IAS Preparation Tips: एकेडमिक कोर्सेज के एग्जाम से अलग है आईएएस परीक्षा, रखना होगा इन बातों का ध्यान

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 17, 2020, 2:01 PM IST
  • Share this:
अभी तक आपने जो भी पढ़ाई की है, और जितनी भी परीक्षाएं दी हैं, वे सब एकल-चरित्र की परीक्षाएं थीं. यदि आप कला के विद्यार्थी हैं, तो आपके साथ परीक्षा देने वाले सभी इसी के ही होंगे. इंजीनियरिंग के छात्र इंजीनियरिंग के ही छात्रों के साथ परीक्षा देते हैं और कॉमर्स के छात्र कॉमर्स के ही छात्रों के साथ. चूंकि पाठ्यक्रम लगभग एक जैसा होता है, किताबें भी कमोवेश एक जैसी ही होती हैं और पेपर भी एक जैसे ही होते हैं, इसलिए यहां सब कुछ सीधा, सरल और सपाट जान पड़ता है.

लेकिन आई.ए.एस. की परीक्षा का स्वरूप न तो सीधा है और न सरल और न ही सपाट. यह परीक्षा एक ऐसे विशाल सागर की तरह है, जिसमें न जाने कितने-कितने विषयों की धाराएं आकर मिलती हैं- कला, कॉमर्स, साइन्स, इंजीनियरिंग, मेडिकल, सी.ए., मैनेजमेंट, वकालत तथा और भी न जाने क्या-क्या. जिसने भी ग्रेज्युएशन किया है, वह आई.ए.एस. की इस दौड़ में शामिल होने की पात्रता रखता है.

अब आप सिलेक्शन सूची में अपना नाम दर्ज कराने की चुनौती के बारे में थोड़ा संवेदनशील होकर सोचिए. इतनी सारी धाराएं और फिर एक ही धारा के न जाने कितने-कितने विषय. आई.ए.एस. की प्रारम्भिक परीक्षा में तो इस तरह का कोई संकट नहीं है. लेकिन मुख्य परीक्षा में तो ऑप्शनल पेपर को लेकर थोड़ा-सा संकट आ ही जाता है. कुछ पेपर्स बहुत स्कोरिंग होते हैं, तो कुछ पेपर्स में नम्बर कम मिलते हैं. हालांकि यू.पी.एस.सी. ने इस समस्या से निपटने के लिए स्केलिंग की व्यवस्था कर रखी है. फिर भी मन में दूसरे के स्कोर को लेकर एक भय तो समाया ही रहता है.



यह भी पूरी तरह सच नहीं है कि इस तरह की चुनौती केवल ऑप्शनल पेपर्स को लेकर ही है. अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को जनरल नॉलेज के पेपर में भी अलग-अलग फायदे और नुकसान होते हैं. जहां कला के विद्यार्थी कई मायनों में लाभ की स्थिति में होते हैं, वहीं साइन्स के विद्याथियों को थोड़ा नुकसान होता है. लेकिन बात जब ‘सीसैट‘ की आती है, तो उसमें इंजीनियरिंग वाले फायदे में आ जाते हैं. साइन्स वालों को अधिक नुकसान न हो, इसके लिए विज्ञान को भी काफी जगह दी गई है. कुल-मिलाकर यह कि हालांकि यू.पी.एस.सी. ने सभी स्ट्रीम के विद्यार्थियों के बीच एक तालमेल बैठाने की हर सम्भव कोशिश की है, लेकिन वह पूरी तरह कारगर नहीं हो पाता.
ऐसी स्थिति में आपकी चुनौती इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस ब्रांच के विद्यार्थी रहे हैं. इस चुनौती का मुकाबला आप तभी कर सकते हैं, जब आप विशेषकर अपनी उन कमजोरियों से जूझें, जिनमें आप अपने को पीछे पा रहे हैं. यू.पी.एस.सी. को इससे कोई मतलब नहीं कि आपकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है. वह तो केवल आपके प्राप्तांक देखेगी और आपके बारे में घोषणा कर देगी. यहां आपकी प्रतियोगिता केवल अपने विषय वालों से ही नहीं है, बल्कि सभी विषय वालों से है और इसका यह चरित्र आपके सामने फिर से नए चैलेंजेस पेश करता है.

(लेखक पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक है.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज