लाइव टीवी

Success Story: कभी खाने के नहीं हुआ करते थे पैसे, आज मेहनत के दम पर अमेरिका में पढ़ते हैं जयकुमार

News18Hindi
Updated: April 5, 2020, 1:00 PM IST
Success Story: कभी खाने के नहीं हुआ करते थे पैसे, आज मेहनत के दम पर अमेरिका में पढ़ते हैं जयकुमार
आज हम सक्सेस स्टोरी में मुंबई के स्लम एरिया कुर्ला में रहने वाले जय कुमार वैद्य की बात कर रहे हैं.

Success Story: जय कुमार का जीवन बहुत ही संघर्षों और कठिनाओं से होकर गुजरा है. जय कुमार बताते हैं कि उनके बचपन में ही पिता ने मां को छोड़ दिया था. ऐसे समय में रिश्तेदारों ने मदद करने की बजाय दूरी बना ली थी.

  • Share this:
Success Story: एक कहावत तो आपने कई बार सुनी होगी कि हौंसले मजबूत हों तो दुनिया का कोई भी काम किया जा सकता है. इस काम के लिए जब मां का आर्शीवाद साथ हो तो मुश्किलें और भी आसान हो जाती हैं. आज हम सक्सेस स्टोरी में मुंबई के स्लम एरिया कुर्ला में रहने वाले जय कुमार वैद्य की बात कर रहे हैं.

जय कुमार का जीवन बहुत ही संघर्षों और कठिनाअओं से होकर गुजरा है. जय कुमार बताते हैं कि उनके बचपन में ही पिता ने मां को छोड़ दिया था. मां लिपिक की नौकरी करती थीं, लेकिन मेरी देखभाल के लिए मां ने नौकरी भी छोड़ दी. लेकिन किसी तरह से मुझे पाला और बड़ा किया. जय ने बताया कि कई बार रात में हम बड़ा पाव और समोसे खाकर सो जाते थें, क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं थे.

रिश्तेदारों ने बना ली दूरी2988403
जय ने बताया कि कुर्ला के एक स्थानीय ट्रस्ट ने हमें मदद देनी शुरू की. वहां से हमें राशन और पहनने के कपड़े मिल जाते थे. मैंने उन कपड़ों को अब तक संभाल कर रखा है. मां ने मेरा दाखिला स्कूल में करवा दिया था, पर उनकी नौकरी छूटने के बाद फीस भरने के लाले पड़ गए. रिश्तेदारों ने भी हमारी ओर ध्यान देना बंद कर दिया. मेरी स्कूल फीस भरने के लिए मां विभिन्न संगठनों से संपर्क करती थीं और मदद मांगती थीं.कई बार ऐसा हुआ कि स्थानीय स्कूल ने मेरा परीक्षा परिणाम तब तक जारी नहीं किया, जब तक कि मैंने स्कूल की फीस नहीं भर दी.



पैसे के लिए शुरू किया काम


जय ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ मैंने छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए. अपनी स्कूल फीस निकालने के लिए मैंने एक स्थानीय टीवी रिपेयरिंग की दुकान में काम किया. इसके बाद मैंने कुछ दिन कपड़े की दुकान पर और कई छात्रों के असाइनमेंट का काम भी किया. बाद में एक संस्था से मिले सहयोग से मैंने शिक्षा ऋण लेकर केजे सोमैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया.

विदेशी छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाता था कोचिंग
कॉलेज में मैंने रोबोटिक्स में तीन राष्ट्रीय और चार राज्य-स्तरीय पुरस्कार जीते. इसके बाद मुझे लार्सन एंड टूब्रो में इंटर्नशिप करने का मौका मिला. मैं आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने के बारे में सोच रहा था, पर मुझे ऋण चुकाने, अपने घर का नवीनीकरण करने और अमेरिका जाने के लिए अपनी टिकट का भुगतान करने के साथ पॉकेट मनी के लिए रुपयों की आवश्यकता थी. पढ़ाई के साथ घर का खर्च चलाने के लिए मैंने विदेशी छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग देना शुरू किया.

ऐसे मिली कामयाबी
टीआईएफआर में पढ़ाई के दौरान मैंने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में दो शोध पत्र प्रकाशित किए. इन पत्रों ने वर्जीनिया विश्वविद्यालय का ध्यान आकर्षित किया, जहां से स्नातक अनुसंधान सहायक के रूप में काम करने का मेरे पास ऑफर आया. इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मुझे एहसास हुआ कि मेरी दिलचस्पी नैनो स्केल भौतिकी में है. मैंने अपनी इंजीनियरिंग के बाद के शोध के लिए जो विषय चुना, वह भी नैनो स्केल भौतिकी से संबंधित है.

पीएचडी के बाद कुछ बड़ा काम करूंगा
अब मैं शोध कर रहा हूं कि नैनो स्केल डिवाइस और अन्य सामान कैसे बनाए जाएं. पीएचडी के बाद, मैं नौकरी करना चाहता हूं. अपने देश में मैं एक कंपनी की स्थापना करना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि भारत प्रौद्योगिकी का आत्मनिर्भर विनिर्माण केंद्र बने. जरूरतमंदों और वंचित विद्यार्थियों की मदद करने के बारे में भी मैंने सोच रखा है.

ये भी पढ़ें- Admission 2020: हैदराबाद यूनिवर्सिटी के एंट्रेस एग्जाम की ऐसे करें तैयारी, इस तरह से पूछे जाते हैं सवाल

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए करियर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 5, 2020, 12:57 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading