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IAS Preparation Tips: क्यों है सिविल सर्विस इतना ग्लैमरस

UPSC स‍िव‍िल सेवा की नौकरी को लोग ग्‍लैमरस समझते हैं.

UPSC स‍िव‍िल सेवा की नौकरी को लोग ग्‍लैमरस समझते हैं.

यदि आप इसके बारे में लोगों से पूछेंगे, तो वे कहेंगे कि इसमें पावर है, जलवा है, सम्मान है, सुविधा है आदि-आदि. लेकिन क्‍या यह सब उन्‍हें ऐसे ही म‍िल जाता है. क्‍या उन्‍हें कुछ त्‍याग नहीं करना पड़ता. जान‍िये.

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जब हम सुनते या पढ़ते हैं कि मध्यम, निम्न-मध्यम और निम्न-वर्ग के युवा सिविल सर्विस में आ रहे हैं, तो यह खबर सामान्य सी लगती है. लेकिन जब यही खबर ऊंचे-धनी घरानों के युवाओं, डॉक्टर, एम.बी.ए., आईआई टियन्स तथा सीए जैसे प्रोफेशनल्स तथा मल्टीनेशनल कम्पनी में करोड़ों के सालाना पैकेज पर काम कर रहे युवाओं के बारे में पढ़ते हैं, तो सोचने के लिए बाध्य होना पड़ता है कि आखिर इसमें ऐसा है क्या?

यदि आप इसके बारे में लोगों से पूछेंगे, तो वे कहेंगे कि इसमें पावर है, जलवा है, सम्मान है, सुविधा है आदि-आदि. इस प्रश्न के जवाब में प्राप्त अधिकांश उत्तरों का संबंध भौतिक सुख-साधनों से होता है. इस तरह की बातों से तो यही लगता है कि यदि कोई इस सेवा में आ जाये, तो ये सभी चीजें उसे अधिकार के रूप में यूं ही मिल जाती हैं.

ये चीजें मिलती हैं, यह सच है. इसके अतिरिक्त भी ऐसी बहुत सी अदृश्य एवं अनकही चीजें भी मिलती हैं, जिनके बारे में सर्विस में आने के बाद ही पता चलता है. लेकिन ये सब यूं ही नहीं मिल जाते. अंग्रेजी में कहावत है, ‘नो लंच इज फ्री’. प्रत्येक भोज की आपको कीमत चुकानी पड़ती है. यहां कीमत से मेरा आशय ‘करने’ से है. व्यक्ति को इसके लिए बहुत कुछ करना पड़ता है. और यह करना अपने और अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि सर्वजन के लिए होता है. इसीलिए तो समाज बदले में सिविल सर्वेन्ट को इतना सब कुछ देता है.

अभी कोरोना वायरस ने दुनिया के साथ-साथ भारत के सामने भी अब तक कि सबसे बड़ी चुनौती पेश की है. जब आप गौर करेंगे कि भारत इस चुनौती का मुकाबला कैसे कर रहा है, तो आपको सबसे ऊंचे स्तर से लेकर निचले स्तर तक सिविल सवेन्ट्स की जूझती हुई फौज दिखाई देगी. निःसंदेह रूप से इसमें डॉक्टर्स, नर्सें, स्वास्थ्यकर्मी एवं सफाईकर्मियों की भूमिका किसी भी मायने में दोयम दर्जे की नहीं है. लेकिन जहां तक निर्णय लेने, उसे लागू करवाने तथा उसकी निगरानी करने से संबंधित जितने भी नियंत्रणकारी-प्रशासकीय कार्य हैं, वे सब सिविल सर्वेन्ट्स की टीम द्वारा किए जा रहे हैं. इसे आप उच्चतम स्तर पर बैठे कैबिनेट सचिव से लेकर नगरीय स्तर पर नगर निगम आयुक्त तक की पूरी श्रृंखला में देख सकते हैं.

जहां हम ‘कहीं कोरोना हो न जाये’ के भय से घर में दुबके हुए हैं, वहीं सिविल सर्वेन्ट्स अपने घर-बार को छोड़कर लोगों के लिए व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं. इस बारे में उनके पास कोई च्वाइस नहीं है. आप सभी इसे देख रहे हैं, और महसूस भी कर रहे हैं.

विचारक अब्राहम मोस्ले ने जीवन में प्रेरणा के पांच चरण बताये थे - भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना, समाज से सम्मान प्राप्त करना, अपने एवं अपने परिवार के लिए सुरक्षा की व्यवस्था करना, लोगों का प्रेम हासिल करना तथा आत्मसंतोष की प्राप्ति.

जीवन के अन्य क्षेत्रों में लोग इन्हें क्रमशः प्राप्त करते हैं. सिविल सेवा की अद्भुत विशेषता यह है कि ‘आत्म-संतोष’ के इस पांचवें एवं अंतिम चरण को आप इसमें प्रवेश करते ही प्राप्त कर सकते हैं. प्रोबेशन के समय भी आपके पास कुछ ऐसे कुछ और अधिकार होते हैं, जिनके आधार पर आप लोगों का वैसा भला कर सकते हैं, जो अन्य कोई नहीं कर सकता. आत्मसंतोष की यह अनुभुति विलक्षण आनंद देने वाली होती है. यह जीवन को एक नये अर्थ से भर देती है. दरअसल, इसे ही मैं सिविल सेवा का सच्चा ग्लैमर मानता हूं.

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