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IAS JOB: यह किसी निजी उद्योगपति या वर्ग विशेष की नौकरी नहीं

IAS JOB: यह किसी निजी उद्योगपति या वर्ग विशेष की नौकरी नहीं

डॉ. विजय अग्रवाल

डॉ. विजय अग्रवाल

IAS Preparation Tips: जब आप एक ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों से मिलते हैं, जिनको आप कोई लाभ नहीं पहुंचा सकते, लेकिन जैसे ही उसे यह ज्ञात होता है कि आप आईएएस हैं, वैसे ही सामने वाले की आंखों की चमक बदल जाती है.

(डॉ. विजय अग्रवाल)

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सिविल सर्विस आपको एक पुख्ता आर्थिक आधार देती है. साथ ही, आर्थिक मामलों में आपको यह आपके भविष्य के भी प्रति निश्चिंत बना देती है. लेकिन यह उसका एक छोटा-सा ही पहलू है. पोस्टिंग मिलने के बाद नहीं, बल्कि जैसे ही संघ लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित सफल उम्मीदवारों की सूची में आपका नाम दर्ज होता है, उसका पता चलते ही आपकी दुनिया एकदम से बदल जाती है. यह कुछ जादू जैसा होता है कि आपके प्रति तत्काल लोगों की धारणाएं और दृष्टि बदल जाती हैं और उनके सद्भाव तथा प्रशंसापूर्ण बर्ताव से ऐसा लगने लगता है, मानो आप किसी नई दुनिया में प्रवेश कर गए हैं.

इसलिए आईएएस बनना कुछ विशिष्ट बनने के साथ-साथ एक जीवन-पद्धति बन जाती है. एक ऐसी जीवन पद्धति, जिसके चारों ओर ऊर्जा का एक अदृश्य घेरा घूमता रहता है और आप यह सोचकर एक साफ-सुथरे जीवन-पद्धति को अपनाने को प्रेरित (मजबूरी में ही सही) होते हैं कि “लोगों की निगाहें मेरी ओर हैं.”

‘सरकारी नौकरी’
दरअसल, लोग जिसे ‘सरकारी नौकरी’ कहते हैं, वह यह है ही नहीं. यह सरकारी सेवा नहीं, सिविल सेवा (नागरिकों की सेवा) है. यह न तो किसी निजी उद्योगपति की नौकरी है और न ही किसी वर्ग विशेष की. यह सबकी है, सबके लिए है, बावजूद इसके कि व्यवहार में अधिकांशतः आपको कुछ ही लोगों की सेवा (प्रशासन) करने का अवसर मिलेगा. लेकिन इसका प्रभाव एवं चमक कुछ ही लोगों तक सीमित नहीं रहती.

आप आईएएस हैं, ये जानते ही लोगों की आंखों की चमक बदल जाती है
यही कारण है कि जैसे ही आप इस सेवा में आते हैं, समाज की पवित्र प्रतिष्ठा के पात्र बन जाते हैं. यहां ‘पवित्र’ शब्द का उपयोग मैंने इसलिए किया है, क्योंकि यह सम्मान स्वार्थ पर आधारित न होकर आपकी योग्यता पर आधारित होता है. जब आप एक ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों से मिलते हैं, जिनको आप कोई लाभ नहीं पहुंचा सकते, लेकिन जैसे ही उसे यह ज्ञात होता है कि आप आईएएस हैं, वैसे ही सामने वाले की आंखों की चमक बदल जाती है. वह सम्मान देने के साथ-साथ आपका खयाल भी रखने लगता है. ऐसा एक-दो साल नहीं, बल्कि तब तक तो होता ही रहता है, जब तक आप साठ साल की उम्र पूरी करके रिटायर नहीं हो जाते. और यदि आपने अपने कार्यकाल को बेहतर तरीके से बिताया है, तो अंतिम विश्रामघाट की भीड़ और उनके आंखों का पानी इस सच की गवाही देता है, जिसे देखने के लिए आप मौजूद नहीं रहते.

क्या यह कम बड़ी बात है? और ऐसा सिर्फ इसलिए होता है, होता रहता है, क्योंकि एक निश्चित समयावधि में जी जान लगाकर आप सिविल सर्वेंट बन गए हैं. एक बहुत महत्वपूर्ण छिपा हुआ सत्य यह भी है कि इसमें आने के बाद आप अकेले नहीं रह जाते. आप देश के सर्वोच्च एवं सबसे अधिक अधिकारसम्पन्न, सुदृढ़ प्रशासनिक संजाल से जुड़ जाते हैं. इस संजाल का फैलाव देश की सीमा से परे विश्व तक होता है. यानी आप एक समय विशेष में होते तो एक ही स्थान पर हैं, लेकिन शायद ही कोई ऐसा स्थान होता है, जहां आप नहीं होते. यह बिजली के ग्रिड से भी अधिक सघन होता है. इस बात का एहसास-मात्र आपको एक अद्भुत आत्मविश्वास एवं निश्चिंतता से भर देता है.

यह गुलाब की पंखुड़ियों की सेज नहीं
इसमें भी कोई दो मत नहीं कि यह कोई गुलाब की पंखुड़ियों की सेज नहीं है. समाज के प्रति दायित्वों से भरे होने के कारण आपको उससे जुड़ी अनेक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है. लेकिन जैसा कि शायर अहमद सुरूर ने फरमाया है-

साहिल के सुकूं से किसे इनकार है लेकिन,
तूफान से लड़ने का मज़ा और ही कुछ है.

तो दोस्तो, यह है सिविल सर्विस में ऊर्जा का छुपा हुआ वह संचित कोष, जिससे अपने तार जोड़कर आप निरंतर भावनात्मक ऊर्जा पाते रह सकते हैं.

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Tags: IAS exam, UPSC, UPSC Exams

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