मध्यप्रदेश में आठवीं तक के बच्चों के लिए स्कूल फिलहाल नहीं खुलेंगे

प्राथमिक (पहली से पांचवी) और माध्यमिक पाठशालाएं बंद रहेंगी.
प्राथमिक (पहली से पांचवी) और माध्यमिक पाठशालाएं बंद रहेंगी.

राजकीय हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 40,000 छात्रों में से केवल 5,000 छात्रों के अभिभावकों ने अपने बच्चों को आंशिक रूप से खुले स्कूलों में भेजने की सहमति दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2020, 5:27 PM IST
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नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर प्रदेश में आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए स्कूल फिलहाल नहीं खुलेंगे.

माध्यमिक स्कूलों में छोटे बच्चे होते हैं और हम जोखिम नहीं ले सकते
केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी अनलॉक-5 के दिशा निर्देशों के अनुसार स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थाएं 15 अक्टूबर से निषिद्ध क्षेत्रों के बाहर फिर से खोले जा सकते हैं. परमार ने ‘न्यूज एजेंसी’ से कहा, ‘‘माध्यमिक स्कूलों में छोटे बच्चे होते हैं और हम जोखिम नहीं ले सकते. इसलिए प्राथमिक (पहली से पांचवी) और माध्यमिक पाठशालाओं (छठी से आठवीं) को हम अभी खोलने नहीं जा रहे हैं.’’

21 सितंबर से सीमित छात्रों के साथ स्कूलों को खोला गया
उन्होंने कहा कि सरकार भी स्कूल खोलने का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है. परमार ने बताया कि राज्य में कोविड-19 प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करते हुए 21 सितंबर से सीमित छात्रों के साथ कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए स्कूलों को आंशिक रूप से खोला गया है और उनमें आने वाले छात्रों की संख्या थोड़ी बहुत बढ़ाई जा सकती है.



अभिभावक बच्चे को स्कूल नहीं भेजना चाहते तो हम बाध्य नहीं करेंगे
उन्होंने कहा कि यदि अभिभावक अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं या बच्चा भीड़ में स्कूल नहीं आना चाहता है तो हम उन्हें बाध्य नहीं करेंगे. कक्षा सातवीं की एक छात्रा के पिता अनूप दत्ता ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस संक्रमण के नये मामले निरंतर बढ़ रहे हैं और जब तक इस पर नियंत्रण नहीं हो जाता, तब तक मैं अपनी बेटी को स्कूल नहीं भेजूंगा.’’

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40,000 में से 5,000 छात्रों के अभिभावकों ने स्कूलों में भेजने की सहमति दी
भोपाल जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना के अनुसार 132 राजकीय हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 40,000 छात्रों में से केवल 5,000 छात्रों के अभिभावकों ने अपने बच्चों को आंशिक रूप से खुले स्कूलों में भेजने की सहमति दी है.
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