• Home
  • »
  • News
  • »
  • career
  • »
  • IAS Success Story: टायर पंक्चर की दुकान चलाकर की पढ़ाई, 32वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने वरुण

IAS Success Story: टायर पंक्चर की दुकान चलाकर की पढ़ाई, 32वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने वरुण

पिता के निधन के बाद वरुण के घर की माली हालत काफी खराब हो गई थी.

पिता के निधन के बाद वरुण के घर की माली हालत काफी खराब हो गई थी.

पिता के निधन के बाद मां ने इनको पढ़ने के लिए कहा लेकिन वरुण पिता के पंक्चर की दुकान को संभालकर घर चलाना चाहते थे. इनके पास फीस के पैसे नहीं होते थे ऐसे में इनके दोस्तों और टीचर्स ने ही फीस भरी.

  • Share this:
    नई दिल्ली. अगर हौसला है तो गरीबा कभी भी राह का रोड़ा नहीं बन सकती. कुछ ऐसी ही कहानी है वरुण कुमार वर्णवाल की. वरुण के पिता की टायर की पंक्चर की दुकान चलाते हैं. इन विषम परिस्थितियों में वरुण ने देश की सबसे कठिन परीक्षा में 32वीं रैंक हासिल की.

    वरुण महाराष्ट्र के पालघर जिले के रहने वाले हैं. वरुण के दो भाई और दो बहनें हैं. इनके पिता की साइकिल पंक्चर की दुकान है. लेकिन इतना ही नहीं था जब वरुण 10वीं में थे तो तब उनके पिता का भी निधन हो गया. इसके बाद घर चलाने की भी सारी जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई. हालांकि, वरुण हमेशा से पढ़ने में ठीक रहे हैं और उन्होंने 10वीं की परीक्षा में टॉप किया.

    इलाज करने वाले डॉक्टर ने की सहायता
    पिता के निधन के बाद मां ने इनको पढ़ने के लिए कहा लेकिन वरुण पिता के पंक्चर की दुकान को संभालकर घर चलाना चाहते थे. फिर आगे की पढ़ाई के लिए इन्हें 10 हज़ार रुपयों की जरूरत थी जो कि इनके पास नहीं थे. लेकिन इसी बीच इनके पिता का इलाज कराने वाले डॉक्टर की नज़र इनके ऊपर पड़ी तो उन्होंने एडमिशन के लिए दस हज़ार रुपये दिए. आगे एडमिशन लेने के बाद वरुण खुद और उनकी बड़ी बहन ट्यूशन पढ़ाकर अपना घर का खर्च चलाते थे.

    दोस्तों और टीचर्स ने दी फीस
    दसवीं की परीक्षा में पूरे जिले में इनका दूसरा स्थान आया. इन्होंने 89 फीसदी अंक प्राप्त किए. 12वीं करने के बाद इन्होंने एमआईटी पुणे में एडमिशन ले लिया. इनके पास फीस के पैसे नहीं होते थे ऐसे में इनके दोस्तों और टीचर्स ने ही फीस भरी. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के वक्त इन्होंने पूरी यूनिवर्सिटी को टॉप किया. इन्हें 86 फीसदी अंक मिले जो कि उस समय का रिकॉर्ड था. चूंकि स्कॉलरशिप आने में भी काफी वक्त लगता था इसलिए इनकी फीस उस वक्त भी टीचर्स और दोस्तों ने ही दी.

    मिली नौकरी करने के बजाय की आईएएस की तैयारी
    बीटेक करने के बाद वरुण का चयन एक मल्टी नेशनल कंपनी में हो गया. लेकिन दोस्तों की सलाह पर इन्होंने आईएएस की तैयारी करने की सोची. हालांकि, इस बात से इनकी मां काफी नाराज़ भी रहीं. उन्हें लगता था कि बेटे के नौकरी करने से घर की माली हालत सुधर जाएगी. लेकिन साल 2013 में राजनीति विज्ञान से इन्होंने परीक्षा दी और पहली ही बार में इन्हें 32वीं प्राप्त हुई.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज