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Inspiring Story: इस शख्स ने समाज के एक तबके का भला करने के लिए छोड़ी इंग्लैंड की नौकरी

News18Hindi
Updated: October 5, 2019, 2:29 PM IST
Inspiring Story: इस शख्स ने समाज के एक तबके का भला करने के लिए छोड़ी इंग्लैंड की नौकरी
अमिताभ सोनी 2003 में इंग्लैंड गए, वहां दस साल तक ब्रिटिश सोशल वेलफेयर बोर्ड लंदन में काम किया.

अमिताभ सोनी ने लंदन में सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में काम करते हए समाज से जुड़े तमाम पहलुओं को बेहतर तरीके से जाना.

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  • Last Updated: October 5, 2019, 2:29 PM IST
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Inspiring Story: भाग दौड़ भरी दुनिया में जहां खुद के लिए समय नहीं है. वहां समाज में ऐसे लोग भी मौजूद हैं, जो देश के उस वर्ग के बारे में भी सोचते हैं जो मुख्य धारा से अलग हैं. मिलए ऐसे ही शख्स, अमिताभ सोनी से. इन्होंने विदेशी की नौकरी को छोड़कर देश के आदिवासियों के लिए काम करना चुना.

मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे अमिताभ सोनी इंदौर और भोपाल में पले बढ़े. इंटरनेशनल बिजनेस में मास्टर डिग्री ली. 2003 में इंग्लैंड गए, वहां दस साल तक (सरकारी नौकरी) ब्रिटिश सरकार के सोशल वेलफेयर बोर्ड लंदन (समाज कल्याण मंत्रालय) में काम किया. लेकिन वे अपने वतन लौटकर देशवासियों के लिए कुछ करना चाहते थे.

2014 में सब कुछ छोड़कर वापस भोपाल आए. अब वे आदिवासियों के शैक्षणिक और सामाजिक विकास कार्यों में लगे हैं. मुख्यधारा समाज से अलग आदिवासियों को मुख्यधारा में वापस लाना और कैसे उनके जीवन स्तर में सुधर लाने पर काम कर रहे हैं. शिक्षित युवाओं को रोजगार मुहैया करवानें में भी सहयोग दे रहे हैं.

लंदन में सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में काम करते हए समाज से जुड़े तमाम पहलुओं को बेहतर तरीके से जाना. कार्य-प्रणाली को भी समझा, लोगों की समस्या को सरकार तक कैसे पहुँचाया जाए इस बारे में भी जाना. लेकिन आर्थिक रूप से भी सुदृढ़ बनना था ताकि वो मदद कर सकें. इसलिए लौटनें में ज्यादा वक़्त लगा.

कैसे करते हैं काम
अमिताभ ने मध्यप्रदेश के आदिवासी गांव भानपुर केकड़िया को ठिकाना बनाया. यहां के आदिवासियों को स्वावलम्बी बनाने से पहल की. सबसे पहले शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया. गांव में आदिवासियों के लिए स्कूल खुलवाया. गांव का युवाओं को पलायन से रोकने के लिए भारत की पहली आईटी कम्पनी 'विलेज क्वेस्ट' खोली. इस कंपनी को आदिवासी युवा संचालित करते हैं. कंपनी के माध्यम से बेसिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र खोला. प्रशिक्षण के साथ डेटा एंट्री का काम दिलाकर रोजगार दिलाया.

आदिवासियों के जीवन स्तर सुधार के लिए अभेद्य संस्था
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अमिताभ ने 'अभेद्य' गैर सरकारी संस्था खोली है. ये संस्था बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रही हैं. स्कूल संचालित किये जा रहे हैं. स्कूल में बच्चों के लिए फर्नीचर, बैग, जूते, स्वेटर, कॉपी- किताबें जैसी सुविधाएं मुहैया करवाई हैं. स्कूलों में बच्चों को बेसिक तकनीकी ज्ञान के लिए कम्प्यूटर लैब भी है.

अमिताभ जल प्रबंधन के कार्यों में लगे हैं. वे गर्मी के दिनों में सिंचाई की समस्या पर काम कर रहे हैं. छोटे डैम, तालाब और झील की योजना बना रहे हैं. आदिवासियों में आर्गेनिक फार्मिंग के प्रति भी जागरूकता बढ़ा रहे हैं.

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First published: October 5, 2019, 2:29 PM IST
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