IAS Preparation Tips: जानिए क्या है सिविल सर्विस परीक्षा का मूल उद्देश्य

डॉ. विजय अग्रवाल | News18Hindi
Updated: September 3, 2019, 2:41 PM IST
IAS Preparation Tips: जानिए क्या है सिविल सर्विस परीक्षा का मूल उद्देश्य
डॉ. विजय अग्रवाल बता रहे हैं IAS की तैयारी के लिए टिप्स.

इस परीक्षा का मकसद उम्मीद्वारों के इंटेलिजेंस (बुद्धिमत्‍ता) को परखना है, ज्ञान को नही. ज्ञान यहाँ एक साधन मात्र है, बुद्धिमत्‍ता तक पहुँचने का.

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IAS Preparation Tips: संस्था चाहे कोई भी हो, वह अपने लिए निर्धारित उद्देश्य को पाने के लिए कार्य की एक प्रणाली निष्चित करती है. यह जरूरी नहीं है कि उस कार्यप्रणाली का बिल्कुल सीधा ही संबंध उस उद्देश्य से हो. ऐसे में यह कार्य प्रक्रिया उद्देश्य तक पहुंचने का एक चरण बन जाती है. इस तथ्य को आप संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सर्विस परीक्षा पर लागू कर सकते हैं. ऐसा करके आप इस परीक्षा की तैयारी करने के केन्द्रीय तत्व को पकड़ सकेंगे.

देश के लिए श्रेष्ठ प्रशासकों का चयन
ऊपरी तौर पर तो देखने में यही लगता है कि यूपीएससी इस राष्ट्रव्यापी उच्चस्तरीय परीक्षा के माध्यम से देश के लिए श्रेष्ठ प्रशासकों का चयन करता है? लेकिन क्या यह सही है ? यह थोड़े सुधार की मांग करता है. वस्तुतः इस परीक्षा के जरिए प्रशासकों की खोज नहीं की जाती, बल्कि उनकी खोज की जाती है, जिन्हें प्रशासक बनाया जा सकता है. यह कुछ उसी तरह से है, जैसे कि कोई लुहार अच्छी तलवारें बनाने के लिए अच्छे किस्म के लौह-धातु की तलाश कर रहा हो, ऐसी मजबूत धातु, जिससे मजबूत तलवारें बनाई जा सकें. यह सच्चाई इसी बात से प्रमाणित हो जाती है कि यदि ऐसा नहीं होता, तो चयनित युवाओं को सीधे काम पर भेज दिया जाता है. जबकि पहले उन्हें डेढ़-दो साल की ट्रेनिंग देकर काम पर भेजा जाता है.

उद्देश्य की जानकारी के अभाव से भटकते हैं

यूपीएससी की इस परीक्षा के इस उद्देश्य की जानकारी का अभाव तैयारी करने वालों को भटकाकर एक ऐसे गलत रास्ते पर डाल देता है, जो घौलपुर हाउस की ओर जाता ही नहीं है. प्रतियोगिता के साथ ‘परीक्षा‘ शब्द जुड़ा होने के कारण ये इसे ज्ञान का परीक्षण मानने की भूल कर बैठते हैं. इसका पाठ्यक्रम है, परीक्षा है और परीक्षा में पेपर्स भी हैं. परीक्षा में लिखना होता है, और कॉपियों को जांचकर नम्बर भी दिये जाते हैं. सेलेक्शन का आधार भी प्राप्तांक ही होते हैं. इन सबके कारण दिमाग में कुछ इस तरह का इम्प्रेशन बन जाता है कि यह ज्ञान की परीक्षा है. इसलिए ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ो, ज्यादा से ज्यादा वक्त तक पढ़ो, ताकि ज्यादा से ज्यादा ज्ञान अर्जित किया जा सके.

यहां आपसे मेरा एक सरल सा व्यावहारिक प्रश्न है. प्रश्न है कि क्या ज्ञान के अभाव में (परीक्षा पर आधारित ज्ञान) प्रशासक नहीं बना जा सकता ? इसका एक उत्‍तर यहाँ मैं अपनी ओर से दे रहा हूँ कि अकबर लगभग अनपढ़ जैसा ही था. इसके बावजूद वह भारतीय इतिहास के महान प्रशासकों में से एक है. यदि मेरे प्रश्न का उत्‍तर ‘नहीं‘ है, तो आपको मुझसे यह प्रश्न पूछना चाहिए कि ‘तो फिर इतनी कठिन परीक्षा के इस मायाजाल का आयोजन क्यों ? दरअसल, यही बताना यहाँ मेरा उद्देश्य है.

परीक्षा का मकसद
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इस परीक्षा का मकसद उम्मीद्वारों के इंटेलिजेंस (बुद्धिमत्‍ता) को परखना है, ज्ञान को नही. ज्ञान यहाँ एक साधन मात्र है, बुद्धिमत्‍ता तक पहुँचने का. इन दोनों में मूलभूत अंतर यह होता है कि ज्ञान जहाँ पुस्तकों के अध्ययन से पाया जाता है, वहीं बुद्धिमत्‍ता व्यावहारिक जगत से. इस प्रकार सिविल सेवा परीक्षा के संदर्भ में आप कह सकते हैं कि पढ़कर प्राप्त किये ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करने की बहुआयामी क्षमता ही बुद्धिमत्‍ता है.

यदि आप कभी इस परीक्षा के प्रथम एवं द्वितीय चरण के पेपर्स के प्रश्नों को ध्यान से पढ़ेंगे, तो आपको यह अंतर बहुत अच्छी तरह समझ में आ जायेगा. प्रश्नों को पढ़ने के बाद शायद आपके भी अनुभव कुछ इस प्रकार के होंगे -

-प्रश्न आया तो कोर्स से ही है, लेकिन कहाँ से, याद नही आ रहा.
-इस टॉपिक को मैंने पढ़ा था, अच्छे से पढ़ा था. लेकिन उसमें तो ऐसा कुछ पढ़ने को नहीं मिला था कि इस प्रश्न का उत्‍तर दिया जा सके.
-यह प्रश्न तो समझ में ही नहीं आ रहा है, जबकि लग तो कुछ ऐसा रहा है कि इसके बारे में मैंने कहीं कुछ पढ़ा जरूर था.
-यह तो पक्के तौर पर 'आउट ऑफ सिलेबस' से है. (जबकि ऐसा है नहीं) आदि-आदि.

इस तरह की समस्याओं से जकड़े हुए प्रश्नों के उत्‍तर कहाँ हैं ? ये किताबों में नहीं हैं. इनके उत्‍तर आपके दिमाग में होते हैं. आपके विचारों में होते हैं. आपके विश्लेषण करने की क्षमता और मौलिक तरीके से सोच पाने में होते हैं. और इन सबका ही सम्मिलित नाम है- बुद्धिमत्‍ता, यानी कि 'इंटेलिजेंस'.

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First published: September 3, 2019, 12:41 PM IST
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