MP Board 10th Result: किसान और चौकीदार के बेटों ने किया कमाल, दसवीं में पिछले साल किया था टॉप

MP Board 10th Result: किसान और चौकीदार के बेटों ने किया कमाल, दसवीं में पिछले साल किया था टॉप
एमपी बोर्ड की दसवीं कक्षा के नतीजे के नतीजे आज जारी होंगे.

MP Board 10th Result 2020 काफी बच्चे ऐसे भी होंगे जो कि काफी मुश्किलों लड़कर और परेशानियों का सामना करके परीक्षा में पास होते हैं.

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भोपाल. आज मध्य प्रदेश बोर्ड दसवीं कक्षा का रिज़ल्ट (MP Board 10th Result 2020) जारी करने वाला है. लाखों छात्रों के भाग्य का फैसला आज होगा. इसमें से बहुत सारे छात्र ऐसे भी होंगे जो कि काफी मुश्किलों से लड़कर और परेशानियों का सामना करके परीक्षा में पास होते हैं. इसी तरह से हम आपको पिछले साल के कुछ ऐसे छात्रों के बारे में बताते हैं कि जिन्होंने आर्थिक तंगी सहित अन्य कई परेशानियों के बावजूद एमपी बोर्ड की दसवीं परीक्षा को टॉप किया. दरअसल, दसवीं कक्षा में साल 2019 में एमपी बोर्ड में 20 शहरों के स्टूडेंट्स का दबदबा रहा हिंदी मीडियम में सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ने वाले छात्रों ने कक्षा दसवीं में बाजी मारी. चौकीदार के बेटे आयुष्मान ताम्रकार और किसान के बेटे गगन दीक्षित ने पहला स्थान हासिल किया था.

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1. किसान के बेटे गगन दीक्षित
सागर के गगन दीक्षित ने दसवीं में 500 में से 499 नंबर हासिल कर प्रदेश भर में पहला स्थान प्राप्त किया था. गगन को जब मेरिट में प्रथम स्थान हासिल करने का पता चला तब उन्होंने खुशी सबसे पहले अपनी दादा के साथ मनाई. गगन के पिता खेती किसानी का काम करते हैं. पिता की मेहनत से ही गगन को जिंदगी में खास मुकाम हासिल करने की प्रेरणा मिली. गगन में पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी. गगन रोजाना गगन 10 घंटे की पढ़ाई करते थे. वो सुबह 5 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक पढ़ाई करते थे. गगन ने टॉप 10 में आने का लक्ष्य रखा था. लक्ष्य को पाने के लिए 10 से 12 घंटे पढ़ाई की. गगन दीक्षित आईएएस अधिकारी बनकर अपने माता पिता और दादा की सेवा करना चाहते हैं.



2. चौकीदार के बेटे आयुष्मान ताम्रकार
पिछले साल दसवीं कक्षा में आयुष्मान ताम्रकार का भी पहला स्थान था. इन्हें 500 में से 499 अंक मिले थे. आयुष्मान के घर की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी.आर्थिक हालात बेहतर न होने के बावजूद भी कड़ी मेहनत करके आयुष्मान ने 500 में से 499 अंक हासिल कर कक्षा दसवीं में प्रथम स्थान हासिल किया. आयुष्मान के पिता चौकीदारी का काम करते हैं. चौकीदारी का काम करने कर मुश्किल हालातों के बाद आयुष्मान को पढ़ाई में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी. आयुष्मान का कहना है कि जब रिजल्ट आया तो सबसे पहले पिता के साथ खुशी बांटना चाहते थे, क्योंकि उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वह मेरिट लिस्ट में शामिल हो पाए हैं.

वही माता और बहन के साथ उन्होंने अपनी इस खुशी को बांटा. स्कूल में रिजल्ट घोषित होने के बाद सबसे पहले अपने पिता का आशीर्वाद लेने के लिए ड्यूटी वाली जगह पर पहुंचे थे. पिता के पैर छूकर जिंदगी में कुछ बड़ा करने का आशीर्वाद लिया. आयुष्मान का कहना है कि रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे पढ़ाई करने में उनको बहुत मजा आता है पढ़ना एक तरह से उनकी हॉबी है. मां की इच्छा थी उनका बेटा मेरिट लिस्ट में पहले या दूसरे नंबर पर रहे.

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उनका कहना था कि मां की उम्मीदों पर खरा उतरने से आज बड़ी खुशी महसूस हो रही है.मुझे पढ़ाई करना अच्छा लगता है, मुझे पढ़ने में मजा आता है. जिंदगी में इंजीनियर बनने का सपना रखने वाले आयुष्मान की ख्वाहिश है कि इंजीनियर बन कर घर की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करें और माता-पिता को खुशियां और खुशहाल जिंदगी दें. पिता जिस तरह से संघर्ष करके बहन और मेरी पढ़ाई करवा रहे हैं उनकी जिंदगी के संघर्ष को खत्म कर उनको खुशियां देना चाहता हूं.
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