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ISRO Yuvika programme: 9वीं कक्षा का छात्र कैसे बन सकता है साइंटिस्‍ट, जान‍िये क्‍या है प्रक्रिया

चयन शैक्षणिक प्रदर्शन और पाठ्येतर गतिविधियों पर आधारित होता है

चयन शैक्षणिक प्रदर्शन और पाठ्येतर गतिविधियों पर आधारित होता है

इसरो एक "युवा विज्ञान कार्यक्रम" चला रहा है. इसके तहत प्रत्‍येक राज्‍य या केंद्र शासित प्रदेश से 9वीं कक्षा के तीन छात्रों को इसरो केंद्र में जाने और प्रख्‍यात वैज्ञानिकों से बात करने का मौका मिलेगा. इस दौरान वह इसरो की प्रयोगशाला और सुविधायों को भी देख सकेंगे. यह प्रोग्राम दो सप्‍ताह के लिए चलाया जाएगा.

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    ISRO Yuvika programme: अगर आपका बच्‍चा बड़े होकर साइंटिस्‍ट बनना चाहता है और वह आए दिन कुछ ऐसा करता है, जिसे देखकर आपको यह यकीन हो जाता है कि हो न हो, यह साइंटिस्‍ट ही बनेगा. तो आपके आपके लिए अच्‍छी खबर है. इसरो खुद ऐसे छात्रों की तलाश कर रहा है, जिनमें विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर ललक हो और कुछ करने की चाहत हो.

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(ISRO) ने स्‍कूली छात्रों के लिए हाल ही में एक विशेष कार्यक्रम लॉन्‍च किया है. जिसे "युवा विज्ञान कार्यक्रम" का नाम दिया गया है. संक्षेप में आप इसे “युविका” कह सकते हैं या युवा साइंटिस्‍ट प्रोग्राम भी बुलाया जा सकता है. दरअसल, इस कार्यक्रम में उन छात्रों का चयन होगा, जो साइंटिस्‍ट बनने के सपने देखते हैं. इसके तहत प्रत्‍येक राज्‍य या केंद्र शासित प्रदेश से 9वीं कक्षा के तीन छात्रों को इसरो केंद्र में जाने और प्रख्‍यात वैज्ञानिकों से बात करने का मौका मिलेगा. इस दौरान वह इसरो की प्रयोगशाला और सुविधायों को भी देख सकेंगे. यह प्रोग्राम दो सप्‍ताह के लिए चलाया जाएगा.

    यह भी पढ़ें : Navodaya Vidyalaya Result 2019: कक्षा 9वीं में दाखिले के लिए एंट्रेंस का रिजल्‍ट जारी, इस डायरेक्‍ट लिंक पर चेक करें मेरिट लिस्‍ट

    इसरो (iSRO) का यह कार्यक्रम मई के दौरान चलाया जाएगा, जब बच्‍चों की गर्मियों की छुट्ट‍ियां होती हैं. इस कार्यक्रम के लिए रजिस्‍ट्रेशन की प्रक्रिया चालू है और उम्‍मीदवार 3 अप्रैल तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.

    कार्यक्रम के दो सप्‍ताह के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इन छात्रों को ना केवल इसरो केंद्र की प्रयोगशाला दिखाया और वैज्ञानिकों से मिलने का मौका देगा, बल्‍क‍ि इसके साथ ही वह चयनित छात्रों के रहने और आने-जाने का खर्च भी उठाएगा. इस कार्यक्रम को शुरू करने के पीछे राष्‍ट्रीय स्‍पेस एजेंसी का मकसद यह है कि ऐसे छात्रों की पहचान युवा उम्र में ही की जा सके, जिनका विज्ञान में रुझान है और जिन्‍हें भविष्‍य में स्‍पेस साइंस पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.

    किस आधार पर होगा चयन

    इसरो (ISRO) के इस कार्यक्रम में चयन की कुछ शर्तें दी गई हैं, जो ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन पेज पर मौजूद हैं. हर राज्‍य या केंद्र शासित प्रदेश से 9वीं के सिर्फ तीन छात्रों को इस कार्यक्रम के लिए चुना जाएगा. इसके लिए छात्रों के 8वीं कक्षा स्‍कोर और अन्‍य शैक्षणिक मापदंडों को आधार माना जाएगा.

    8वीं कक्षा के अंक : 50 फीसदी
    साइंस क्‍लब व स्‍पेस क्‍लब में सदस्‍यता हो: 05 फीसदी
    विज्ञान आ‍धारित प्रतियोगिताओं में पुरस्‍कार मिला हो: 10 फीसदी
    खेलकूल प्रतियोगिता में हिस्‍सा लिया हो या जीता हो: 10 फीसदी
    ग्रामीण छात्र : 20 फीसदी
    स्‍काउट-गाइड, एनसीसी, एनएसएस सदस्‍य : 05 फीसदी

    ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित छात्रों को मापदंड में विशेष वेटेज दिया गया है. अगर दो छात्रों को एक जैसे स्‍कोर मिलते हैं तो जो छोटा उम्‍मीदवार है, उसे मौका दिया जाएगा. चयनित उम्‍मीदवारों को इसरो के गेस्‍ट हाउस या होस्‍टल में रहने का मौका दिया जाएगा. यहां तक कि छात्रों के ट्रेन से आने का खर्च भी इसरो ही उठाएगा.

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