दिल्ली के स्कूलों की तर्ज पर लखनऊ यूनिवर्सिटी शुरू करेगा 'हैप्पीनेस' कोर्स

इसके लिए नैड आईडी होने की अनिवार्यता रखी गई है. (फाइल फोटो)
इसके लिए नैड आईडी होने की अनिवार्यता रखी गई है. (फाइल फोटो)

लखनऊ यूनिवर्सिटी ने इस कोर्स को शुरू करने के लिए एकेडमिक काउंसिल को प्रपोजल भेज दिया है. काउंसिल की मंजूरी मिलते ही कोर्स को शुरू कर दिया जाएगा.

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  • Last Updated: February 29, 2020, 11:03 AM IST
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नई दिल्ली. लखनऊ यूनिवर्सिटी नए सत्र 2020 में हैप्पीनेस कोर्स लॉन्च करने की योजना बना रही है. इसके लिए यूनिवर्सिटी ने एकेडमिक काउंसिल को प्रस्ताव भेजा है. काउंसिल की मंजूरी मिलते ही यह कोर्स शुरू हो सकता है. इस कोर्स को एम.एड. के तहत संचालित किया जाएगा. विश्वविद्यालय के प्रवक्ता दुर्गेश कुमार ने इस बात की जानकारी दी है.

एजुकेशन डिपार्टमेंट की अमिता वाजपेयी ने बताया कि यह एक इंटर डिपार्टमेंटल कोर्स है, जिसको साइंस और एम, कॉम के बच्चे ङी पढ़ सकते हैं. हैप्पीनेस कोर्स को एम. एड के चौथे सेमेस्टर में शामिल किया जाएगा. यह हैप्पीनेस कोर्स पांच यूनिट्स का होगा. इस कोर्स का उद्देश्य स्टूडेंट्स का तनावमुक्त बनाना है. इसके सिलेबस में गीता और दर्शनशास्त्र को शामिल किया जाएगा.

यह एक आप्शनल कोर्स होगा, हालांकि इसमें एडमिशन लेने वाले को इसकी परीक्षा भी देनी होगी. वाजपेयी ने बताया कि करिकुलम को एकेडमिक काउंसिल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है. वाजपेयी ने कहा कि आगे हम इस पर डिप्लोमा और डिग्री कोर्स भी शुरू करेंगे.



कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में खुलेगी डिजिटल लाइब्रेरी
सैमसंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट और कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को राज्य के स्कूलों में डिजिटल लाईब्रेरी खोलने का ऐलान किया है. इस ऐलान के बाद प्रदेश के 100 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में इस लाइब्रेरी को खोला जाएगा. इसके तहत करीब 2500 स्टूडेंट्स को 2000 से ज्यादा सैमसंग गैलेक्सी टैब ए और कुछ ई- एजुकेशनल कंटेन्ट दिए जाएंगे.

राज्य सरकार के साथ इस पार्टनरशिप पर बैंगलोर सैमसंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट के मैनेजिंग डायरेक्टर दिपेश शाह ने उम्मीद जताई कि इस न्यू ऐज टेक्नोलॉजी के जरिए स्टूडेंट्स पढ़ाई और लर्निंग के कई नए तरीके सीखेंगे. इस डिजिटल लाइब्रेरी के पहले चरण में तुमकुर और रामनगर के करीब 50 सरकारी स्कूलों में 20 टैबलेट दिया जाएगा. तुमकुर को स्मार्ट सिटी भी कहा जाता है, ऐसे में सरकार का यह फैसला डिजिटल एजुकेशन की तरफ बढ़ाया एक कदम है.

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