दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में टीचर्स के ये पद खाली, RTI में हुआ खुलासा

दिल्ली के 794 स्कूलों में उर्दू के 650 शिक्षक पद खाली हैं. वहीं 1001 स्कूलों में पंजाबी के 750 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 11:56 PM IST
दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में टीचर्स के ये पद खाली, RTI में हुआ खुलासा
दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में टीचर्स के ये पद खाली, RTI में हुआ खुलासा
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Updated: July 22, 2019, 11:56 PM IST
वैसे तो उर्दू और पंजाबी भाषा को दिल्‍ली में दूसरी सरकारी भाषा होने का दर्जा दिया गया है लेकिन दूसरी भाषा का गौरव हासिल करने वाली इन भाषाओं की स्‍थिति कितनी बदतर है. इस बात का पता ऐसे लगाया जा सकता है कि यहां के सरकारी स्‍कूलों में दोनों भाषाओं के शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली हैं. इस बात का खुलासा आरटीआई याचिका की प्रतिक्रिया में सामने आई है.

दरअसल ज़र्फ़ फाउंडेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष मंजर अली ने शिक्षा निदेशालय से सूचना के अधिकार के तहत उर्दू और पंजाबी के शिक्षकों के बारे में जानकारी मांगी थी. इसमें ये बात सामने आई है कि दिल्ली के 794 स्कूलों में उर्दू के शिक्षकों के 650 से ज्यादा खाली हैं. वहीं 1001 स्कूलों में पंजाबी के 750 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं.

आरटीआई के जवाब में निदेशालय ने बताया कि दिल्ली सरकार के 794 स्कूलों में टीजीटी (छठी से 10वीं कक्षा के शिक्षक) उर्दू के 1029 और 1001 स्कूलों में टीजीटी पंजाबी के 1024 पद स्वीकृत हैं  लेकिन उर्दू के 669 पद खाली हैं जबकि पंजाबी के 791 पद खाली पड़े हैं. निदेशालय के मुताबिक, उर्दू के 1029 पदों में से स्थायी शिक्षक केवल 57 हैं और 303 अतिथि शिक्षक नियुक्त हैं. हालांकि उर्दू अकादमी की ओर से 38 शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं. इसके बाद भी कुल 631 शिक्षकों की कमी है.

इस बारे में शिक्षाविद प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने पीटीआई भाषा को बताया कि पंजाबी और उर्दू की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने के बावजूद सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं. वहीं अगर दिल्‍ली सरकार इन पदों पर भर्तियां शुरू करती है तो सैकड़ों युवाओं को जॉब मिल सकेगी.

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First published: July 22, 2019, 11:31 PM IST
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