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IAS Success Story: कभी बेचे पिक्‍चर के टिकट तो कभी होटल में वेटर का किया काम, आज हैं IAS

News18Hindi
Updated: October 21, 2019, 6:10 PM IST
IAS Success Story: कभी बेचे पिक्‍चर के टिकट तो कभी होटल में वेटर का किया काम, आज हैं IAS
IAS Success Story: छठी बार असफल होने के बाद भी गणेश ने हार नहीं मानी. वो डटे रहेंं और आखिकार 7वें प्रयास में उन्‍होंने सफलता हासिल की.

IAS Success Story: छठी बार असफल होने के बाद भी गणेश ने हार नहीं मानी. वो डटे रहेंं और आखिकार 7वें प्रयास में उन्‍होंने सफलता हासिल की.

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  • Last Updated: October 21, 2019, 6:10 PM IST
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IAS Success Story : न्‍यूज 18 हिंदी पर आप हर दिन युवा IAS के संघर्ष से सफलता तक की कहानियों से रूबरू होते हैं. हर कहानी कुछ न कुछ प्रेरणा देकर जाती है. इसी कड़ी में आज कहानी एक ऐसे शख्‍स की, जो UPSC की परीक्षा में 1, 2 नहीं बल्‍कि 6 बार फेल हुए लेकिन फिर भी उन्‍होंने अपना धैर्य नहीं खोया. वो डटे रहे. इसका नतीजा ये हुआ कि आखिरकार सातवीं बार में  सफलता पाई. इस शख्‍स का नाम है जयागणेश. आखिर कैसे पाया उन्‍होंंने ये मुकाम आइए जानते हैं.

दरअसल जयागणेश एक गरीब परिवार से ताल्‍लुक रखते हैं. उनके पिता लेदर फैक्‍ट्री में सुपरवाइजर का काम कर महीने में सिर्फ 4500 रुपये कमाते थे. इतने पैसे में घर का खर्चा चलना बेहद मुश्‍किल था. पूरे परिवार का भरण-पोषण और पढ़ाई कर पाना असंभव था. परिवार में सबसे बड़े होने के नाते भी खर्चा उठाने की जिम्‍मेदारी भी उन पर आ चुकी थी. इसलिए वो चाहते थे कि पिता की मदद कर सकें. हालांकि उस वक्‍त तो कुछ नहीं कर सकते थे लेकिन उन्‍होंने ठान लिया था कि वो कभी न कभी तो अपने परिवार को इन परिस्‍थितियों से बाहर निकालेंगे.

12वीं में 91 प्रतिशत अंक
जयागणेश पढ़ाई में बेहद अच्‍छे थे. 12वीं में उन्‍होंने 92 फीसदी अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्‍होंने स्‍कॉलरशिप की मदद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. उन्‍होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया.

इसलिए छोड़ दी जॉब
जय को इंजीनियरिंग खत्‍म करने के बाद जॉब मिल भी गई लेकिन कुछ वक्‍त ही उन्‍हें ये अहसास हुआ कि शायद वो कुछ और करना चाहते हैं. दरअसल वो महसूस करते हैं कि गांव में बेहद गरीबी है, उनके जैसे तमाम और परिवार हैं, जो ऐसी परिस्‍थति में जी रहे हैं. परिस्‍थतियों को बदलने के लिए उन्‍होंने इंजीनियरिंग की जॉब छोड़ दी. इसी दौरान उन्हें पता चला कि वह बदलाव ला सकते हैं अगर वो कलेक्टर बन जाएं. बस इसलिए उन्‍होंने इंजीनियरिंग की जॉब छोड़ दी.

सिनेमा हॉल में बेचे टिकट
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जयागणेश ने मैकेनिकल इंजीनियर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और आईएएस की तैयारी के लिए जयागणेश चेन्नई चले गए. जयागणेश को एक सरकारी कोचिंग सेंटर के बारे में पता चला. इस कोचिंग सेंटर में आईएएस की तैयारी कराई जाती थी.

वेटर की नौकरी
गणेश ने अपना खर्चा चलाने के लिए सत्यम सिनेमा हॉल में बतौर बिलिंग ऑपरेटर काम किया. यहां उन्हें तीन हजार रुपये सैलेरी मिलती थी. साल 2004 में वह आईएएस मेन्स परीक्षा में फेल हो गए. उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और वेटर की नौकरी करने लगे. इस नौकरी में उन्हें पढ़ने का टाइम मिला.

कोचिंग सेंटर में भी पढ़ाया
जयागणेश अपने पहले दो प्रयास में प्री एग्जाम भी नहीं पास कर पाए. इस दौरान उन्होंने एक कोचिंग में सोशियोलॉजी पढ़ाना शुरू किया. छठी बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. इसके बाद उन्होंने 7वीं बार यूपीएससी की परीक्षा दी,जब वो 7वीं बार परीक्षा में बैठे तो प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू भी पास कर गए. उन्हें 7वीं बार में 156वां रैंक मिल गई.

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First published: October 21, 2019, 5:22 PM IST
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