उन्‍होंने जिन विषयों का अध्‍ययन किया होता है, उन पर प्रश्‍न किये जाते हैं. औसतन 25 मिनट तक चलने वाले इस इन्‍टरव्‍यू का लगभग एक-तिहाई भाग इसी तरह की सामान्‍य बातचीत में गुजर जाता है.

यहाँ सवाल यह है कि इन्‍टरव्‍यू बोर्ड के सदस्‍यों को इस उम्‍मीदवार की इतनी व्‍यापक पृष्‍ठभूमि की जानकारी मिलती कहाँ से है. यह कोई रहस्‍य नहीं है. प्रारंभिक परीक्षा में सफल होते ही उम्‍मीदवार को आयोग द्वारा उसके बारे में मांगी गई सभी जानकारियां एक फार्म में भरकर देनी होती है. यह एक प्रकार से उस उम्‍मीदवार का अब तक का महत्‍वपूर्ण जीवन-वृत्त होता है, जिसमें उसकी रुचियां तक शामिल होती हैं.

यह कोई नई जानकारी नहीं है. तो फिर मैं यह जानकारी दे क्‍यों रहा हूँ? दरअसल, इसके पीछे एक कारण है. पिछले महीने दिल्‍ली सरकार के एक मंत्री ने संघ लोक सेवा आयोग पर यह आरोप लगाया कि वह आरक्षित वर्ग के उम्‍मीदवारों को जानबूझकर कम नंबर देता है. यह पूरी तरह आधाररहित और गलत है. महत्‍वपूर्ण पक्ष यह है कि इस अन्‍याय को रोकने के लिए मंत्री ने दो उपाय सुझाये थे. पहला तो यह कि उस उम्‍मीदवारा के जातिवचाक उपनाम को हटा दिया जाये, ताकि बोर्ड को यह पता ही न चल सके कि वह आरक्षित वर्ग से है. दूसरी सलाह उन्‍होंने यह दी थी कि बोर्ड को उस उम्‍मीदवार के बारे में कुछ भी न बताया जाये. मेरे इस ब्‍लाग के केन्‍द्र में उनके इस दूसरी सलाह के पालन से उत्‍पन्‍न संकट की ओर ध्‍यान दिलाना है.

साक्षात्‍कार का उद्देश्‍य सम्‍पूर्ण व्‍यक्तित्‍व की जांच-परख करना होता है. व्‍यक्तित्‍व की इस परख के साथ न्‍याय उस उम्‍मीदवार की पृष्‍ठभूमि के संदर्भ में ही की जा सकती है. उम्‍मीदवार की पृष्‍ठभूमि का अभाव विशेषकर गांव एवं कस्‍बों के उम्‍मीदवारों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं होगा.

शायद मंत्री महोदय को इस तथ्‍य का ज्ञान नहीं है. इसलिये उन्‍होंने इस प्रकार का अव्यावहारिक सुझाव भेजा है. बेहतर होता कि वह इसके विकल्‍प के बारे में थोड़े डिटेल में बताते. (लेखक डॉ. विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट एवं afeias के संस्‍थापक हैं.)

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