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IAS success story: एक नर्स ने बिना कोचिंग के ऐसे पास की UPSC की परीक्षा, आज है IAS

एनीस UPSC सिविल सेवा 2011 की परीक्षा में 65वी रैंक हासिल कर वह IAS बनीं.

एनीस UPSC सिविल सेवा 2011 की परीक्षा में 65वी रैंक हासिल कर वह IAS बनीं.

IAS Success Story:एनीस बचपन से ही एक डॉक्टर बनना चाहती थीं और इसी के लिए उन्होंने 12वी में खूब मेहनत की.UPSC सिविल सेवा 2011 की परीक्षा में 65वी रैंक हासिल कर वह IAS बनीं.

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    नई दिल्ली. मुश्किल हालातों में भी यदि सही मार्गदर्शन मिले तो व्यक्ति सफलता अवश्य ही प्राप्त कर सकता है. ऐसा ही कुछ हुआ केरल की रहने वाली एनीस कनमनी जॉय के साथ. दो विभिन्न रेल यात्राओं में मिले दो अलग-अलग व्यक्तियों ने उन्हें एक ही सलाह दी कि वह UPSC (IAS) एग्जाम की तैयारी करें.

    केरल के एक किसान परिवार से हैं एनीस
    एनीस का जन्म केरल के पिरवोम जिले के एक छोटे से गांव पंपाकुड़ा में हुआ. उनके पिता पंपाकुड़ा गांव में ही धान की खेती करते हैं. श्रमिकों की कमी होने के कारण उनकी मां भी उनके पिता के साथ खेती में हाथ बटाती हैं. एनीस ने 10वीं की पढ़ाई पिरवोम जिले के एक स्कूल से पूरी की और हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए वे एर्नाकुलम गईं.

    एनीस बचपन से ही एक डॉक्टर बनना चाहती थीं और इसी के लिए उन्होंने 12वी में खूब मेहनत की. परन्तु मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट में ख़राब रैंक आने के कारण उन्हें MBBS में दाखिला नहीं मिला. इसीलिए उन्होंने त्रिवेंद्रम गवरमेंट मेडिकल कॉलेज से नर्सिंग में BSc की पढ़ाई पूरी की. एनीस बताती हैं की डॉक्टर ना बन पाने के कारण वह काफी निराश थी लेकिन उन्होंने वास्तविकता को स्वीकारा और मन लगाकर नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की.

    दो ट्रेन यात्राओं ने बदल दिया जीवन
    नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद एनीस ने भविष्य को लेकर रणनीति बनाने के लिए एक महीने का समय लिया. वह बताती हैं कि नर्सिंग को ले कर वह आगे बढ़ने के बारे में कोई निश्चित फैसला नहीं ले पा रही थी. वह जीवन में कुछ बड़ा करना चाहती थी और इसी का ज़िक्र उन्होंने एक रेल यात्रा में अपने कज़न से किया. उस समय उनके कज़न IAS की परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे थे. उन्होंने एनीस को IAS के बारे में बताया और UPSC सिविल सेवा की तैयारी करने की सलाह दी. हालांकि एनीस कहती हैं की उस समय तक उन्हें यह भी नहीं पता था की नर्सिंग की डिग्री के साथ IAS एग्जाम दिया जा सकता है या नहीं?

    इसी तरह एक अन्य ट्रेन यात्रा में जब एनीस मैंगलोर से त्रिवेंद्रम लौट रहीं थीं तो एक साथ बैठी महिला ने बातचीत में बताया की उनकी बेटी दिल्ली से UPSC एग्जाम की कोचिंग ले रही है. उन्हीं महिला ने परीक्षा को लेकर एनीस की सारी दुविधा दूर की और यह भी बताया की UPSC की परीक्षा किसी भी ग्रेजुएशन डिग्री के साथ दी जा सकती है. इन दो रेल यात्राओं में मिली जानकारी से प्रभावित हो कर एनीस ने UPSC सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला लिया.

    बिना कोचिंग के दूसरे एटेम्पट में बनी IAS अफसर
    एनीस के परिवार के आर्थिक हालात इतने अच्छे नहीं थे की वह IAS की कोचिंग के लिए लाखों रुपये खर्च कर सके. इसीलिए उन्होंने खुद से ही पढ़ने का निर्णय लिया. एनीस बताती हैं की वह अखबार पढ़ना कभी नहीं भूलती थी और इसीलिए उनके करंट अफेयर्स हमेशा ही अपडेट रहते थे. 2010 में दिए UPSC सिविल सेवा के अपने पहले एटेम्पट में एनीस ने 580वी रैंक हासिल की. हालंकि उनका IAS बनने का लक्ष्य अधूरा रहा. अपने लक्ष्य को पाने के लिए एनीस ने अगले वर्ष फिर मेहनत की और UPSC सिविल सेवा 2011 की परीक्षा में 65वी रैंक हासिल कर वह IAS बन गई.

    एनीस कनमनी जॉय इस बात का सबूत हैं कि अगर सही मार्गदर्शन मिले और सच्ची लगन के साथ अपने लक्ष्य की और कदम बढ़ाया जाए तो सफलता पाना आसान हो जाता है. एनीस ने नर्स बनने के बावजूद जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा को जगाये रखा और लक्ष्य निर्धारित कर पूरी मेहनत से उसे पाने का प्रयास किया. यह उनकी लगन और आत्मनिर्भरता का ही नतीजा है की वह अब एक IAS अफसर बन गई हैं.



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