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IAS Preparation Tips: जानिए आईएएस बनने के लिए दो सबसे प्रमुख मानसिक गुण

News18Hindi
Updated: December 3, 2019, 5:55 PM IST
IAS Preparation Tips: जानिए आईएएस बनने के लिए दो सबसे प्रमुख मानसिक गुण
IAS Preparation Tips: मौलिकता बहुत बड़ी चीज़ होती है, फिर चाहे वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो. फिर यहांं तो आप देश के सबसे बड़े अफसर बनकर समाज का दायित्व संभालने जा रहे हैं. इसलिए इसका विशेष ध्‍यान रखें

IAS Preparation Tips: मौलिकता बहुत बड़ी चीज़ होती है, फिर चाहे वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो. फिर यहांं तो आप देश के सबसे बड़े अफसर बनकर समाज का दायित्व संभालने जा रहे हैं. इसलिए इसका विशेष ध्‍यान रखें

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  • Last Updated: December 3, 2019, 5:55 PM IST
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IAS Preparation Tips: मेरे पिछले लेख से जैसा कि यूपीएसी ने स्वयं ही स्पष्ट किया है, आपको यकीन हो गया होगा कि रटकर लिख देने की क्षमता यहाँ बिल्कुल भी काम नहीं करती. सच तो यह है कि प्रश्‍न ही कुछ इस तरह से पूछे जाते हैं कि उनके रटे रटाए जवाब हो ही नहीं सकते. रटे हुए तथ्यों की उपयोगिता यहांं केवल इतनी भर होती है कि वे विश्‍लेषण करने में तथ्यों का काम करेंगे, कंटेंट का काम करेंगे.

अनसॉल्‍वड पेपर जरूर पढ़ें

आपने जो कुछ भी उस टाॅपिक पर पढ़ा है, वह यहांं कच्चे माल की तरह काम आना चाहिए, जैसे कि सब्जी बनाने में आलू, गोभी, नमक-मिर्च और मसाले काम आते हैं. इन चीजों को मिला देने भर से सब्ज़ी नहीं बनती. इन्हें पकाना पड़ता है. ठीक यही बात सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा पर लागू होती है. मैं यहांं आपसे एक अनुरोध करूंगा कि आपको एक बार मुख्य परीक्षा के अनसाॅल्वड पेपर जरूर पढ़ लेने चाहिए. प्रश्‍नों को देखने और पढ़ने के बाद आपको लगेगा कि हर प्रश्‍न आपसे विश्‍लेषण की मांंग करता है. जो कुछ भी आपने पढ़ा है, वह ठीक है. लेकिन यहांं जरूरत इस बात की है कि उस पढ़े हुए को आपने समझा कितना है और समझने के बाद आप किस प्रकार उसका विश्‍लेषण कर पाते हैं.

यह मस्तिष्क की गुणवत्‍ता की एक परख होती है कि जो मस्तिष्क जितना अधिक विष्लेषण कर सकता है, उसे उतना ही उपजाऊ मस्तिष्क माना जाता है. विष्लेषण करने की क्षमता ही अपने-आपमें मस्तिष्क की एक्सरसाइज़ होती है. जिस प्रकार एक्सरसाइज़ शरीर को स्वस्थ और मजबूत बना देती है, उसी प्रकार विष्लेषण भी मस्तिष्क को अधिक स्वस्थ और उपयोगी बना देता है.

मौलिकता
केवल विश्‍लेषण ही पर्याप्त नहीं है. आप एक बार फिर से मुख्य परीक्षा के प्रष्नों को पढ़िए और ध्यान से पढ़िए. आप देखेंगे कि अधिकांश प्रश्‍नों के साथ कुछ इस तरह का पुछल्ला जुड़ा रहता है कि ‘आलोचनात्मक विश्‍लेषण कीजिए‘, ‘समालोचनात्मक विवेचना कीजिए‘, ‘समीक्षा कीजिए‘ या ‘इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए‘ आदि-आदि. आपने विषय को पढ़ा है ठीक है. आप उसका विश्‍लेषण भी कर सकते हैं, यह भी ठीक है. आपने जो पढ़ा है और जाना है, वह आपके मस्तिष्क की सजगता और सतर्कता के प्रमाण हैं. आपने उनका विष्लेषण किया है, यह आपके मस्तिषक के चमकदार और उपजाऊ होने का प्रमाण है. लेकिन जब आप उस विषय के बारे में अपने विचार देते हैं, तो वह सही मायने में इस बात का प्रमाण होता हे कि उस उपजाऊ दिमाग से अंततः उपजा क्या है. यहीं आपके मस्तिष्क की मौलिकता की परख होती है. यही इस बात को प्रमाणित करता है कि आपका मस्तिष्क किसी भी विषय पर नए रूप में क्या सोचता है, कैसे सोचता है. और इस बात को कतई न भूलें कि जब हम मौलिक रूप में सोचते हैं, अपने विचार रखते हैं, तो उसमें हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व प्रतिपादित होता है.

प्रश्‍न को हल्‍के में न लें
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बहुत से विद्यार्थी इस अपने अनुसार विवेचना वाले पुछल्ले को हल्का-फुल्का मानते हुए इसे चलताऊ ढंग से हल कर देते हैं. एक तो उन्हें लगता है कि यह बहुत उपयोगी नहीं है, पूरे प्रश्‍न का छोटा-सा हिस्सा ही तो है. साथ ही वे यह भी पाते हैं कि इसका उत्‍तर देना आसान काम नहीं है. कौन इसके साथ सिर खपाए. चूँकि उन्होंने इससे पहले उस टाॅपिक पर अपनी कोई सोच बनाई ही नहीं थी, इसलिए यहांं उसके बारे में कुछ भी लिख पाना उनके लिए मुष्किल हो जाता है. और यहीं वे चूक जाते हैं. फलस्वरूप यू.पी.एस.सी. मस्तिष्क की जिस मौलिकता की खोज कर रहा था, वह उसे वहांं नहीं मिल पाती.

मौलिकता बनाएं रखें
समाज अपने तरीके से चलता रहता है. अधिकांश चीजें रिपीट ही होती हैं, लेकिन समाज के विकास में मोड़ और उछाल तब ही आता है जब कोई मौलिक विचारों से प्रेरित होकर कुछ नया करता है. सही मायने में यह नया करना ही किसी भी प्रशासक का समाज और देश को अपनी ओर से दिया गया सच्चा योगदान होता है. यदि वह ऐसा नहीं कर पाता, तो उसकी भूमिका महज़ एक ऐसे मैनेजर की रह जाती है, जो चीज़ों की केवल व्यवस्था करता रहता है. मौलिकता बहुत बड़ी चीज़ होती है, फिर चाहे वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो. फिर यहांं तो आप देश के सबसे बड़े अफसर बनकर समाज का दायित्व संभालने जा रहे हैं.

- डाॅ॰ विजय अग्रवाल

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First published: December 3, 2019, 4:37 PM IST
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