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इस कंपनी ने किया था 40,000 छंटनी का ऐलान, नौकरी जाने के डर से एंप्लॉई ने कर ली खुदकुशी

सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियां  30,000 से 40,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकती हैं

सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियां 30,000 से 40,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकती हैं

खुदकुशी करने वाली इंप्लॉई और उसके कुछ सहकर्मियों को आईटी कंपनी ने नोटिस दिया था कि दिसंबर में वह कुछ पदों में कटौती करेगी.

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    आईटी कंपनी में कार्यरत एक 24 वर्षीय कनिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ ने नौकरी जाने के डर से खुदकुशी कर ली. युवती की कंपनी ने कुछ दिन पहले ही छंटनी का ऐलान किया था. पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. पुलिस के अनुसार कनिष्ठ सॉफ्टवेटर डेवलपर के तौर पर कार्यरत युवती का शव छात्रावास में उसके कमरे में पंखे से लटका मिला.

    पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उसने मंगलवार रात आत्महत्या की थी. उसे और उसके कुछ सहकर्मियों को आईटी कंपनी ने नोटिस दिया था कि दिसंबर में वह कुछ पदों में कटौती करेगी. अधिकारी ने बताया कि युवती मूल रूप से महबूबनगर जिले की रहने वाली थी और पिछले ढाई साल से इस कंपनी के साथ काम कर रही थी. पढ़ें छंटनी के ऐलान से से जुड़ा क्या था मामला.

    सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां मझोले स्तर पर 40,000 कर्मचारियों तक की कर सकती हैं छंटनी
    देश की सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियां कारोबार में नरमी के चलते इस साल मध्यम स्तर के 30,000 से 40,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकती हैं. सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गज मोहनदास पई ने ये जानकारी दी थी.

    आईटी कंपनी इन्फोसिस के मुख्य वित्त अधिकारी रहे पई ने नौकरी जाने की इस तरह बातों को एक सामान्य बात करार दिया. उन्हों ने कहा कि परिपक्व उद्योग में हर पांच साल में एक बार तो ऐसा होती है. पई ने कहा, पश्चिम में यह सभी क्षेत्रों में होता है. भारत में भी जब कोई क्षेत्र परिपक्व होता है तब वहां मध्यम स्तर पर कई कर्मचारी होते हैं जो प्राप्त वेतन के अनुसार मूल्य वर्द्धन नहीं कर पाते.

    उन्होंने कहा कि जब कंपनियां तेजी से वृद्धि करती हैं तब पदोन्नति होती हैं लेकिन जब इसमें नरमी आती है, तब जो लोग उच्च स्तर पर मोटी तनख्वाह लेते हैं, उनकी संख्या बढ़ती जाती है. ऐसे में कंपनियों को समय-समय अपने र्काबल का पुनर्निर्धारण करना होता है और लोगों की छंटनी करनी होती है.

    आरिन कैपटल एंड मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज के चेयरमैन पई ने कहा, यह चीज हर पांच साल पर होती है. उन्होंने कहा, जबतक आप उस अनुसार प्रदर्शन नहीं करते हैं, मोटी तनख्वाह का कोई मतलब नहीं हैं. आपको मूल्य के अनुसार काम करना होगा.

    यह पूछे जाने पर कि मझोले स्तर पर कितने कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है, पई ने कहा, पूरे उद्योग में 30,000 से 40,000 लोगों की छंटनी हो सकती है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी गंवाने वाले करीब 80 प्रतिशत कर्मचारियों के लिये रोजगार के अवसर होंगे बशर्ते वे अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हों. (इनपुट-भाषा)

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