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रट्टेबाजी लर्निंग को खत्म करने के लिए बदलेगा JEE एग्जाम का पैटर्न

News18Hindi
Updated: June 21, 2018, 5:29 PM IST
रट्टेबाजी लर्निंग को खत्म करने के लिए बदलेगा JEE एग्जाम का पैटर्न
न्यूज18 क्रिएटिव (मीर सुहैल)

रट कर पढ़ाई करना इतना सामान्य हो गया है कि ये खबर अब केंद्रीय प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गई है. मिनिस्ट्री ऑफ हायर एजुकेशन ने तकनीकी शिक्षा की निगरानी करने वाली सरकारी संस्था एआईसीटीई के साथ परामर्श करके देशभर के इंजीनियरिंग कोर्स के पैटर्न में बदलाव करने के अंतिम दौर में है.

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रौनक कुमार गुंजन

रोहित सेठ(बदला हुआ नाम), उम्र 18 साल, हर दिन कोचिंग क्लास के समय अपने साथ ईयरफोन लेकर जाता है. वह नई दिल्ली के कालू सराय कोचिंग सेंटर में नेटफ्लिक्स देखते हुए 2 घंटे समय बिता देता है. उस पर ध्यान देने वाला वहां कोई टीचर नहीं है और क्लास के बाद उसे नोट्स मिल जाते हैं.

साउथ दिल्ली का रहने वाले रोहित बताता है, 'आमतौर पर क्लास के अंत में हमें नोट्स दे दिया जाता है. क्लास टेस्ट उसी नोट्स पर आधारित होता है. आपको बस उसे तबीयत से याद करने की जरूरत होती है. मेन एंट्रेंस एग्जाम के लिए टीचर्स हमें बताते हैं कि अगर हम इस नोट्स का 80 प्रतिशत हिस्सा भी याद रख पाते हैं, तो हमारे पास होने की काफी संभावना है.

इंजीनियरिंग कोर्स के पैटर्न में बदलाव करेगी मिनिस्ट्री ऑफ हायर एजुकेशन 

रट कर पढ़ाई करना इतना सामान्य हो गया है कि ये खबर अब केंद्रीय प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गई है. मिनिस्ट्री ऑफ हायर एजुकेशन ने तकनीकी शिक्षा की निगरानी करने वाली सरकारी संस्था एआईसीटीई के साथ परामर्श करके देशभर के इंजीनियरिंग कोर्स के पैटर्न में बदलाव करने के अंतिम दौर में है. उन्हें लगता है कि नौकरियों की घटती संख्या के पीछे रट कर पढ़ाई करना सबसे बड़ा कारण है.

पहचान जाहिर न करने की शर्त पर विभाग के एक अधिकार ने बताया, ' हम इंजीनियरिंग एंट्रेंस टेस्ट और सेमेस्टर एग्जाम के लिए नए क्वेश्चन टाइप और क्वेश्चन पेपर पर काम कर रहे हैं. हमने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के साथ एक स्वतंत्र कमेटी की स्थापना की है. रिपोर्ट पहले ही आ चुकी है हम इस पर विचार कर रहे हैं.'

रट्टाबाजी है एक बड़ी समस्यामौजूदा समय में भारत में नेशनल लेवल पर इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट, ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम जेईई होता है.

समस्या को जरा नजदीक से समझने के लिए News18.com ने कई इंजीनियरिंग कोचिंग इंस्टीट्यूट में क्लास लिया. इनमें से अधिकतर कोचिंग सेंटर्स क्लास के अंत में स्टडी मेटेरियल को याद रखने के लिए स्टूडेंट्स को नोट्स देते हैं.

दिल्ली के कालू सराय स्थित कोचिंत सेंटर में, जहां रोहित नेटफ्लिक्स देखकर समय बिताता है, एक प्रोजेक्टर से जुड़ा बड़ा सा स्क्रीन लगा हुआ है. 80 स्टूडेंट्स वहां बैठकर स्क्रीन देखते हैं. वे सभी अपने बी टेक करने के सपने का पीछा करने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी उम्मीदें उस स्क्रीन पर टिकी हैं.

एआईसीटीई के चेयरमैन अनिल सहस्रबुद्धे भी मानते हैं कि रट्टेबाजी एक बहुत बड़ी समस्या है और इसकी वजह से ही स्टूडेंट्स के लिए नौकरियों की कमी है.

स्किल टेस्ट से ही स्टू़डेंट्स को परखना संभव
उन्होंने कहा, 'वर्तमान में रट्टेबाजी ही चल रही है. जो भी आपको याद है और आप उसे आंसर-सीट में लिखने की क्षमता रखते हैं, तो आपको उसी के आधार पर मार्क्स मिलते हैं और आपका एडमिशन हो जाता है. जब तक हम स्टूडेंट का स्किल टेस्ट नहीं करेंगे, हम उसे परख नहीं पाएंगे.' एआईसीटीई चेयरमैन ने कहा कि वे इसे बदलने की योजना बना रहे हैं.

ओपन बुक एग्जामिनेशन कमेटी की मुख्य सिफारिशों में से एक है. अगर इसे स्वीकार कर लिया जाता है तो स्टूडेंट्स को एग्जाम हॉल के अंदर नोट्स, टेक्स्टबुक और स्टडी मैटेरियल ले जाने की इजाजत होगी.


पिछले साल AICTE ने इंजीनियरिंग सिलेबस में किए थे ये बदलाव
कमेटी के सूत्रों ने बताया कि ये सुधार सिस्टमिक बदलाव का हिस्सा है, जिसे एआईसीटीई बदलने का प्रयास कर रही है. इस सरकारी नियामक संस्था ने पिछले साल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है. कमेटी द्वारा सुझाए गए बदलावों में पढ़ाने के लिए एजुकेशनल एक्पीरिएंस को शामिल करने, लैब्स में ओपन-इंडेड एक्पेरिमेंट करने, प्रोजक्ट बेस्ड लर्निंग मॉड्यूल्स और इंटर्नशिप एक्सपीरिएंस शामिल है.

कोचिंग सेंटर में 2 घंटे की क्लास में रोहित अपना नेटफ्लिक्स एपिसोड खत्म करके अपने पड़ोसी की ओर बात करने के लिए मुड़ता है. स्टूडेंट्स के ऊबने की शुरुआत हो चुकी है. स्टूडेंट्स की बुदबुदाहट अब शांत चैटिंग में बदल चुकी है. एंट्रेंस एग्जाम के अलावा, ज़ॉब सबसे लोकप्रिय टॉपिक है.

इंजीनियरिंग कॉलेजों में समर इंटर्नशिप हुई अनिवार्य
News18.com ने कई कंपनियों के एचआर हेड्स से भी बात की. उनके भी अलग मत थे. एक पूर्व एचआर हेड ने बताया कि जिन स्टूडेंट्स के मार्क्स अच्छे होते हैं वे जाहिर तौर पर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं, लेकिन ये सीमित है. नौकरी में बने रहने और अच्छी सैलरी के लिए उनके पास प्रैक्टिकल और इंडस्ट्रियल स्किल भी होनी चाहिए.

प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, एआईसीटीई ने देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में समर इंटर्नशिप अनिवार्य बना दिया है. एआईसीटीई प्रमुख ने बताया, "कॉलेजों में समर इंटर्नशिप अनिवार्य हो गई है. यह अच्छी प्रगति है. कॉलेज प्राईवेट कंपनियों के साथ समझौते पर साइन कर रहे हैं. इस ट्रेंड से पूरी छुट्टी या एक सेमेस्टर के समय पाठ्यक्रम के दौरान इंटर्नशिप मिलनी शुरू हो गई है."

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First published: June 21, 2018, 5:24 PM IST
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