गांव में 5 साल काम करने को तैयार उम्‍मीदवारों को मिलेगा 10% MBBS कोटा, जानें ड‍िटेल

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Updated: September 10, 2019, 9:02 AM IST
गांव में 5 साल काम करने को तैयार उम्‍मीदवारों को मिलेगा 10% MBBS कोटा, जानें ड‍िटेल
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के दौरान इन छात्रों को मिलेगा कोटा

इन कोटा सीटों पर दाखिला प्राप्‍त करने वाले छात्रों को एक बॉन्‍ड साइन करना होगा. छात्र अगर कोर्स समाप्‍त होने के बाद इस बॉन्‍ड का उल्‍लंघन करता है तो उसे पांच साल की सजा हो सकती है. यहां तक क‍ि उसका लाइसेंस भी रद्द क‍िया जा सकता है.

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मुंबई. इस बात से इनकार नहीं क‍िया जा सकता क‍ि शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्‍टरों (Doctors) की भारी कमी है. गांव में डॉक्टर-रोगी की इसी खाई को पाटने के लिए, महाराष्‍ट्र (Maharashtra) की राज्य सरकार ने एमबीबीएस (MBBS) की 10% और मेडिकल पोस्ट-ग्रेजुएशन की 20% सीटों को आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा है. ये आरक्षण या कोटा ऐसे इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए होगा, जो अपनी इच्‍छा से ग्रामीण इलाकों में पांच या सात साल काम करना चाहते हैं. हालांकि इसके साथ कुछ कठोर न‍ियम भी जुड़े हुए हैं. कोटा सीट का लाभ लेने वाला उम्‍मीदवार, यदि कोर्स पूरा होने के बाद राज्य में संचालित अस्पतालों में काम करने में विफल रहता है तो उसे पांच साल की कैद हो सकती है और यहां तक कि उसकी डिग्री रद्द भी हो सकती है.

विधायिका में बिल होगा पेश
टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक र‍िपोर्ट के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल ने भी इस फैसले पर अपनी मंजूरी की मुहर लगा दी है और इसे कानून बनाने के लिए विधायिका में बिल पेश किया जाएगा. आरक्षित सीटें, राज्य और नागरिक-संचालित मेडिकल कॉलेजों (civic-run medical colleges) के साथ-साथ उन उम्मीदवारों के लिए भी उपलब्ध होंगी, जो सरकारी केंद्रों में लंबे समय तक काम करना चाहते हैं. प्रारंभ‍िक स्‍तर पर यदि अंदाजा लगाएं तो करीब 450-500 MBBS सीटें इस कोटा के तहत रखी जा सकती हैं, वहीं इन-सर्व‍िस एमबीबीएस उम्‍मीदवारों के ल‍िए 300 PG सीटें हो सकती हैं.

कोटा लेने वाले छात्रों को भरना होगा बॉन्ड

चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DMER) के प्रमुख डॉ. टी.पी लहाने ने कहा क‍ि यह सुनिश्‍च‍ित करने के लिए निर्णय लिया गया है कि हमारे पास ग्रामीण, पहाड़ी या दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पर्याप्त डॉक्टर हैं. इन कोटा सीटों पर दाखिला प्राप्‍त करने वाले छात्रों को एक बॉन्ड साइन करना होगा. छात्र अगर कोर्स समाप्‍त होने के बाद इस बॉन्‍ड का उल्‍लंघन करता है तो उसे पांच साल की सजा हो सकती है. यहां तक क‍ि उसका लाइसेंस भी रद्द क‍िया जा सकता है.

मेडिकल एजुकेशन ड‍िपार्टमेंट के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा क‍ि ऐसा ही न‍ियम आर्म्‍ड फोर्स मेडिकल कॉलेज, पुणे में मौजूद है.

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First published: September 10, 2019, 8:01 AM IST
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