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IAS एग्जाम के लिये कोचिंग करना सही या गलत, कैसे करें सही कोचिंग का चुनाव-जानें

सिविल सेवा की परीक्षा यहीं पर आकर हमारे अनुभव पर आधारित पुरानी परीक्षा से अलग हो जाती है.

IAS Preparation Tips: अगर आप IAS अधिकारी बनने की तैयारी करना चाहते हैं तो यह ब्‍लॉग आपके लिये बेहद उपयोगी है. आईएएस बनने की तैयारी के लिये कोचिंग करना है या नहीं करना है, किस कोचिंग सेंटर से तैयारी ठीक रहेगी या कोचिंग के बगैर भी तैयारी की जा सकती है. ऐसे सवाल आपके मन में होंगे. इन सभी के जवाब आपको यहां मिल जाएंगे.

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    IAS Preparation Tips: आप स्नातक हैं और स्नातक की यह डिग्री आपको किसी ने खैरात में नहीं दी है. बल्कि इसे आपने मेहनत करके हासिल किया है. यहां मेहनत का अर्थ पढ़ने से है. यानी कि आप पढ़ना जानते हैं. आपने पढ़ाई की है. की है कि नहीं की है, इसका मूल्यांकन किया गया है और उस मूल्यांकन में सही पाये जाने पर आपको यह डिग्री दी गई है.

    अब हम आते हैं, सिविल सेवा की पढ़ाई करने के सत्य पर, जो दुर्भाग्य से आपके इस सत्य से अलग है. सिविल सेवा परीक्षा के लिए भी आपको जो सबसे जरूरी काम करना है, उसका संबंध भी पढ़ाई करने से ही है. लेकिन यहां मुश्किल यह है कि इसके लिये पढ़ाई करने का संबंध उस पढ़ाई करने से नहीं है, जो आपने अभी तक की है. यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती है. और यदि आप स्वयं इस चुनौती का सामना नहीं करने की स्थिति में हैं, तो फिर आपको किसी एक ऐसे की जरूरत है, जो इसका सामना करने में आपकी मदद कर सके. आइये, हम पढ़ने की इस चुनौती को सीधे-सीधे जानें.

    हमारी अब तक की पढ़ाई किताबों को पढ़ लेने, पढ़कर उनके कुछ हिस्सों को रट लेने और रटकर परीक्षा में पूछे जाने पर उन्हें लिख देने के त्रिभुज के तीनों ओर ही घूमती रही है. परीक्षा में प्रश्‍न भी इस तरह के ही पूछे जाते थे कि इस पद्धति से न केवल आपका काम चल गया था, बल्कि बहुत अच्छी तरीके से चल गया था. आपको इतने अधिक नम्बर मिल जाते थे कि कभी भी अपनी तैयारी के प्रति सन्देह करने का विचार ही मन में नहीं आया.

    सामान्‍य परीक्षा से अलग होती है UPSC की तैयारी 

    सिविल सेवा की परीक्षा यहीं पर आकर हमारे अनुभव पर आधारित पुरानी परीक्षा से अलग हो जाती है. यहां प्रश्‍न तो दिए गए पाठ्यक्रम से ही पूछे जाते हैं, लेकिन उनके पूछने का तौर-तरीका ऐसा होता है कि उनके बने-बनाये उत्तर हमें कहीं नहीं मिलते. उनके उत्तर हमारे दिमाग को ही बनाने पड़ते हैं और वह भी परीक्षा हॉल में बैठकर निर्धारित उस समय में, जो काफी कम होता है. समय की कमी दिमाग पर दबाव डालकर हमारे सामने उत्तर को सोचने और सोचकर लिखने की एक नई चुनौती पैदा कर देते हैं.

    यह एक ऐसी चुनौती होती है, जिसके लिए हमारा दिमाग अभी तक प्रशिक्षित है ही नहीं. बहुत से सवाल तो ऐसे जान पड़ते हैं, मानो कि ये पाठ्यक्रम से बाहर से आये हुए हों. कुछ तो ऐसे भी होते हैं कि लगते तो ऐसे हैं कि पाठ्यक्रम से ही हैं, लेकिन वे समझ में नहीं आते कि पूछा क्या जा रहा है. जब यही समझ में नहीं आ रहा है, तो लिखा क्या जाये, इस पर विचार करने का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता. अब मैं आता हूं मुख्य मुद्दे पर और वह यह कि तो फिर इसका हल क्या है.

    पढ़ने के बजाए समझने पर जोर

    दरअसल, इसका हल पढ़ने के तौर-तरीके को समझने के वर्तमान आवश्यक तरीके से विस्थापित करना होगा. पढ़ने के बजाय समझने पर जोर देना होगा और उसे भी इस तरीके से समझना होगा कि उसका स्वरूप ठोस से पिघलकर तरल हो जाये. यानी कि हमारे पास किसी टॉपिक के बारे में कुछ ठोस तथ्य हों और उसका शेष बड़ा हिस्सा अवधारणाओं के रूप में हो. इसी अवधारणा को यहां मैंने समझने की तरल अवस्था कहा है. जब भी कोई ज्ञान इस अवस्था में पहुंचता है, तो वह अपने ज्ञान को चाहे गए स्वरूप में बड़ी आसानी से ढाल लेता है.

    खुद का स्‍तर समझें

    अब यह आपके ऊपर है कि इस तरीके से पढ़ने के लिए आपको किसी की जरूरत है या नहीं है. यहां मैं एक बात और बताना चाहूंगा कि सिविल सेवा परीक्षा के अनुसार आपको कोई सही पढ़ाने वाला मिले, इस काम को आप इतना आसान न समझें. पढ़ाने वाले बहुत हैं, लेकिन समझाने वालों की संख्या नहीं के बराबर है. और यदि वे समझा नहीं रहे हैं, तो पढ़ तो आप स्वयं भी सकते हैं.

    न करें जल्‍दबाजी
    सच पूछिये तो यह इस क्षेत्र का एक बहुत बड़ा संकट है. इसलिए यदि आपको मदद चाहिए ही, तो आप यह मदद बहुत सोच-समझकर और जांच-परख कर ही लें. जल्दबाजी में कोई भी कदम न उठायें. और यह सोचकर हताश भी न हों कि यदि कोई नहीं मिल पा रहा है या आप उसकी फीस नहीं जुटा पा रहे हैं, तो तैयारी ही नहीं हो सकती. धैर्य और साहस नामक गुण यहां आपकी सहायता कर सकते हैं.

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    डॉ. विजय अग्रवाल की बाकी टिप्स पढ़ने के लिए, ऊपर लिखे उनके नाम पर क्लिक करें.

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