भाई के सपने को पूरा करने के ल‍िये बना IAS, इन चुनौतियों का करना पड़ा सामना

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Updated: September 12, 2019, 8:36 AM IST
भाई के सपने को पूरा करने के ल‍िये बना IAS, इन चुनौतियों का करना पड़ा सामना
IAS Success Story: IAS Success Story: बुर्जुग महिला की इस बात से मिली IAS बनने की प्रेरणा, पाई 70वीं रैंक

IAS Success Story: आशुतोष जब महज 8वीं क्लास में पढ़ते थे तब उनके भाई ने सिविल सर्विस परीक्षा दी थी लेकिन वे इस परीक्षा को क्रैक नहीं कर पाए थे, तब आशुतोष ने भाई के सपने को पूरा करने की ठानी.

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IAS Success Story: कभी-कभी किसी की जिंदगी में ऐसा पड़ाव आता है कि किसी भी शख्‍‍‍स की दिशा और दशा दोनों को बदल देता है. ऐसा ही कुछ हुआ रायबरेली से ताल्‍लुक रखने वाले आशुतोष द्विवेदी के साथ. आशुतोष जब गेल (GAIL) कंपनी में जॉब करते थे, उस वक्‍त एक बुजुर्ग महिला से मुलाकात हुई. इस मुलाकात ने आशीष को UPSC की परीक्षा के लिए प्रेरित कर दिया.इस प्रेरणा का नतीजा ये हुआ कि आशुतोष ने साल 2017 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 70वीं रैंक हासिल की. आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्‍या था इस मुलाकात में. कैसे मिलीं उन्‍हें इस परीक्षा की प्रेरणा.

आशुतोष ने IAS बनने का ख्‍वाब तो बचपन से ही देखा था. दरअसल जब वे महज 8वीं क्लास में पढ़ते थे तो उनके भाई ने सिविल सर्विस परीक्षा दी थी.वह वेटिनरी ऑफिसर हो चुके थे. उनका वह पहला और आखिरी अटेंप्ट था. उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स क्वालिफाई कर लिया, लेकिन फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं था. वे IAS नहीं बन सके थे. आशुतोष के भीतर अपने भाई के इसी सपने को पूरा करने की कसक रह गई. यहीं से उन्‍होंने ठाना कि अब वे भाई के सपने को पूरा करेंगे. इसी उद्देश्‍य के साथ वे आगे की पढ़ाई में जुट गए.

HBTI में सेलेक्‍शन
आशुतोष बताते हैं, मैंने प्रतापगढ़ के लालगंज अघारा में शीतलामऊ मांटेसरी स्कूल से हाईस्कूल पास करने के बाद कानपुर के दीन दयाल उपाध्याय इंटर कालेज से इंटर पास किया. ग्रेजुएशन के दौरान ही कानपुर HBTI में सेलेक्‍शन हो गया.

छोड़ीं कई नौकरियां
आशुतोष ने बताया कि HBTI में कैंपस सेलेक्शन के दौरान मारुति उद्योग में नौकरी की. इसके बाद वे इसरो में वैज्ञानिक हो गए लेकिन वह मात्र 15 दिन ही नौकरी की. इसके बाद गेल में नौकरी की. यहां पर चार साल बिताए. उनकी आगरा व बरेली में तैनाती हुई.

बुजुर्ग महिला से ऐसे मिली प्रेरणा
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आशुतोष कहते हैं, एक दिन मैं आगरा के एक गांव में जनसुनाई की बैठक ले रहा था. बैठक खत्म होने के बाद एक बूढ़ी महिला ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें छाछ पिलाती हूं. मैं जब उन महिला के घर गया तो उन्होंने मुझे बताया कि उनकी जमीन से गेल की पाइपलाइन गुजरती है. उन्हें वह जमीन बेचकर अपनी बेटियों की शादी करनी है. ऐसे में वह ज्यादा मुआवजे की मांग कर रही थी. मैंने जब कहा कि मैं ये करने में असमर्थ हूं तो उन्होंने कहा कि कलेक्टर से बात करें. इसी घटना ने मुझे यूपीएससी की प्रेरणा दी.

चार बार में पास की परीक्षा
इस घटना के बाद से मैंने इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया. मैं पढ़ने लगा. आखिरकार इसका नतीजा ये निकला साल 2017 में UPSC की परीक्षा में मैंने 70वीं रैंक हासिल की.

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First published: September 12, 2019, 6:11 AM IST
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