महाराष्ट्रः करवाई जा सकती हैं यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं, राज्यपाल ने सीएम को लिखा पत्र

महाराष्ट्रः करवाई जा सकती हैं यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं, राज्यपाल ने सीएम को लिखा पत्र
OBC कैटिगरी में अर्चना तिवारी ने मारी बाजी (file photo)

गवर्नर ने लिखा कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री द्वारा बनाए गए वाइस चांसलर की कमेटी ने परीक्षा करवाए जाने संबंधी जो सौंपी थी, उसे भी उनके सामने प्रस्तुत नहीं किया गया है जबकि कमेटी की तरफ से उसे 6 मई को ही शिक्षा सचिव को सौंप दिया गया था.

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नई दिल्ली. महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा यूनिवर्सिटीज में फाइनल ईयर की परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने उन्हें पत्र लिखा है. 2 जून को लिखे गए पत्र में महाराष्ट्र पब्लिक यूनिवर्सिटीज़ ऐक्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के सभी मामलों में पूरे अधिकार चांसलर के पास होते हैं. इसलिए परीक्षा संबंधी फैसले मुख्यमंत्री द्वारा ऐक्ट के हिसाब से लेना चाहिए था.

राज्यपाल ने फैसले को बताया अप्रत्याशित
राज्यपाल ने इसे 'अप्रत्याशित' बताते हुए कहा कि यह फैसला 'बिना विचार किए' लिया गया है. अगर इसे लागू किया जाता है तो छात्रों के भविष्य पर इससे असर पड़ेगा. 2 जून को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि 'जब मैंने मीडिया के हवाले से मुख्यमंत्री द्वारा परीक्षा न करवाए जाने की घोषणा सुनी तो मैं दंग रह गया जबकि मैं खुद भेजे गए अपने पत्र के जवाब का इंतज़ार कर रहा हूं.'

कमेटी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट का दिया हवाला



गवर्नर ने लिखा कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री द्वारा बनाए गए वाइस चांसलर की कमेटी ने परीक्षा करवाए जाने संबंधी जो सौंपी थी, उसे भी उनके सामने प्रस्तुत नहीं किया गया है जबकि कमेटी की तरफ से उसे 6 मई को ही शिक्षा सचिव को सौंप दिया गया था. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर से इस संदर्भ में उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए मीटिंग की थी, जिसमें परीक्षा करवाए जाने को लेकर उनकी तैयारियों के बारे में पता लगा था.



परीक्षा ने लेने से होता है आधारभूत सिद्धांत का उल्लंघन
राज्यपाल ने सीधे तौर पर लिखा कमेटी द्वारा की गई सिफारिशों को आंशिक तौर पर या पूरी तरह से स्वीकार करने के बाद आगे के सभी निर्देश चांसलर ऑफिस से सीधे दिए जाएंगे. गवर्नर ने लिखा कि परीक्षा न लेने से आधारभूत सिद्धांत का उल्लंघन होता है कि एक ही तरह की डिग्री लेने के लिए दो तरह के नियम नहीं हो सकते.

कई फील्ड के छात्रों को हो सकती है दिक्कत
चिकित्सा, आर्किटेक्चर, लॉ इत्यादि फील्ड के छात्रों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन्हें प्रेक्टिस करने के लिए अपने फील्ड में रजिस्टर करना होता है, लेकिन जब तक एक पूर्वस्थापित पैरामीटर पर इनका मूल्यांकन नहीं होगा तब तक इन्हें रजिस्टर नहीं किया जा सकेगा.

गृह मंत्रालय से पहले ही मिल चुकी है स्वीकृति
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने पहले ही राज्य बोर्डों की परीक्षा करवाने की स्वीकृति दे दी है और इसके लिए गाइडलाइन भी जारी कर दिया है. साथ ही सीबीएसई और आईसीएसई भी कोविड-19 की परिस्थिति के बावजूद परीक्षा करवा रहे हैं. ऐसे में अगर बोर्ड छोटे बच्चों की परीक्षा करवा सकते हैं तो यूनिवर्सिटी के छात्रों की परीक्षा क्यों नहीं ली जा सकती.

यूजीसी की गाइलाइन्स का पालन ज़रूरी
अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि यूजीसी और दूसरी सेंट्रल एजेंसियों का भी यही मानना है कि फाइनल ईयर की परीक्षा लेना जरूरी है इसलिए राज्य सरकार को यूजीसी की गाइडलाइन और महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऐक्ट को फॉलो करना चाहिए.
First published: June 2, 2020, 10:48 PM IST
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