IAS Preparation Tips: आख‍िर इतनी कठिन क्यों है UPSC सिविल सेवा परीक्षा, जानें

UPSC IAS की परीक्षा में ऐसे सवाल पूछे जा सकते हैं, जो घटनाओं से जुड़े हों, मगर अनसुने से हों.

डॉ. विजय अग्रवाल | News18Hindi
Updated: August 27, 2019, 1:02 PM IST
IAS Preparation Tips: आख‍िर इतनी कठिन क्यों है UPSC सिविल सेवा परीक्षा, जानें
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डॉ. विजय अग्रवाल | News18Hindi
Updated: August 27, 2019, 1:02 PM IST
अपने पिछले ब्लाॅग में मैंने आपको सिविल सेवा परीक्षा के आंकड़ों की सच्चाई से अवगत कराया था. लेकिन मुझे डर है कि कहीं आप उसका अर्थ यह न लगा बैठें कि 'यह परीक्षा एक सरल परीक्षा है.' ऐसा सोचना आत्मघाती होगा. इस ब्लाॅग में मैं अब आपको यह बताने जा रहा हूं कि वे कौन-कौन सी मुख्य बातें हैं, जो इसे इतनी कड़ी प्रतियोगिता में तब्दील कर देती हैं. इसमें मैं इससे सम्बद्ध दो सबसे मुख्य बातों को रख रहा हूं.

IAS परीक्षा का पाठ्यक्रम 
इनमें से पहला है- इसका पाठ्यक्रम. यहां 'पाठ्यक्रम' का मतलब उसकी विशालता से कतई नहीं है. परीक्षा का बाकायदा एक निर्धारित पाठ्यक्रम है. यदि हम विषयों से संबंधित समान अंकों वाले कुल छह प्रश्‍न पत्रों को लें, तो इनमें से चार प्रश्‍नपत्र तो सामान्य अध्ययन के ही हो जाते हैं. चूंकि ये जनरल नाॅलेज से संबंधित होते हैं, इसलिए इनका स्तर भी कोई बहुत ऊंंचा नहीं होता. यदि आप सिलेबस पर भी निगाह डालेंगे, तो अपने आकार में यह आपको आतंकित करने की बजाय आकर्षित ही करेगा.

तो फिर पाठ्यक्रम की वे कौन सी बातें है, जो इस परीक्षा को इतना कठिन बना देती हैं. इस बारे में मैं यहां दो तथ्यों का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा. इनमें पहला है- पाठ्यक्रम का वह भाग, जो लिखित अंशों के बीच छिपा हुआ होता है. इसे अंग्रेजी में 'बिटविन द लाइंस' कहा जाता है. चूंकि यह अनकहा होता है, इसलिए अधिकांश परीक्षार्थी इसे देख पाने में असमर्थ होते हैं. परीक्षा में इस भाग से प्रश्‍न पूछे जाने पर उन्हें ये पाठ्यक्रम के बाहर से पूछे गए जान पड़ते हैं. जबकि सामान्यतया ऐसा होता नहीं है.

पाठ्यक्रम से जुड़ा दूसरा और बहुत चुनौतीपूर्ण भाग है, इसका समसामयिक घटनाओं से बहुत निकट के रिश्‍ते का होना. लिखित पाठ्यक्रम तो स्थायी होता है, जो पिछले कई सालों से लगभग ज्यों का त्यों चला आता रहता है. लेकिन करेंट अफेयर्स से जुड़कर यह सिलेबस बहुत ही लचीला और प्रवाहमयी बन जाता है. निश्‍चि‍त रूप से इसके कारण पाठ्यक्रम काफी अनिश्‍चय सा एवं वृहद भी हो जाता है. और यह भाग परीक्षार्थी की तैयारी के सामने सुरसा के मुख को पार करने जैसी कठिन घड़ियां उपस्थित कर देता है.

पिछले लगभग डेढ़ साल के करेंट अफेयर्स में से अपने लिए उपयोगी एवं महत्वपूर्ण घटनाओं का सही-सही चयन कर पाना इसकी सबसे बड़ी चुनौती होती है. इसके लिए हर समय सतर्क रहकर समाचारों से निरंतरता बनाए रखना कोई छोटी-मोटी बात नहीं होती. यह एक अलग प्रकार की साधना की मांग करता है. मुश्‍क‍िल यह है कि ग्रेजुएशन तक के कोर्स में इसके लिए किसी तरह का कोई विधान ही नहीं है. इसलिए परीक्षार्थी और भी अधिक भ्रमित रहते हैं. इसमें कमजोर परीक्षार्थी को अपनी नैया के पार लगने के बारे में ज्यादा आश्‍वस्‍त नहीं होना चाहिए, न तो प्रारम्भिक परीक्षा में, न तो मुख्य परीक्षा में और न ही साक्षात्कार में.

प्रश्‍नों को समझकर, उनका उत्‍तर देना
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अगली बड़ी कठिनाई आती है, पूछे गए प्रश्‍नों को समझने और समझकर उनके उत्‍तर देने की. प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षाओं में सीधे-सीधे उस तरह से प्रश्‍न नहीं पूछे जाते, जिनसे परीक्षार्थी इससे पहले परिचित रहे होते हैं. प्रश्‍न जटिल होते हैं. और वे अपने उत्‍तर के लिए आपसे आपके मौलिक विचारों एवं स्पष्ट-प्रभावशाली तर्कों की अपेक्षा करते हैं. यहां ‘रटंत तोता‘ बनने का फॉर्मूला काम नहीं करता है.
इन दोनों मुख्य चुनौतियों से निपटना कोई आसान काम नहीं है. और जिनको यह स्वाभाविक सा जान पड़ता है, उनके लिए यह परीक्षा उतनी कठिन और असंभव नहींं रह जाती.

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First published: August 20, 2019, 3:03 PM IST
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