बी.टेक, एम टेक, एमसीए, जर्नलिज्म और पैरामेडिकल के कोर्स उर्दू मीडियम में संभव : प्रो. मोहम्मद फरियाद

बी.टेक, एम टेक, एमसीए, जर्नलिज्म और पैरामेडिकल के कोर्स उर्दू मीडियम में संभव : प्रो. मोहम्मद फरियाद
मौलाना आजाद नेशनल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन विभाग में प्रोफेसर हैं डॉ. मोहम्मद फरियाद.

मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (Maulana Azad National Urdu University) हैदराबाद में मीडिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद फरियाद से खास बातचीत में हमने यहां एडमिशन लेने की प्रक्रिया और तैयारी करने के तरीके के बारे में जानकारी ली.

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नई दिल्ली. मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, (Maulana Azad National Urdu University) हैदराबाद ऐसी यूनिवर्सिटी है जहां का स्टडी मीडियम उर्दू है. यहां से आप बी.टेक, एम.टेक, एमबीए, एमसीए, जर्नालिज्म (Journalism), पैरामेडिकल या पीएचडी कोई भी डिग्री करते हैं, तो यहां का मीडियम ऑफ स्टडी उर्दू होता है, लेकिन यहां उर्दू (Urdu) के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी (Hindi-English) एवं दूसरी भाषाओं को भी समान महत्व दिया जाता है. इससे यहां से पढ़े विद्यार्थियों का प्लेसमेंट बड़े औद्योगोगिक संस्थानों में संभव हो पाता है.

मौलाना आजाद नेशनल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद फरियाद ने hindi.news18.com को दिए इंटरव्यू में विश्वविद्यालय और स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के बारे में कुछ अहम जानकारियां साझा कीं. प्रोफेसर मोहम्मद फरियाद विश्वविद्यालय के कई अहम पदों जैसे मीडिया कोऑर्डिनेटर, जनसंपर्क अधिकारी (Public Relations Officer), प्लेसमेंट अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. प्रोफ़ेसर फरियाद को विश्वविद्यालय की कार्य पद्धति का लंबा अनुभव है. बता दें कि उर्दू विश्वविद्यालय (Urdu University) ने सत्र 2020-21 में  प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किया है, ऐसे में प्रोफेसर फरियाद से हमने बातचीत की और यहां की व्यवस्था के बारे में समझने की कोशिश की. ये जानकारी विद्यार्थियों के लिए निश्चित ही उपयोगी साबित होंगी. प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंश…

1.सवाल- सर इस यूनिवर्सिटी में अगर कोई एडमिशन चाहता है तो उसे उर्दू का ज्ञान जरूरी है?



जवाब- हां, जानकारी के लिए आपको बता दूं कि देश में दो विश्वविद्यालयों की स्थापना भाषाई आधार पर संसद के अधिनियम 1997-98 के तहत की गई है. संसद के अधिनियम में इस बात का साफ उल्लेख है कि इन विश्वविद्यालयों में छात्र चाहे किसी भी विभाग में तालीम हासिल करें उसका स्टडी ऑफ मीडियम उर्दू होगा. ऐसे ही महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में मीडियम ऑफ स्टडी हिंदी है. अगर आपने 10वीं /12वीं तक उर्दू को एक विषय के रूप में पढ़ा है तो आप यहां दाखिला ले सकते हैं. क्योंकि यहां दाखिले के लिए एग्जाम और क्लास में पढ़ाई के साथ ही एग्जाम भी उर्दू में ही होता है. इसलिए यहां पर उर्दू भाषा की जानकारी होनी जरूरी है.



2. सवाल- मौलाना आजाद नेशनल यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए तैयारी कैसे करनी चाहिए?

जवाब- इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी भी दूसरी सेंट्रल यूनिवर्सिटी की तरह ही होती है. एंट्रेंस एग्जाम और मेरिट के आधार पर एडमिशन दिया जाता है, लेकिन यहां उर्दू भाषा की अनिवार्यता के कारण वही छात्र दाखिला लेने में सफल हो पाते हैं, जिन्होंने दसवीं या बारहवीं में एक विषय उर्दू के रूप में पढ़ा हो.

3. सवाल- आपके विभाग में जर्नालिज्म की पढ़ाई उर्दू माध्यम से कराई जाती है. ऐसे में उर्दू पत्रकारिता के लिए आपका विभाग कितना योगदान दे रहा है?

जवाब- हम उर्दू माध्यम से पत्रकारिता की पढ़ाई कराते हैं. स्टूडेंट यहां से डिग्री लेने बाद अलग-अलग भाषाओं में पत्रकारिता कर रहे हैं. देश के तमाम बड़े शहरों में हमारे छात्र अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू मीडिया में काम कर रहे हैं. हम उर्दू के साथ ही अंग्रेजी और हिंदी भी सीखने के लिए बच्चों को कहते हैं. हमने अपने पाठ्यक्रम में अंग्रेजी का एक पेपर रखा है, जिससे हमारे बच्चों को फील्ड में किसी तरह की कोई दिक्कत न होने पाए.

