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IAS Success Story: कभी सड़क पर मां के साथ बेचते थे चूड़ियां, आज हैं IAS अफसर

News18Hindi
Updated: March 16, 2020, 7:25 AM IST
IAS Success Story: कभी सड़क पर मां के साथ बेचते थे चूड़ियां, आज हैं IAS अफसर
रमेश घोलप अपने बेटे के साथ. (फाइल फोटो)

IAS Success Story: रमेश घोलप एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपने सपने को साकार किया बल्कि साबित किया कि मेहनत और लगन से हर वो चीज हासिल की जा सकती है.

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  • Last Updated: March 16, 2020, 7:25 AM IST
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IAS Success Story: देश और दुनिया में बडे़ काम छोटे-छोटे लोग ही करते हैं. शायद यह बात आपने कहीं सुनी होगी. ऐसे ही काम एक चूड़ी बेचने वाले इंसान ने किया है, जिसकी मेहनत को देखकर लोग उसे सलाम कर रहे हैं. रमेश घोलप एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपने सपने को साकार किया बल्कि साबित किया कि मेहनत और लगन से हर वो चीज हासिल की जा सकती है, जो उनकी जरूरत है. आज इस इंसान को दुनियां सलाम करती है, क्‍योंकि आज वह IAS ऑफिसर हैं.

जी हां, रमेश घोलप एक ऐसे व्यक्ति हैं जो हर उस युवा के लिये प्रेरणा हैं जो सिविल सर्विसिज की तैयारी कर रहा है. रमेश घोलप शारीरिक तौर पर पोलियो के शिकार थे. यही नहीं वह इतने गरीब परिवार से ताल्‍लुक रखते थे कि उनकी कहानी सुनकर आपके आंखों में आंसू आ जाएंगे. रमेश की मां सड़कों पर चूड़ियां बेचती थीं और वह भी उनका हाथ बंटाते थे. लेकिन रमेश ने हर मुश्किल को मात दी और आईएएस बनकर दिखा दिया.

मां सड़कों पर चूडियां बेचती थीं तो वहीं रमेश के पिता की एक छोटी सी साइकिल की दुकान थी. रमेश के पिता शराब पीते थे जिसकी वजह से उनके घर की हालत खराब थी. रमेश को अपनी पढ़ाई पूरी करनी थी, इसलिये वह अपने चाचा के गांव चला गया और वहीं उन्‍होंने 12 वीं कक्षा की परीक्षा दी. इसके बाद उनके पिता का देहांत हो गया. रमेश ने 12 वीं में 88.5% मार्क्स से परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद इन्होंने शिक्षा में एक डिप्लोमा कर लिया और गांव के ही एक विद्यालय में शिक्षक बन गए.



डिप्लोमा करने के साथ ही रमेश ने बीए की डिग्री भी ले ली. शिक्षक बनकर रमेश अपने परिवार का खर्चा चला रहे थे, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और ही था. रमेश नौकरी छोड़कर यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा देने में जुट गए. उन्‍हें पहली बार में सफलता नहीं मिली. वह इतने गरीब थे कि उनके पास कोचिंग के पैसे भी नहीं थे. ऐसे में उनकी मां ने गांव वालों से पढ़ाई के लिये पैसे उधार लिये और उससे रमेश को पुणे जाकर सिविल सर्विसेज के लिए पढाई करने को बोली.



रमेश आईएएस ऑफिसर बनने से पहले कसम खाई थी कि जब तक वो आईएएस की परीक्षा को पास नहीं कर लेते वो गांव नहीं आएंगे. साल 2012 में उन्होंने कड़ी मेहनत की जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा को पास की. यूपीएससी में उन्होंने 287वीं रैंक हासिल की, इस वक्त वह झारखण्ड के खूंटी जिले में एसडीएम बन वहां जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं.

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First published: March 15, 2020, 6:29 PM IST
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