IAS Preparation Tips: सफलता के लिए मानसिक दृढ़ता होना है ज़रूरी, उलझाव कर सकता है नुकसान

IAS Preparation Tips: सफलता के लिए मानसिक दृढ़ता होना है ज़रूरी, उलझाव कर सकता है नुकसान
IAS Success Planner: तैयारी के वक्त मानसिक दृढ़ता होना ज़रूरी है.

IAS Preparation Tips: आई.ए.एस. की तैयारी करने की इच्‍छा रखने वाले प्रत्‍येक युवा को इस सामान्‍य-सी जानकारी का तो भान होगा ही कि यह देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक परीक्षा है.

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आई.ए.एस. परीक्षा की तैयारी के संबंध में सलाह लेने के लिए मेरे पास रोजाना कई मेल आते हैं. इनमें से कई मेल्‍स में मुझसे एक ऐसी विचित्र समस्‍या का समाधान पूछा जाता है, जो मूलत: मेरी दृष्टि से समस्‍या ही नहीं होती. लेकिन पूछने वाले मेरी इस बात से सहमत नहीं हो पाते.

आइये, इसे समझने की कोशिश करते हैं.
इस प्रश्‍न के उत्तर के रूप में मैं आप सबसे एक प्रश्‍न पूछना चाहूंगा कि ‘आप अपने जीवन का वह एक काम सोचकर मुझे बतायें, जिसको आपने बिना समय के ही अंजाम दे दिया हो, यहाँ तक कि वह कितना भी छोटे-से छोटा काम क्‍यों न हो?’ आप नहीं बता सकेंगे? कम से कम फिलहाल तो पृथ्‍वी नामक इस ग्रह पर ऐसा कोई भी कार्य संभव नहीं है, जिसमें स्‍थान और समय शामिल न हो. यदि आप मेरे इस विचार से सहमत हैं, तो जाहिर है कि आपकी यह समस्‍या न केवल अर्थहीन ही है, बल्कि हास्‍यास्‍पद भी है.
मेरी समझ से आई.ए.एस. की तैयारी करने की इच्‍छा रखने वाले प्रत्‍येक युवा को इस सामान्‍य-सी जानकारी का तो भान होगा ही कि यह देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक परीक्षा है.
स्‍नातक करने में तीन साल लगते हैं. पोस्‍ट ग्रेज्‍यूएशन करने में दो साल लगते हैं. बी.ई. करने में चाल साल और एम.बी.बी.एस. करने में पाँच साल लगते हैं. इनमें से या अन्‍य आपने जो भी किया, क्‍या उनमें से किसी के भी बारे में आपने किसी से भी यह पूछा कि इन्‍हें मैं बिना समय के कैसे हासिल करुं. नहीं न. लेकिन आप आई.ए.एस. बनने के लिए यह सवाल पूछते हैं. बी.ए., बीएससी, बी.कॉम करने के बाद आपको सीधे-सीधे इसी आधार पर शायद ही कोई नौकरी मिलती है. इनके लिए आप तीन साल लगाते हैं. लेकिन आई.ए.एस. की जो परीक्षा आपको देश की सबसे ऊँची, अधिकार वाली तथा प्रतिष्‍ठापूर्ण नौकरी दिलवाती है, उसके लिए आपके पास समय नहीं है. उसे आप जल्‍दबाजी में और बिना समय लगाये ही पाना चाहते हैं. क्‍या आपको अपनी यह चाहत तर्कपूर्ण लगती है?



हमारी प्रत्‍येक समस्‍या से जुड़ा प्रश्‍न हमारे अपने गहरे मनोविज्ञान की सूचना दे रहा होता है. आई.ए.एस. बनना चाहता हूँ, लेकिन समय नहीं है, का गहरा मनोवैज्ञानिक अर्थ यह ध्‍वनित होता है कि 'मेरी यह इच्‍छा मात्र एक सतही इच्‍छा है. मेरा यह निर्णय उत्तेजना में लिया गया निर्णय है. मैं दुनिया को सुनाने के लिए ऐसा कर रहा हूँ, ताकि दुनिया वाले मेरी ओर उंगली न उठा सकें.'

कुल-मिलाकर यह कि समय की समस्‍या संबंधी यह प्रश्‍न एक बहुत ही कमजोर मस्तिष्‍क का प्रमाण प्रस्‍तुत करता है. जबकि आई.ए.एस. बनने के लिए और बनने के बाद भी एक बहुत मजबूत मस्तिष्‍क की जरूरत होती है.  यदि बड़ी वस्‍तु की प्राप्ति की इच्‍छा प्राथमिक इच्‍छा नहीं है, तो उसके मानसिक बोझ को बर्दाश्‍त करते रहने से हानि ही होगी.

(लेखक पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट एवं afeias के संस्‍थापक हैं.)
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