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NEET: मद्रास हाई कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार, कहा- जिनके पास पैसा वही बन सकते हैं डॉक्‍टर

News18Hindi
Updated: November 5, 2019, 10:09 AM IST
NEET: मद्रास हाई कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार, कहा- जिनके पास पैसा वही बन सकते हैं डॉक्‍टर
NEET की तैयारी के ल‍िये महंगी कोचिंग करनी पड़ती है छात्रों को. इस पर मद्रास हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है.

अदालत ने माना कि NEET परीक्षा को पास करने के लिए निजी कोचिंग सेंटरों में जाए बिना मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेना असंभव है.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 10:09 AM IST
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चेन्‍नई: नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) क्लियर करने और तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों की कम संख्‍या को देखते हुए, सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि निजी एनईईटी कोचिंग (NEET coaching) के बिना डॉक्टर बनना असंभव हो गया है.

NEET की तैयारी में होने वाले खर्चों को देखते हुए जस्टिस एन किरुबाकरन और पी वेलमुरुगन की बेंच ने कहा क‍ि एक गरीब इतनी महंगी कोच‍िंग कैसे कर सकता है. मेड‍िकल कॉलेजों के दरवाजे गरीबों के ल‍िये कभी नहीं खुलते. अदालत ने माना क‍ि यह दावा क‍िया गया था क‍ि मेडिकल सीट के ल‍िये होने वाली खरीद-फरोख्‍त और पैसों की लेन-देन से बचने के ल‍िये NEET परीक्षा की शुरुआत की गई थी. लेकिन अब, ऐसे कोचिंग सेंटरों के माध्यम से पैसों का खेल चल रहा है.

बेंच ने अपना यह अवलोकन उन आंकड़ों के आधार पर द‍िया है, ज‍िसे केंद्र सरकार ने उपलब्‍ध कराया है. अदालत NEET क्‍ल‍ियर करने के लिए कथित प्रतिरूपण (alleged impersonation) के एक मामले की सुनवाई कर रहा था.

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नीट के ल‍िये प्राइवेट कोच‍िंंग पर छात्रों को 5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं.


गरीब छात्रोंं के ल‍िये असंभव:
मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा क‍ि निजी कोच‍िंग क्‍लास के बगैर नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्‍ट (NEET) को क्‍ल‍ियर करना असंभव है, क्‍योंकि इसका खर्च 5 लाख तक चला जाता है, जो एक गरीब छात्र के ल‍िये वहन करना संभव नहीं है. कोर्ट ने यह गौर क‍िया क‍ि NEET, गरीब छात्रोंं के ल‍िये सुविधा नहीं, बल्‍क‍ि असुविधा है. जो लोग प्राइवेट कोच‍िंग करते हैं, स‍िर्फ वहीं मेडिकल सीट सुरक्षित कर पाते हैं.

NEET प्रतिरूपण केस (NEET impersonation case) की याचिका पर सुनवाई करने के दौरान कोर्ट ने कहा क‍ि जब केंद्र ने कई यूपीए योजनाओं को पलट दिया है, तो NEET पर पुनर्विचार क्‍यों नहीं किया जाता. कांग्रेस-डीएमके के राज में शुरू की गई NEET जैसी व्‍यवस्‍था को केंद्र सरकार क्‍यों नहीं खत्‍म कर सकती. कोर्ट ने कहा क‍ि यह चौंकाने वाला है क‍ि स‍िर्फ वहीं लोग, जो निजी कोचिंग कक्षाएं अटेंड कर सकते हैं और 5 लाख तक खर्च कर सकते हैं, स‍िर्फ वही मेडिकल सीट हासिल कर सकते हैं.
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सुनवाई कर रही बेंच ने पाया क‍ि तमिलनाडु के सरकारी डॉक्‍टरों को श‍िक्षकों निजी सहायकोंं से भी कम वेतन प्राप्‍त होता है.


सरकारी डॉक्‍टरों को कम सैलरी:
इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को भी फटकार लगाते हुए कहा क‍ि तमिलनाडु सरकार, सरकारी डॉक्‍टरों को कम वेतन दे रही है. सरकारी डॉक्‍टरों को स‍िर्फ 57,000 रुपये वेतन प्राप्‍त होता है, जबक‍ि राज्‍य सरकार के श‍िक्षक और हाईकोर्ट के पर्सनल असिस्‍टेंट को इससे ज्‍यादा वेतन म‍िल रहा है.

7 नवंबर तक मामले पर सुनवाई स्‍थगि‍त:
इस मामले पर सुनवाई 7 नवंबर तक के ल‍िये स्‍थ‍ग‍ित कर दी गई है और कोर्ट ने CBI से पूछा है कि‍ क्‍या उनके पास NEET प्रतिरूपण (NEET impersonation) को लेकर कोई श‍िकायत आई है.

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मेडिकल कॉलेज में धोखे से एडमिशन लेने की घटना के सामने आने के बाद मामले ने तुल पकड़ा.


कहां से शुरू हुआ यह मामला:
दरअसल, NEET व‍िवाद स‍ितंबर में शुरू हुआ, जब थेनी स्‍थ‍ित मेडिकल कॉलेज के डीन के पास दो ईमेल आए. इस ईमेल में उद‍ित सूर्या (Udit Surya) के बारे में बताया गया था, जो मेडिकल कोर्स के पहले वर्ष का छात्र था. उदित ने दो बार NEET परीक्षा में फेल होने के बाद, तीसरे अटेम्‍प में परीक्षा पास की. तीसरी बार उदित ने मुंबई में परीक्षा द‍िया. इस मेल के दो द‍िनों बाद एक दूसरा मेल आया, ज‍िसमें यह बताया गया था क‍ि कोर्स में एडमिशन लेने वाला व्‍यक्‍त‍ि और परीक्षा में बैठने वाला शख्‍स अलग-अलग हैं. यानी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वाला छात्र, वही व्यक्ति नहीं था जो एग्‍जाम के लिए उपस्थित हुआ था.

इसके बाद, कॉलेज प्राध‍िकार‍ियों की एक इंटरनल एंक्‍वायरी ब‍िठाई गई, ज‍िसमें छात्र के नीट पहचान पत्र (NEET identity card) और सामान्‍य पहचान पत्र (general identity card) की फोटो में अंतर पाया गया.

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First published: November 5, 2019, 9:56 AM IST
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