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IAS Success Story: भरपेट खाना नहीं मिलने पर बिस्‍किट खाकर करते थे गुजारा, आज हैं IAS अफसर

News18Hindi
Updated: September 18, 2019, 6:01 AM IST
IAS Success Story: भरपेट खाना नहीं मिलने पर बिस्‍किट खाकर करते थे गुजारा, आज हैं IAS अफसर
IAS Success Story: भरपेट खाना नहीं मिलने पर बिस्‍किट खाकर करते थे गुजारा, आज हैं IAS अफसर

IAS Success Story: UPSC की परीक्षा पास करने के लिए शशांक ने यूएस कंपनी की नौकरी छोड़ दी. जॉब छोड़ने के बाद एक बार फिर उनके सामने आर्थिक संकट सामने खड़ा हो गया था.

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  • Last Updated: September 18, 2019, 6:01 AM IST
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IAS Success Story: विपरीत हालातों में लोग लोग टूट जाते हैं. सपने दम तोड़ देते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो इन परिस्‍थतियों में भी खुद को मजबूती से बनाए रखते हैं और सफलता की नई इबारत लिख देते हैं. ऐसे ही एक शख्‍स हैं यूपी के मेरठ से ताल्‍लुक रखने वाले शशांक मिश्रा. शंशाक ने साल 2007 में UPSC परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल की है. ये कामयाबी उन्‍हें तब मिली, जब पिता की मौत के बाद उन पर घर की पूरी जिम्‍मेदारी आ गई थी. इसके बावजूद उन्‍होंने सिविल सेवा परीक्षा क्रैक कर ली.

दरअसल शशांक जब 12वीं की पढ़ाई कर रहे थे उस वक्‍त उनके पिता का निधन हो गया था. उसके बाद घर के हालात बिगड़ते चले गए. आर्थिक तंगी इतनी थी कि फीस भरना मुश्‍किल हो गया था. तीनों भाई-बहन की पूरी जिम्‍मेदारी उनके कंधों पर ही आ गई थी. इसके बावजूद वे निरंतर आगे बढ़ते रहे.

फीस हुई माफ
शशांक जब 12वीं में थे उनके मार्क्‍स के कारण उनकी कोचिंग की फीस कम कर दी गई थी. इसके बाद IIT की प्रवेश परीक्षा में  137वीं रैंक हासिल की थी. इसके बाद उन्‍होंने इलेक्‍ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक कर लिया. इसके बाद उनकी अमेरिका की मल्‍टीनेशनल कंपनी में जॉब भी लग गई थी.

एमएनएसी कंपनी की जॉब छोड़ी
UPSC की परीक्षा पास करने के लिए शशांक ने यूएस कंपनी की नौकरी छोड़ दी. जॉब छोड़ने के बाद एक बार फिर उनके सामने आर्थिक संकट सामने खड़ा हो गया था. ऐसे में उन्‍होंने घर की स्‍थिति संभालने के लिए कोचिंग पढ़ाने का फैसला किया. वे दिल्‍ली में कोचिंग पढ़ाने लगे थे.

कोचिंग सेंटर में  शुरू किया पढ़ाना  
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कोचिंग सेंटर में पढ़ाने के बावजूद भी उनकी आमदनी इतनी नहीं थी कि वे दिल्‍ली में घर लेकर रह सके इसलिए वे मेरठ से डेली अपडाउन करते थे. इसके लिए 2 घंटे ट्रैवल में गुजर जाते थे.

ट्रेन में पढ़कर की UPSC की तैयारी

ट्रैवल में ज्‍यादा वक्‍त गुजरने की वजह से वे ट्रेन में बैठकर ही UPSC की तैयारी करते थे. वे डेली दिल्‍ली से मेरठ के अपडाउन अपने नोट्स बनाते थे. पढ़ते रहते थे. साल 2004 से उन्‍होंने तैयारी शुरू कर दी थी.

नहीं मिलता था भरपेट खाना
दो साल तक तैयारी के दौरान शंशाक को भरपेट खाना नहीं मिलता था. इसकी वजह से कई बार उन्हें बिस्‍किट खाकर करना गुजारा करना पड़ता था. शंशाक की मेहनत रंग लाई और उन्‍होंने दूसरे प्रयास में सिविल सर्विस परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल कर सफलता हासिल की.

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First published: September 18, 2019, 6:01 AM IST
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