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IAS Preparation Tips: आईएएस परीक्षार्थियों को क्यों सीखनी चाहिए अंग्रेजी

IAS Preparation Tips: आईएएस परीक्षार्थियों को क्यों सीखनी चाहिए अंग्रेजी

IAS Preparation Tips: अगर आपको अंग्रेजी नहीं आती है तो इसके कई गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, इनमें विदेश जाने का मौका भी शामिल है.

IAS Preparation Tips: अगर आपको अंग्रेजी नहीं आती है तो इसके कई गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, इनमें विदेश जाने का मौका भी शामिल है.

IAS Preparation Tips: अगर आपको अंग्रेजी नहीं आती है तो इसके कई गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, इनमें विदेश जाने का मौका भी शामिल है.

IAS Preparation Tips: मैं इस बारें में बहुत लंंबा-चौड़ा भाषण नहीं देना चाहता. मैं यहांं केवल उन व्यावहारिक सच्चाइयों की तरफ आपका ध्यान दिलाना चाहूंंगा, जिनके संसर्ग में आप आईएएस बनने के बाद आएंंगे. इसीलिए यूपीएससी ने अंग्रेजी का एक अनिवार्य पेपर रखा हुआ है. वह यह मानता है कि जिसके पास अंग्रेजी की इतनी मूलभूत जानकारी होगी. धीरे-धीरे उसके अन्दर के ये बीज अपने-आप ही वृक्ष बन जाएंंगे. अंग्रेजी आपके लिए आगे चलकर किस प्रकार सहायक सिद्ध होगी. मैं इसकी थोड़ी-सी चर्चा कर रहा हूंं.  सेलेक्ट होने के बाद आपको लगभग डेढ़ से दो साल तक अपनी सर्विस से संबंधित प्रशिक्षण-केन्द्रों पर ट्रेनिंग लेनी होती है. अभी भी लगभग-लगभग सभी टेªनिंग इंस्टीट्यूट्स में प्रशिक्षण का माध्यम अंग्रेजी ही है.

इसलिए जरूरी है अंग्रेजी
कभी-कभार ही कोई लेक्चर हिंदी में होता है. हांं, यह ज़रूर है कि आप प्रशिक्षण के बाद होने वाली परीक्षा यूपीएससी की परीक्षा के लिए चुने गए माध्यम से दे सकते हैं.  वैसे राज्यों में तो अंग्रेजी का दबदबा काफी कम हो गया है. वहांं की अधिकांश मीटिंग्स में हिंंदी बोली जाती है या फिर उन राज्यों की अपनी भाषा. लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं है. केन्द्र सरकार में उच्च अधिकारी विभिन्न राज्यों से डेप्यूटेशन पर जाते हैं. यह संभव नहीं हो पाता कि वे सभी हिंदी जानते ही हों. फलस्वरूप वहांं की मीटिंग्स में अंग्रेजी का अभी भी काफी महत्व है. ऐसा नहीं है कि वहांं आप अपनी बात हिन्दी में कह नहीं सकते, लेकिन दूसरों की बातों को समझ पाएंं इतनी अंग्रेजी तो आनी ही चाहिए.

केंद्र सरकार के सारे काम-काज अंग्रेजी में
केंद्र सरकार का अधिकांश काम अभी भी अंग्रेजी में ही होता है. केंद्र  सरकार अपने ही अन्य विभागों, मंत्रालयों तथा राज्यों को जितने भी पत्र भेजती है, अधिकाशंत अंग्रेजी में ही होते हैं. संवैधानिक अनिवार्यता के कारण कभी-कभी हिंदी का पत्र भी भेज दिया जाता है, जिसका अनुवाद राष्ट्रभाषा विभाग के अधिकारी करते हैं. ठीक यही स्थिति केंद्र सरकार की फाईल की भी होती हैं. वहांं जब फाईल आपके पास आएंगी तो आप चाहें तो हिंदी में नोट्स कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए ज़रूरी होगा कि आप पहले से फाईल में लिखी नोट्स को पढ़कर समझ तो सकें जो कि अंग्रेजी में लिखी होती हैं. जब आप भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर होंगे या किसी राज्य में ही पोस्टेड होंगे, तो आपको अन्य राज्यों में मीटिंग्स के लिए जाना पड़ेगा. यदि आप उत्‍तर-पूर्व भारत या दक्षिण के राज्यों के दौरे पर हुए तो वहांं  बिना अंग्रेजी के काम करना थोड़ा मुश्‍किल हो जाएगा.

विदेशी दौरे में होगी मुश्‍किल
संवाद की वह स्थिति नहीं बन पाएगी, जो अन्यथा बननी चाहिए. इससे दिक्कत तो पैदा होगी ही. ठीक यही स्थिति विदेशी दौरों में भी आएगी. विदेशोंं में अंग्रेजी के बिना आप कुछ नहीं कर सकेंगे. एअरपोर्ट से लेकर सरकारी दफ्तरों तक कहीं भी नहीं. यदि आपको अंग्रेजी नहीं आती, तो इसका दुष्परिणाम यह भुगतना पड़ सकता है कि इसी आधार पर आपको विदेश जाने के मौकों से ही वंचित कर दिया जाए.

विदेश में पढ़ने के मौके भी छूट जाएंगे
सर्विस के दौरान भी अनेक तरह की ट्रेनिंग होती हैं. इनमें विदेशो में होने वाली ट्रेनिंग भी शामिल है. साथ ही यदि आप चाहें, तो दो या तीन साल के लिए विदेशों में अध्ययन के लिए भी जा सकते हैं. सरकार आपकी इस शिक्षा का पूरा खर्च उठाती है. लेकिन विदेशों से शिक्षा पाने की आपकी यह इच्छा अंग्रेजी के बिना पूरी नहीं हो पाएगी. अंग्रेजी की इस ताकत को न चाहते हुए भी हमको स्वीकार करना पड़ेगा कि जिस प्रकार हिन्दी विशाल और बहुभाषी भारत की संपर्क भाषा है. ठीक उसी प्रकार अंग्रेजी इस विशाल एवं बहुभाषी दुनिया की सम्पर्क भाषा है. मित्रों, मै यह नहीं कहता कि आप अंग्रेजी के बिना बौने ही रह जाएंंगे. आप ऊपर जा सकते हैं, शायद उससे भी ऊपर; जितनी ऊंंचाई के बारे में आपने सोचा है. लेकिन इस तथ्य की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि अंग्रेजी जानने के बाद आपकी यह ऊंंचाई और भी ऊपर हो सकती है, क्योंकि ऊँचाई की कोई सीमा नहीं होती.

डॉ विजय अग्रवाल

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Tags: UPSC, UPSC Exams

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