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Happy Teachers Day 2019: इस शिक्षक की विदाई पर रोया था पूरा गांव

Happy Teachers Day 2019: इस शिक्षक की विदाई पर रोया था पूरा गांव

Happy Teachers Day 2019: इस शिक्षक की विदाई पर रोया था पूरा गांव, जानिए कौन हैं वो

Happy Teachers Day 2019: इस शिक्षक की विदाई पर रोया था पूरा गांव, जानिए कौन हैं वो

आशीष उत्तरकाशी के भंकोली गांव के एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ाते थे. उनके पढ़ाने का अंदाज और मिलनसार स्‍वभाव था कि तबादले के बाद जब वे जाने लगे तो उनकी विदाई पर पूरे गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
    देश भर में आज यानी कि 5 सितंबर (5 September) को टीचर्स डे (Teachers' Day) धूमधाम से मनाया जा रहा है. स्‍कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्‍थानों में शिक्षक के सम्‍मान में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इस मौके पर न्‍यूज 18 हिंदी आपको एक ऐसे अध्‍यापक से मिलवाने जा रहा है, जिनकी स्‍कूल से विदाई होने पर बच्‍चे ही नहीं पूरा गांव रो पड़ा था. सुनने में ये थोड़ा अजीब लग सकता है कि एक टीचर कुछ बच्‍चों का फेवरेट हो सकता है. लेकिन क्‍या कोई शिक्षक ऐसा भी हो सकता है, जिसको कुछ लोग नहीं बल्‍कि पूरा का पूरा गांव पसंद करता हो और उसकी विदाई पर गांव भर के लोगों की आंखों में आंसू हों लेकिन ये सच है.

    इस शख्‍स का नाम है आशीष डंगवाल.आशीष उत्तरकाशी के भंकोली गांव के एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ाते थे. पढ़ाने का अंदाज और अपने मिलनसार स्‍वभाव की वजह से वह पूरे गांव में लोकप्रिय थे. तबादले के बाद जब वह जाने लगे तो उनकी विदाई पर पूरे गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे. फिलहाल उनका ट्रांसफर गारीखेत (टिहरी) में हो गया है.

    Ashish Dangwal, teachers day

    इस बारे में आशीष कहते हैं, “मैं प्यार और बिना शर्त स्नेह पाने के लिए भाग्यशाली हूं. मैंने उत्तरकाशी के सरकारी स्कूल में तीन साल काम किया. मैंने उन शिक्षण विधियों को अपनाया जो छात्रों को पसंद हैं और मैं यह करना जारी रख रहा हूं. मेरे नए स्कूल में भी मुझे सभी से बहुत समर्थन मिलता है.'' आशीष कहते हैं, ''मैं पहाड़ियों में पला-बढ़ा हूं और अब यहीं सेवा करना चाहता हूं.'' जहां तमाम शिक्षक चाहते हैं कि उन्‍हें शहरी क्षेत्र में सभी सुविधाओं से युक्‍त स्‍कूल में पढ़ाने का मौका मिले. वहीं आशीष ऐसे शिक्षक हैं, जिन्‍होंने हमेशा दूर-दराज के स्‍कूलों को चुना है.

    सुमित्रा को मिलेगा राज्‍यपाल पुरस्कार
    वैसे आशीष के अलावा सुमित्रा फरस्वाण जैसे उदाहरण भी हैं जिन्होंने सेवा करने के लिए हमेशा दूर-दराज स्‍कूल चुना है. फिलहाल वह चमोली जिले के किरौली के एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं. सुमित्रा को इस साल के राज्यपाल पुरस्कार के लिए चुना गया है. अपने तीन दशक लंबे शिक्षण करियर में सुमित्रा को चार साल पहले एक विदाई दी गई जब वह सीधे 13 साल तक एक स्कूल में सेवा करने के बाद डिगोली गांव से स्थानांतरित कर दी गई थीं.

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    Tags: Teacher, Uttarakhand news

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