IAS Preparation Tips: सिर्फ ग्रेजुएट होना काफी नहीं, आईएएस बनने के लिए विषय की जानकारी होना है बेहद ज़रूरी

IAS Preparation Tips: सिर्फ ग्रेजुएट होना काफी नहीं, आईएएस बनने के लिए विषय की जानकारी होना है बेहद ज़रूरी
आईएएस की परीक्षा देने की न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन है लेकिन विषय का ज्ञान होना आवश्यक है.

IAS Success Planner: दुर्भाग्य से कई छात्रों को ग्रेजुएशन करने के बाद भी न तो विषयों का ज्ञान होता है और न ही विषयों की समझ. उन विषयों के व्यावहारिक पक्ष से हम आजीवन अनजान ही बने रहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 30, 2020, 11:52 AM IST
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IAS Preparation Tips: आई.ए.एस. बनने के लिए स्नातक नाम की न्यूनतम डिग्री का होना; वह भी बिना किसी भी न्यूनतम अंक की शर्त के, इसकी योग्यता का एक पहलू है जिसकी चर्चा मैंने अपने पिछले लेख में की थी. यह योग्यता का सतही एवं शाब्दिक अर्थ वाला पहलू है. मैं यहां इसके दूसरे उस गहरे एवं भावार्थ पहलू के बारे में चर्चा करने जा रहा हूं, जिसे समझना आपके लिए बहुत ही जरूरी है.

कुछ अपवादों को छोड़कर हम अधिकांश लोगों के लिए ग्रेज्यूएशन कागज के एक लिखित प्रमाण पत्र से अधिक कुछ भी नही होता. एक निर्धारित पाठ्यक्रम था. उसके लिए कुछ किताबें थीं. प्रश्न पूछने का एक ऐसा परम्परागत तरीका था कि वे ही प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछे जाते थे. उनके बने बनाये उत्तर थे. हमने उन्हें रट लिया. और फिर पास ही नहीं हो गये, बल्कि नम्बर भी ठीक-ठाक आ गये.

लेकिन दुर्भाग्य से न तो विषयों का ज्ञान हुआ और न ही विषयों की समझ आई. उन विषयों के व्यावहारिक पक्ष से हम आजीवन अनजान ही बने रहते हैं. वे सूचनायें, जिन्हें रट रटकर हम स्नातक बन गये हैं, हमारी चेतना के हिस्से न बनकर केवल स्मृति तक सीमित रह गये है.



यूपीएससी की दृष्टि में ऐसा विद्यार्थी वैधानिक रूप से तो स्नातक है, लेकिन व्यावहारिक रूप में नहीं. यहां मैं आपके सामने यूपीएससी के वे शब्द ज्यों के त्यों रख रहा हूं, जिसकी वह आपसे अपेक्षा करता है. और मैं इसे ही उसके द्वारा स्नातक की नई परिभाषा मानता हूं. उसके शब्द हैं - “प्रधान परीक्षा का उद्देश्य उम्मीद्वारों के समग्र बौद्धिक गुणों तथा उनके गहन ज्ञान का आकलन करना है, मात्र उनकी सूचना के भंडार तथा स्मरण शक्ति का आकलन करना नहीं. प्रश्नों का स्वरूप तथा इनका स्तर ऐसा होगा कि कोई भी सुशिक्षित व्यक्ति बिना किसी विशेष अध्ययन के इनका उत्तर दे सके. प्रश्न ऐसे होंगे, जिनसे विविध विषयों पर उम्मीदवारों की सामान्य जानकारी का परीक्षण किया जा सके और जो सिविल सेवा के कैरियर से संबंधित होंगे. प्रश्न इस प्रकार के होंगे; जो सभी प्रासंगिक विषयों के बारे में उम्मीदवार की आधारभूत समझ तथा परस्पर-विरोधी सामाजिक आर्थिक लक्ष्यों, उद्देश्यों एवं मांगों का विश्लेषण तथा उन पर दृष्टिकोण अपनाने की क्षमता का परीक्षण करें.”



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यह सिविल सेवा परीक्षा का सर्वोत्तम एवं सर्वोच्च आदर्श वाक्य है. यह एक ऐसा लाइट हाउस है, जो इसकी तैयारी में निरंतर आपका मार्गदर्शन करेगा.
लेकिन यहां मेरे आपसे कुछ प्रश्न हैं ?
- क्या आपने इसी पैटर्न पर स्नातक किया है ?
- क्या आपके पास विषय की आधारभूत समझ (सूचनाऐं नहीं) है ?
- क्या आपमें विषयों को वर्तमान के संदर्भ में लागू कर पाने की दृष्टि है ?
- क्या आप वर्तमान स्थितियों का तर्कपूर्ण ढंग से विश्लेषण कर सकते हैं ? तथा
- क्या आपके पास अपने विचारों की पूंजी है ?
यह सिविल सेवा परीक्षा की योग्यता का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है.
(लेखक पूर्व सिविल सर्वेन्ट एवं afeias के संस्थापक हैं.)
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