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IAS की बढ़ती अधिकतम उम्र से ग्रामीण युवाओं की सफलता में वृद्धि की संभावना

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आईएएस में चयन नहीं भी हो पाता तो भी तैयारी का फायदा जरूर मिलता  है.
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आईएएस में चयन नहीं भी हो पाता तो भी तैयारी का फायदा जरूर मिलता है.

अधिकतम 26 वर्ष ही आयु सीमा देखते-ही-देखते तीन दशकों में 32 वर्ष तक पहुँच गई है. अब यह सामान्य वर्ग के लिए 33 वर्ष तथा अन्य के लिए 36 वर्ष हो गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 9:34 AM IST
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नई दिल्ली. अंततः सरकार ने आई.ए.एस. की तैयारी करने वालों उन प्रतियोगियों को एक अतिरिक्त अवसर देने की घोषणा कर दी है. जो अपनी अधिकतम आयु के अंतिम वर्ष की परीक्षा में कोरोना के कारण बैठ नहीं पाये थे. इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि इस वर्ष की अधिकतम आयु में एक वर्ष की वृद्धि कर दी गई है. अब यह सामान्य वर्ग के लिए 33 वर्ष तथा अन्य के लिए 36 वर्ष हो गई है.

अधिकतम आयु सीमा 26 से 32 वर्ष तक
अब आशंका इस बात को लेकर है कि कहीं ऐसा न हो कि उम्र की यह अधिकतम सीमा हमेशा के लिए यही न हो जाये. अधिकतम 26 वर्ष ही आयु सीमा देखते-ही-देखते तीन दशकों में 32 वर्ष तक पहुँच गई है. और ऐसा होने के पीछे कोरोना जैसे ही कुछ न कुछ बाधागत कारण ही रहे हैं.

 ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की सफलता की संभावना में वृद्धि
एक बड़ा वर्ग है, जो उम्र की इस सीमा को बढ़ाये जाने की वकालत करता है. इनका मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की सफलता की संभावना में वृद्धि होगी. ये यह मानकर चलते है कि गाँव के युवाओं को स्नातक होने में अपेक्षाकृत लम्बा वक्त लग जाता है.



तीन-चार साल फेल, तो आई.ए.एस. बनने की संभावना पर प्रश्न चिह्न
लेकिन सवाल यह है कि कितना लम्बा वक्त ? स्नातक होने के लिए कुल 15 साल पढ़ाई करनी पड़ती है. यदि आपने इसकी शुरुआत 6 साल से भी की और लगातार सफल होते रहे, तो 21 साल की उम्र तक आप ग्रेजुएशन कर लेते हैं. और यदि इस बीच तीन-चार साल फेल होते हैं, तो इससे सीधे-सीधे आपकी आई.ए.एस. बन पाने की संभावना पर एक प्रश्न चिह्न तो लग ही जाता है.

किस उम्र के कितने फीसदी कैंडिडेट्स सफल
संघ लोक सेवा आयोग उम्र एवं सफलता के परस्पर संबंध संबंधी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आँकडे़ भी जारी करता है. नवीनतम आँकड़ों के अनुसार 21 से 24 वर्ष की आयु वर्ग के 17.5% प्रतियोगी सफल हुए हैं. 24 से 26 वर्ष के वर्ग में यह प्रतिशत 32% तथा 26 से 28 वर्ष के वर्ग में यह 27.2% है. यदि इन तीनों को जोड़कर 21 से 28 वर्ष का एक वर्ग तैयार किया जाये, तो इसका प्रतिशत 74.7% होता है. चौदह प्रतिशत सफल युवा 28 से 30 वर्ष के वर्ग के थे. 30 वर्ष से ऊपर के वर्ग वालों का प्रतिशत मात्र 9.3% था. इस वर्ग का दायरा भी 5 वर्ष का है.

परीक्षा में अधिकतम केवल चार बार ही बैठ सकते हैं
जाहिर है कि सफलता का बेहतर प्रतिशत अधिकतम 28 वर्ष तक का ही है. इनकी न्यूनतम आयु 21 रखी गई है. यदि न्यूनतम 21 एवं अधिकतम आयु 28 भी रखी जाती है, तब भी एक प्रतियोगी को परीक्षा में बैठने के लिए सात वर्ष मिलते हैं. जबकि यदि हम सामान्य वर्ग की बात करें, तो इस बीच परीक्षा में अधिकतम केवल चार बार ही बैठ सकता है. पिछड़े वर्ग के युवा को एक मौका और मिल जाता है.

लेकिन फिलहाल ऐसा है नहीं और ऐसा होने की कोई संभावना भी नहीं है. किन्तु इसका खामियाजा केवल प्रशासन को ही नहीं, बल्कि स्वयं युवाओं को भी भुगतना पड़ रहा है. अधिकतम आयु सीमा उनके अन्दर के उत्साह को कम करके उनकी सफलता के वर्ष को आगे खिसकाती जाती है. युवा एक आशा के साथ 32-35 वर्ष तक इसमें लगे रहते हैं. और अंत में जब सफलता हाथ नहीं लगती, तो अवसाद के शिकार हो जाते हैं. उम्र की यह अधिकतम सीमा उन्हें अपने आकर्षक-पाश में जकड़कर कहीं का नहीं छोड़ती.

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वैसे भी यदि तार्किक रूप से सोचा जाये, तो जिन युवाओं का चयन अधिक उम्र में होता है, उनका चयन कम उम्र में भी हो जाता, बशर्ते वह कम उम्र अधिकतम सीमा होती. दरअसल, अधिकतम उम्र-सीमा का अधिक होना एक सुविधा और एक अवसर नहीं, बल्कि महज एक मनोवैज्ञानिक छलावे से अधिक कुछ भी नहीं जान पड़ता. (लेखक डॉ० विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक हैं.)

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