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IAS Success Story: परिवार का पेट पालने के लिए अखबार बेचता था ये शख्‍स, आज है आईएएस अफसर

IAS Success Story: जानिए उस शख्स की कहानी, जिसने फीस भरने के लिए बेचा अखबार, आज यूपीएससी एग्‍जाम क्रैक करके कायम की मिसाल

IAS Success Story: जानिए उस शख्स की कहानी, जिसने फीस भरने के लिए बेचा अखबार, आज यूपीएससी एग्‍जाम क्रैक करके कायम की मिसाल

IAS Success Story: जानिए उस शख्स की कहानी, जिसने फीस भरने के लिए बेचा अखबार, आज यूपीएससी एग्‍जाम क्रैक करके कायम की मिसाल

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    IAS Success Story: न्‍यूज 18 हिंदी पर आप हर दिन आईएएस अधिकारियों के संघर्ष से सफलता तक के सफर से रूबरू होते हैं. मुश्‍किल हालातों में भी इन युवाओं ने कैसे देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई. इसी कड़ी में आज कहानी मध्‍य प्रदेश के भिंड जिले से ताल्‍लुक रखने वाले नीरीश राजपूत की. नीरीश के घर की आर्थिक स्‍थिति ठीक नहीं होने की वजह से वो पिता के काम में उनका साथ दिया करते थे. नीरीश उनके साथ सिलाई के काम में हाथ बंटाते थे. जैसे-तैसे गुजर-बसर करने वाले इन हालातों में नीरीश ने यूपीएससी परीक्षा में 370वीं  रैंक पाई. कैसे पाया उन्‍होंने ये मुकाम आइए जानते हैं.

    दरअसल नीरीश के पिता कपड़ों की सिलाई का काम करते थे. महज 15 बाई 40 फीट के छोटे से मकान में नीरीश अपने 3 भाई-बहनों और माता-पिता के साथ रहते थे. नीरीश की पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई थी. नीरीश पढ़ाई में अच्‍छे थे लेकिन घर की आर्थिक स्‍थिति ठीक नहीं होने की वजह से उनके सामने फीस भरने का संकट था. इसलिए पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए नीरीश ने अखबार बांटने का काम किया. वो पिता के साथ सिलाई के काम में भी हाथ बंटाते थे.

    पढ़ाई और पार्ट टाइम जॉब
    नीरीश स्‍कूल की पढ़ाई खत्‍म करने के बाद ग्‍वालियर आ गए. यहां के सरकारी कॉलेज से B.Sc और M.Sc किया. ग्रेजुएशन और पोस्‍टग्रेजुएशन दोनों में ही टॉप किया था. यहां वो पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करते थे.

    UPSC तैयारी में दोस्‍त ने दिया धोखा
    नीरीश ने पार्ट टाइम जॉब के साथ यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. दरअसल नीरीश के एक दोस्त ने उत्तराखंड में नया कोचिंग इंस्टीट्यूट खोला और नीरीश को यहां पढ़ाने का ऑफर इस वादे के साथ किया कि इंस्टीट्यूट की अच्छी शुरुआत हो जाने पर वह नीरीश को सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए स्टडी मैटीरियल उपलब्ध करा देगा.

    छूट गई नौकरी
    2 सालों तक नीरीश की कड़ी मेहनत के चलते जब उस इंस्टीट्यूट का नाम हो गया और काफी इनकम होने लगी तो उस दोस्त ने नीरीश को नौकरी से निकाल दिया. इसके बाद नीरीश बुरी तरह परेशान हो गए थे.

    दिल्‍ली में नई शुरुआत
    इस घटना के बाद नीरीश दिल्ली चले आए. यहां उनका एक दोस्‍त बना जो खुद भी आईएएस की तैयारी कर रहा था. नीरीश उसके साथ रहकर पढ़ाई करने लगे. वो दिनभर में लगभग 18 घंटे पढ़ाई करते थे. जॉब छूटने के बाद उनके पास पैसे नहीं थे इसलिए वो दोस्‍त से नोट्स उधार मांग कर पढ़ाई करते थे.

    बिना कोचिंग मिली सफलता
    पैसे नहीं होने की वजह से नीरीश पढ़ाई के लिए कोचिंग नहीं कर पाए. उन्‍होंने बिना किसी कोचिंग के दोस्त के नोट्स और किताबों से तैयारी जारी रखी और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई. बिना कोचिंंग के 370वीं रैंक हासिल की.

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