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जाम‍िया के टीचर ने CAA पर ट्वीट क‍िया ‘इन्‍हें छोड़, सभी छात्र हुए पास ...’, क‍िया गया सस्‍पेंड

News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 2:51 PM IST
जाम‍िया के टीचर ने CAA पर ट्वीट क‍िया ‘इन्‍हें छोड़, सभी छात्र हुए पास ...’, क‍िया गया सस्‍पेंड
जामिया के श‍िक्षक ने सोशल मीडिया पर यह ट्वीट क‍िया

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एपी सिद्दीकी ने शिक्षक के लिए निलंबन आदेश जारी किया. जाम‍िया के श‍िक्षक ने ट्वीट क‍िया था क‍ि सभी छात्रों को पास कर द‍िया मगर इन 15 छात्रों को इस कारण से पास नहीं क‍िया गया. जान‍िये क्‍या है पूरा मामला.

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  • Last Updated: March 26, 2020, 2:51 PM IST
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सोशल मीड‍िया पर एक पोस्‍ट के बाद जाम‍िया यून‍िवर्स‍िटी एक बार फ‍िर चर्चा के केंद्र में आ गई है. दरअसल, इस बार व‍िवाद एक श‍िक्षक के सोशल मीड‍िया पोस्‍ट को लेकर खड़ा हुआ है. ज‍िसमें उसने यह लि‍खा है क‍ि जाम‍िया के सभी छात्रों को पास कर द‍िया गया, स‍िर्फ उन्‍हीं छात्रों को फेल क‍िया गया है, ज‍िन्‍होंने संशोध‍ित नागर‍िकता कानून का व‍िरोध नहीं क‍िया.

इस पोस्‍ट के बाद बुुधवार को जाम‍िया म‍िल्‍ल‍िया इस्‍लाम‍िया यून‍िवर्स‍िटी (Jamia Millia Islamia university) ने श‍िक्षक को सस्‍पेंड करने का आदेश दे द‍िया गया है. विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एपी सिद्दीकी ने शिक्षक के लिए निलंबन आदेश जारी किया. इसमें कहा गया है कि टीचर ने ट्वीट किया था कि 15 गैर-मुस्लिमों को छोड़कर सभी छात्रों को पास कर दिया गया है, क्योंकि उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध नहीं किया.

श‍िक्षक का पोस्‍ट पढ़ने के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट ने सांप्रदायिक वैमनस्य को उकसाया है जो असहिष्णु है और आचार संहिता के खिलाफ है. सिद्दीकी के आदेश में कहा गया है कि कुलपति ने अहमद को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला किया है.

अबरार अहमद, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में एक सहायक प्रोफेसर हैं, उनके ट्वीट को गलत समझा गया है और वह केवल व्यंग्य था, ना क‍ि तथ्यपूर्ण.



अहमद ने यह तर्क देने के लिए फेसबुक का रुख किया. अहमद ने कहा क‍ि मेरा पोस्‍ट यह बताने के लिए एक व्यंग्य था कि सीएए द्वारा अल्पसंख्यकों को कैसे निशाना बनाया गया था और कोई परीक्षा नहीं होने के कारण वह किसी को भी विफल नहीं कर सकता था. उसने कहा कि कोई परीक्षा नहीं हुई थी और इस तरह गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का सवाल ही नहीं उठता.

सहायक प्रोफेसर ने दावा किया कि एक दशक से अधिक के करियर में उनके खिलाफ भेदभाव का कोई मामला नहीं था. उन्होंने कहा कि ट्विटर पर ल‍िखने की सीमा है, इसके कारण उनके पोस्‍ट को गलत समझा गया. अब इस मामले पर जांच हो रही है और जल्‍द ही सच्‍चाई सामने आ जाएगी.

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First published: March 26, 2020, 2:51 PM IST
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अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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