4. सवाल- आपका विभाग ने यूनिसेफ के साथ मिलकर पत्रकारिता के एक नए कोर्स को डिजाइन किया है. इसके बारे में बताइए.

जवाब- मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी देश की पहली यूनिवर्सिटी है, जिसने यूनिसेफ के साथ मिलकर ‘हेल्थ जर्नलिज्म’ का कोर्स शुरू किया है. इसकी फंडिंग यूनिसेफ करता है. भारत में यह नये तरह का कोर्स है. जिसको करने के बाद हेल्थ बीट के लिए बेहतर जानकार पत्रकार हमारे विभाग से निकलेंगे. आपको बता दें कि बीबीसी, डायचे वेले समेत दुनिया भर की बड़ी न्यूज एजेंसियां हेल्थ जर्नलिस्ट की डिमांड करती हैं, लेकिन बहुत कम हेल्थ जर्नालिस्ट उनको मिल पाते हैं.

इसके अतिरिक्त हम यूनिसेफ की गाइडलाइंस के मुताबिक एक C4D ( कम्युनिकेशन फॉर डेवलपमेंट) का पेपर भी अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहे हैं. यूनिसेफ और डिपार्टमेंट के बीच बेहतर प्रोफ़ेशनल रिश्ते से हमारे बच्चों को एक शानदार प्लेटफॉर्म मिला है. हमारे बच्चे यूनिसेफ में भी आसानी से इंटर्नशिप कर सकते हैं.

5. सवाल- आपके विभाग में कैंपस प्लेसमेंट की क्या सुविधा है?

जवाब- हमारे डिपार्टमेंट के बच्चे हैदराबाद के अधिकतर मीडिया समूहों में काम कर रहे हैं. साथ ही हमारे बच्चों का देश के बड़े मीडिया संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट भी होता है. हमारे स्टूडेंट हिंदी अंग्रेजी और उर्दू के साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं में भी जर्नालिज्म कर रहे हैं. ई-टीवी, मुंसिफ -टीवी, इनाडु इंडिया, टाइम्स ऑफ इंडिया, यूएनआई, पीटीआई समेत हमारे स्टूडेंट कई सरकारी विभागों में पीआर का काम भी कर रहे हैं. मीडिया एकेडमिक के क्षेत्र में भी हमारे बहुत सारे स्टूडेंट काम कर रहे हैं. विभाग हर साल अपने विभाग की वेबसाइट को अपडेट कर स्टूडेंट्स के प्लेसमेंट्स बारे में जानकारी अपलोड करता है.

6.सवाल- देश के कई विश्वविद्यालय जर्नलिज्म के कोर्स ऑफर कर रहे हैं ऐसे में आप का विभाग दूसरे विभागों से कैसे अलग है?

जवाब- जी! आपने बहुत अच्छा सवाल किया है. हमने अपने कोर्स को इंडस्ट्री की ज़रूरतों के अनुरूप बनाया है. हम अपने बच्चों को सैद्धांतिक पक्ष के साथ साथ व्यवहारिक पक्ष पर भी भरपूर ज़ोर देते हैं. ताकि वो जब संस्थान में काम करने जाएं तो उन्हें कुछ अतिरिक्त न सीखना पड़े. हमारे अधिकांश बच्चे हिंदी या किसी दूसरी भाषा के जानकार होते हैं. ऐसे में उर्दू भाषा में हुईं उनकी शिक्षा उन्हें दूसरे बच्चों से अलग बनाती है. उर्दू का ज्ञान उन्हें अतिरिक्त एक्सपोजर प्रदान करता है.

7.सवाल- जर्नलिज्म विभाग मीडिया रिसर्च को कितना महत्व देता है ?

जवाब - रिसर्च किसी भी डिपार्टमेंट की आत्मा होती है. हमारी ये कोशिश होती है कि बच्चे नए-नए विषयों पर रिसर्च करें. एम.ए स्तर पर लघु शोध प्रबंध की व्यवस्था है. हमारे विभाग में 2014 से पीएचड के पाठ्यक्रम शुरू हुए हैं. हमारी ये कोशिश होती है कि हमारे बच्चे मीडिया के नए रुझानों पर काम करें.
इसके अतिरिक्त हमारे विभाग और नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान के बीच एक एम ओ यू भी है. जहां पर हम उनके शोध कार्यों जैसे इंटरव्यू/डाटा संग्रहण में सहायता प्रदान करते हैं. दूसरी तरफ मैं एक बड़े प्रोजेक्ट में बतौर प्रोजेक्ट डायरेक्टर की हैसियत से अपनी सेवाएं दे रहा हूं. ये प्रोजेक्ट भी यूनिसेफ द्वारा अनुदानित हैं. कहने का आशय है कि मैं रिसर्च का पेपर पढ़ाता हूं और रिसर्च करना और करवाना मेरा पसंदीदा विषय है.

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First published: May 30, 2020, 12:51 PM IST
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