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ग्रेजुएशन में सेकेंड आए और अंग्रेजी से डरते थे फिर इस तरह से UPSC की परीक्षा पास की

आज हम IAS सक्सेज स्टोरी में लखन सिंह यादव के संघर्ष की कहानी सुना रहे हैं.

आज हम IAS सक्सेज स्टोरी में लखन सिंह यादव के संघर्ष की कहानी सुना रहे हैं.

अलवर, राजस्थान के लखन सिंह यादव ने परीश्रम, लगन और धैर्य की एक उत्कृष्ट मिसाल कायम की है. सिविल सेवा परीक्षा 2017 में एक बड़ी सफलता के साथ सामान्य पृष्ठभूमि और हालातों से जुझते आज के युवाओं के लिए आशा की किरण बन कर उभरे हैं.

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    नई दिल्ली. यूपीएससी परीक्षा से बहुत से बच्चे ये बात से डर जाते हैं कि आगे बहुत पढ़ना पड़ेगा. पास न हो पाए तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी. ऐसे सवाल मन में उठते हैं, लेकिन बहुत से बच्चे इस परीक्षा की तैयारी करते हैं. फेल होते हैं फिर भी कोशिश करना नहीं छोड़ते हैं. ऐसे ही हम आपको यूपीएससी परीक्षा से डरने वाले एक लड़के की कहानी सुनाने जा रहे हैं. वो आज इंडियन पुलिस सर्विस में अफसर जरूर है लेकिन इस समय में वो सिविल सर्विस परीक्षा से बहुत डरता था. उसने कभी नहीं सोचा था कि वो अफसर बनेगा.IAS सक्सेज स्टोरी (IPS Success Story) में लखन सिंह यादव के संघर्ष की कहानी आज हम सुना रहे हैं.

    अलवर, राजस्थान के लखन सिंह यादव ने परीश्रम, लगन और धैर्य की एक उत्कृष्ट मिसाल कायम की है. सिविल सेवा परीक्षा 2017 में एक बड़ी सफलता के साथ सामान्य पृष्ठभूमि और हालातों से जुझते आज के युवाओं के लिए आशा की किरण बन कर उभरे हैं. कॉलेज आफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलोजी, बीकानेर से सिविल इंजीनियरिंग कर लखन ने जब अपने करियर के बारे में मन बनाना शुरू किया तो सिविल सेवाओं के बारे में सोचा ज़रूर, पर अपनी औसत अकादमिक पृष्ठभूमि के कारण थोड़ा संशय भी रहा.

    लखन बताते हैं कि यदि मैं पीछे मुड़ कर देखूं तो ग्रेजुएशन में मेरा प्रदर्शन औसत, नहीं सही कहूं, तो बहुत खराब था. केवल 59 प्रतिशत से इंजीनियरिंग की और वह भी 4 वर्ष का कोर्स 6 वर्ष में पूरा कर पाया.ऐसे में मैने कभी IAS बनने के बारे में सोचा तक नहीं था. इतनी बड़ी परीक्षा को पास करने का सोचना तो दूर इसमें शामिल होने का निर्णय मेरे लिये बहुत हिम्मत का काम रहा. मेरा लक्ष्य तो बस RPSC परीक्षा पास करके RAS/RPS बनने का था. अब इसे सौभाग्य ही कहूंगा कि RPSC की लेट-लतीफी से तंग आकर मैंने UPSC की तैयारी करने का निर्णय लिया.

    इस तथ्य को समझते हुए लखन ने अपने लिये करियर विकल्प हेतु सिविल सेवा परीक्षा के साथ-साथ विभिन्न स्तर पर कई परीक्षाओं में भाग लिया और एक के बाद एक कदम बढ़ाते हुए कई परीक्षाओं में सफलता भी प्राप्त करते गए और अंततः एक ऐसी सफलता प्राप्त की जिसके बारे में पहले वह सोचने से भी डरते थे.

    शुरूआत में तो मैं किसी को बता भी नही सकता था कि मैं IAS बनना चाहता हूं और सिविल सेवा परीक्षा का फॉर्म भी भर रहा हूं. परन्तु, हार ना मानने की जिद और कुछ अच्छा और बड़ा करने के हौसले ने लखन को सिविल सेवा परीक्षा 2017 की सफलता प्राप्त करने में में महत्वपूर्ण योगदान दिया. जैसे-जैसे आगे बढ़ा, बाद में सभी चीज़ें बदल गयी और थोड़ा समय ज़रूर लगा पर मैं अंततः आखिरी लिस्ट में आ पाया. लखन सिंह यादव ने 2017 में 565 रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा अपने चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की.

    उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में राजनीतिक विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय का चयन किया. सिविल सेवा में ही कैरियर, क्यों ? इस बारे में लखन ने कहा, 'ये ऐसी सेवाएं हैं जो व्यक्ति के जीवन से जुड़े हर क्षेत्र को छूती हैं. जहां प्रत्यक्ष रूप से किसी की मदद की जा सकती है. मैं मानता हूँ कि इन सेवाओं में करने को इतना सब है कि 34-35 वर्ष की सेवा में शायद व्यक्ति हर बार नए नए अनुभव से गुजरता है.

    उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में राजनीतिक विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय का चयन किया. सिविल सेवा में ही कैरियर, क्यों ? इस बारे में लखन ने कहा, 'ये ऐसी सेवाएं हैं जो व्यक्ति के जीवन से जुड़े हर क्षेत्र को छूती हैं. जहां प्रत्यक्ष रूप से किसी की मदद की जा सकती है. मैं मानता हूं कि इन सेवाओं में करने को इतना सब है कि 34-35 वर्ष की सेवा में शायद व्यक्ति हर बार नए नए अनुभव से गुजरता है.

    जब भी मैं क्या, किसी भी युवा का सरकारी सेवा में जाने का विचार मन में आता है तो सबसे पहले यही आता है कि IAS/IPS से बेहतर क्या हो सकता है' परिवार का परिचय देते हुए उनके योगदान के बारे में बताते हुए लखन ने कहा, 'मेरे पिताजी श्री मानसिंह यादव (Assistant Block Elementary Education Officer) और मां श्रीमती दुलारी देवी ग्रहणी हैं, दो बहने हैं सुमन यादव, एकता यादव और भाई प्रधुम्न सिंह यादव (IIT KANPUR) में हैं.

    मेरी सफलता में मेरे परिवार का बहुत बड़ा योगदान है. मुझे लंबे समय के संधर्ष के बाद सिविल सेवा परीक्षा में आशातीत सफलता मिली, तब तक परिवार का सदैव मुझ पर भरोसा और हर विफलता पर मिला उनका पूर्ण समर्थन. सभी के प्यार के कारण ही मैं ये कर पाया अन्यथा संभव नही था.

    ये भी पढ़ें- चार बार UPSC में हुए फेल, 5वीं बार मां ने कहा एक कोशिश और कर तब बने IPS

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