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IAS Success Story: विकलांगता भी रोक न सकी, सौम्या ने पहली बार में हासिल की 9वीं रैंक

सुनने की क्षमता खोने के बावजूद पहले अटेंप्ट में पास किया ias एग्जाम.

सुनने की क्षमता खोने के बावजूद पहले अटेंप्ट में पास किया ias एग्जाम.

यूपीएससी एग्जाम देने वाले कैंडीडेट्स को सौम्या की सलाह है कि हर दिन अखबार पढ़ें, मॉडल प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें.

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    IAS Success Story: बेशक UPSC Civil Services Exam पास करना कोई खेल नहीं. इसे पहली दफा में पास करना बेहद, बेहद मुश्किल टास्क है. विकलांग कैंडीडेट के लिए इसे पास करना और भी ज़्यादा मुश्किल होगा. लेकिन ये कहानी ऐसी ही लड़की की है जिसने अपनी सुनने की क्षमता खोने के बावजूद 2017 में पहले अटेंप्ट में यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम क्लियर किया. पढ़ें सौम्या शर्मा की पूरी कहानी.

    दिल्ली की सौम्या शर्मा ने 16 साल की उम्र में सुनने की क्षमता खो दी थी. वे सुनने के लिए aid machine पर निर्भर हैं. इसके बावजूद, यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जान क्रैक करने के लिए उनका दृढ़ संकल्प कभी कम नहीं हुआ. अपनी सभी कमियों को पार करते हुए, सौम्या ने 23 साल की छोटी उम्र में बिना किसी कोचिंग के सिविल सेवा परीक्षा दी.



     




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    सौम्या के अनुसार, UPSC परीक्षा क्रैक करना किसी भी अन्य परीक्षा को क्रैक करने जैसा ही था. हर एग्जाम की तरह यहां भी आपको योजना और अच्छी रणनीति की आवश्यकता होती है.

    सौम्या ने 2017 में दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से एलएलबी पूरी की. 2017 में ही उन्होंने UPSC सिविल सेवा की तैयारी शुरू की. उसी साल उन्होंने UPSC प्रीलिम्स और UPSC मेन्स परीक्षा दी. सुन्ने की शक्ति में कमी के कारण सौम्या को विकलांग श्रेणी में शामिल किया गया. लेकिन उन्होंने विकलांग कोटा के तहत यूपीएससी सिविल सेवा फॉर्म भरने से इनकार किया और सामान्य श्रेणी को चुना.



     




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    अपने स्कूलों के दिनों से, सौम्या ब्राइट छात्र थी और यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी करना उसके लिए कठिन नहीं था. उनके अनुसार, परीक्षा देने के लिए कैंडीडेट्स का हर सब्जेक्ट का बेस मजबूत होना आवश्यक है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के दौरान सौम्या 102 वायरल बुखार से पीड़ित थी. एग्जाम सेंटर पर उनके साथ, उनके परेंट्स (दोनों डॉक्टर) थे.

    यूपीएससी एग्जाम देने वाले कैंडीडेट्स को सौम्या की सलाह है कि हर दिन अखबार पढ़ें, मॉडल प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें और अपने वैकल्पिक विषय पर पकड़ बनाएं. यही सफलता की कुंजी है. इसके साथ ही, न केवल प्रीलिम्स बल्कि एक ही समय में main एग्जाम के लिए भी खुद को तैयार करें.

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