IAS Preparation Tips: आईएएस परीक्षा की तैयारी के ल‍िये जरूरी है टेस्‍ट सीरीज बनाना

IAS Preparation Tips: आईएएस परीक्षा की तैयारी के ल‍िये जरूरी है टेस्‍ट सीरीज बनाना
UPSC स‍िव‍िल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्‍मीदवारों के ल‍िये जरूरी हैं ये ट‍िप्‍स

IAS Preparation Tips: यूपीएससी स‍िव‍िल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्‍मीदवारों के ल‍िये टेस्‍ट सीरीज बनाना बहुत जरूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 4, 2020, 8:54 PM IST
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सिविल सेवा में सफल परीक्षार्थी प्रारंभिक परीक्षा के लिए अक्सर टेस्ट सीरिज का अभ्यास करने की सलाह देते हैं, जिसमे इंकार करना सत्य को नकारना होगा. विशेषकर साल 2011 से प्री के प्रश्नों के स्वरूप में जिस तरह की जटिलतायें, दुरूहता, भ्रमात्मक विकल्प, विकल्पों के समूह तथा प्रश्नों के आकार में वृद्धि हुई है, इन सबको देखते हुए तो यह अभ्यास एक अनिवार्य सा मालूम पड़ता है.

मैं इस लेख में आपसे कुछ उन विशेष बिन्दुओं के बारे में चर्चा करने जा रहा हूं, ताकि इस अभ्यास को आप अपने लिए अधिक से अधिक लाभकारी बना सकें.

अभ्यास क्यों- यह एक प्रकार से ‘एक्लेमेटाइजेशन‘ करने जैसा है. यानी कि स्वयं को वातावरण के अनुकूल बनाने जैसा, जैसे कि अंतरिक्ष में जाने से पहले अंतरिक्ष यात्री करते हैं, ताकि वे वहां की विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला कर सकें. यदि आप सही तरीके से पूरी सर्तकता (कॉन्सेसली) एवं समर्पण के साथ टेस्ट सीरिज हल करते हैं, तो उससे आपको निम्न प्रकार के ऐसे मनोवैज्ञानिक लाभ मिलते हैं जिनकी उपेक्षा की ही नहीं जा सकती. ये आवश्यक परिवर्तन हैं -
1) इससे आपकी पहले से ही प्रश्न पत्र के चुनौतीपूर्ण चेहरे से जान-पहचान हो जाती है. यह पहचान आपको परीक्षा हॉल में सरल एवं सहज बनाये रखती है.
2) प्रश्नों की जटिलताओं के साथ आपका मानसिक तालमेल बैठ जाता है. यानी कि आपके दिमाग का प्रश्नों के साथ लयता आ जाती है.


3) ऊपर के दोनों परिवर्तन आपकी क्षमता में कई गुना वृद्धि कर देते हैं. पूर्व-अभ्यास आपके अंदर के भय को कम करके आपमें उस विशेष गुण का संचार कर देता है, जिसकी जरूरत परीक्षा हाल में सबसे अधिक होती है. और उस गुण का नाम है - आत्म विश्वास, जिसकी कमी सरल प्रश्नों के भी गलत उत्तरों पर निशान लगवा देती है.
अभ्यास कैसे करें - अधिक से अधिक अभ्यास करने से ज्यादा बेहतर है कि कम ही अभ्यास करें, लेकिन सही तरीके से. इस बात को गांठ बांध लें कि यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, न कि ज्ञान-अर्जन करने की कोई विधि.
आइये, कुछ आवश्यक तरीकों पर एक निगाह डालते हैं.

1) नॉलेज के लिए अभ्यास न करें. इससे आपको कुछ विशेष लाभ नहीं होगा. फिर भी महत्वपूर्ण तथ्यों के आने पर उन्हें ध्यान में रखें.
2) अपने अभ्यास को प्रश्नों के जटिल स्वरूप से अच्छी तरह परिचित होने पर केन्द्रीत करें, ताकि इसके भुलभूलैया वाले रास्ते आपकी पहचान और पकड़ में आ जायें. यह सबसे अधिक जरूरी है.
3) शुरू के 3-4 टेस्ट पेपर्स बहुत आराम के साथ प्रश्नों की उलझनों को समझने में लगायें. चाहे एक पेपर के लिए पूरा एक दिन क्यों न लग जाये.
4) लगभग 10-15 पेपर्स तो हल करने ही चाहिए, तभी दिमाग उसमें रम सकेगा.
5) टेस्ट पेपर्स के स्तर एवं स्वरूप वास्तविक परीक्षा के समकक्ष (या उससे थोड़ा ही कम) होने चाहिए.
6) लगभग 8-10 पेपर्स तो बिल्कुल परीक्षा की ही पद्धति से हल करें. यानी कि एक कमरे में बैठकर 2 घंटे में हल करना.
7) यदि स्कोर कम आते हैं, तो निराश बिल्कुल भी न हों. यहां मुख्य बात स्कोर करना नहीं, बल्कि पेपर्स के साथ मानसिक सामंजस्य बैठाना है, जो अभ्यास करने से अपने-आप ही होगा.
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