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Inspiring Story: ईंट भट्टे से मुक्त हुआ था बंधुआ मजदूर, अब DU से कर रहा है B.Sc.

News18Hindi
Updated: September 16, 2019, 9:37 AM IST
Inspiring Story: ईंट भट्टे से मुक्त हुआ था बंधुआ मजदूर, अब DU से कर रहा है B.Sc.
पढ़िए एक छात्र के संघर्ष की कहानी.

जाटव बाल मजबूरी और मानव तस्करी की वजह शिक्षा और आर्थिक तंगी को मानते हैं. उनके मुताबिक, शिक्षा की कमी की वजह से माता-पिता अपने बच्चों को काम पर लगा देते हैं.

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  • Last Updated: September 16, 2019, 9:37 AM IST
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Inspiring Story: आज की कहानी में आप किसी अफसर से नहीं एक छात्र के संघर्ष से रूबरू होंगे. ये कहानी दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी इलेक्ट्रोनिक्स की पढ़ाई कर रहे राजेश कुमार जाटव की है. राजेश ने यहां तक पहुंचने में बहुत संघर्ष किया है. उनका बचपन राजस्थान के ईंट भट्टे पर बंधुआ मजदूर की तरह बीत रहा था. परिवार भी बंधुआ मजदूरी कर रहा था. 2007 में नौ साल की उम्र में उन्हें एक गैर सरकारी संगठन ने ईंट भट्टे से मुक्त कराया था.

परिवार में सात सदस्य थे और आमदनी कम. परिवार का पेट पालने के लिए पूरा परिवार बंधुआ मजदूर बनकर ईंट भट्टे के काम में लगा था. ये सभी लोग 18 घंटे काम करते थे. भट्टे के मालिक शारीरिक तौर पर भी प्रताड़ित करते. जाटव को जयपुर के निकट विराट नगर से मुक्त कराया गया. उन्हें 2007 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के संगठन "बचपन बचाओ आंदोलन" ने मुक्त कराया.

ईंट भट्टे से मुक्त कराने के बाद उन्हें जयपुर स्थित संगठन के बाल आश्रम ले जाया गया. अनौपचारिक शिक्षा के बाद उनका दाखिला पांचवीं कक्षा में कराया गया. जाटव पढ़ाई में काफी होशियार था. विज्ञान में उसकी खास रुचि थी. इस वजह से उसे कक्षा आठवीं और नौवीं में लगातार दो साल राजस्थान सरकार की ओर से विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

जाटव को 10वीं कक्षा में 81 फीसदी और 12वीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे. अच्छे नम्बर लाने के लिए राजस्थान सरकार ने जाटव को दो बार लैपटॉप दिया. अब वे DU से कर रहा है B Sc इलेक्ट्रोनिक्स की पढ़ाई कर रहे हैं.

जाटव बाल मजबूरी और मानव तस्करी की वजह शिक्षा और आर्थिक तंगी को मानते हैं. उनके मुताबिक, शिक्षा की कमी की वजह से माता-पिता अपने बच्चों को काम पर लगा देते हैं. भले ही इसके पीछे मुख्य कारण आर्थिक तंगी हो, लेकिन अगर माता-पिता को शिक्षा की अहमियत पता होगी तो वे बच्चों को काम पर लगाने के बजाय पढाएंगे.

संगठन अब तक 2700 से ज्यादा छात्रों का पुनर्वास कर चुका है, जो अलग अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. इनमें कुछ वकील बने हैं तो कई ने अन्य पेशा चुना है. अब तो कई मुक्त कराए गए बच्चे अच्छी नौकरियां या अपना कारोबार कर रहे हैं और उन्होंने अपने घर भी बसा लिए हैं. (भाषा के इनपुट के साथ)

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First published: September 16, 2019, 6:07 AM IST
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