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Opinion: देश के IIIT संस्थान दुनिया भर में स्थापित करेंगे नए कीर्तिमान

News18Hindi
Updated: February 7, 2020, 1:09 PM IST
Opinion: देश के IIIT संस्थान दुनिया भर में स्थापित करेंगे नए कीर्तिमान
उमा सिंह. एसोसिएट प्रोफेसर, डीयू

IIIT संस्थानों को नेशनल इम्पोर्टेंस का दर्जा मिलने के बाद इन संस्थानों को मिलने वाली अनुदान राशि बढ़ जाएगी, इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा, नए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. ये संस्थान अब पीएचडी की डिग्री भी दे सकेंगे.

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  • Last Updated: February 7, 2020, 1:09 PM IST
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भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय सूचना प्रद्योगिकी संस्थान (आई.आई.आई.टी.), अधिनियम संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दी है. इसके तहत देश के पांच आई.आई.आई.टी. संस्थानों को रास्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया जाएगा.

इनमें सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला और रायचूर स्थिति आई.आई.आई.टी. शामिल हैं. सरकार के इस फैसले के कई सकारात्मक परिणाम होंगे. पहला तो यह होगा कि भारतीय युवाओं को अच्छी शिक्षा मिल सकेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा. इसके अलावा इन आई.आई.आई.टी. में इंटरनेशनल टैलेंट तैयार होंगे.


संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा नहीं मिलने के पहले यह संस्थान अब तक कोई बड़े निर्णय नहीं ले सकते थे, लेकिन अब वह किसी बड़े विश्वविद्यालय अथवा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की तरह बी.टेक, एम.टेक, अथवा पीएच.डी. जैसी डिग्री देने में सक्षम होंगे. इससे न सिर्फ उच्च शिक्षा में व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने का छात्रों को अवसर मिलेगा, अपितु इससे इनकी शाख भी दुनियाभर में बढ़ेगी.

यह दर्जा मिलने के बाद ये पांचों आई.आई.आई.टी. अब अपना कोई भी नया कोर्स शुरू कर सकेंगे. इसके लिए इन्हें स्वायतता मिल जायेगी. छात्रों के लिए उच्च शिक्षा में नए और उच्च क्वालिटी के संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिलेगा.

नेशनल इम्पोर्टेंस का दर्जा मिलने के बाद इन संस्थानों को मिलने वाली अनुदान राशि बढ़ जाएगी, इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा, नए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. आमतौर पर राष्ट्रीय महत्व दिए जाने के बाद इन आई.आई.आई.टी. का दर्जा अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों की तुलना में ऊपर हो जाता है. इनको एक अलग स्टेटस मिल जाता है. साथ ही जब किसी भी आई.आई.आई.टी. को रास्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया जाता है तो उनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसर पर रैंकिंग भी सुधर जाती है.

प्रायः ऐसे संस्थानों की ही रैंकिंग टाइम रैंकिंग, क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में होती है. जिन संस्थानों को रास्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया जाता है उनमें उच्च कोटि के अत्याधिक कुशल कर्मियों को विकसित करने में मदद मिलती है. यह प्रौद्योगिकी अधिनियम, 1961 के के तहत संचालित होता है.

- डॉ. उमा एस. सिंह एसोसिएट प्रोफेसर, कामर्स एंड मैनेजमेंट,
दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली

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First published: February 7, 2020, 1:01 PM IST
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