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...तो इस वजह से भारत में बढ़ रही है बेरोजगारी, र‍िपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे

प्रतीकात्मक तस्वीर
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NSO ने की र‍िपोर्ट में भारत में रोजगार को लेक‍र चौंकाने वाले खुलासे क‍िए गए हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की र‍िपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे क‍िए गए हैं.

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नई द‍िल्‍ली: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने हाल ही में जारी अपनी रि‍पोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे क‍िए हैं. राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की Periodic Labour Force Survey+ (PLFS) (श्रम बल सर्वेक्षण) में बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी का दावा क‍िया गया है. र‍िपोर्ट में यह कहा गया है कि‍ देश में श‍िक्षा का स्‍तर बढ़ने के साथ ही बेरोजगारी का स्‍तर भी बढ़ रहा है.

आंकड़ों की मानें तो साल 2017-18 में केवल 2.1% निरक्षर शहरी पुरुष बेरोजगार थे, लेकिन अब कम से कम माध्यमिक शिक्षा वाले 9.2% पुरुषों के पास नौकरी नहीं है. यह अंतर शहरी महिलाओं के बीच भी व्यापक है. पहले 0.8% अशिक्षित बेरोजगार थी जबकि माध्यमिक या उच्च शिक्षा वाली 20% महिलाओं को रोजगार नहीं मिला था.

सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि बेरोजगारी दर शहरी महिलाओं के बीच 4 गुना तक बढ़ी है, जिनके पास केवल middle-school शिक्षा है और जो secondary-school या उससे अधिक तक शिक्षित हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी एक समान पैटर्न में दिखती है.



बेरोजगारी दर केवल शिक्षा के स्तर के साथ नहीं बढ़ी, यह समय के साथ भी बढ़ी है. NSO ने शुक्रवार को जारी किए आंकड़ों में साल 2004-05, 2009-10 और 2011-12 की बेरोजगारी के आंकड़े भी जारी किए. साथ ही NSO ने सावधानी पूर्वक ये भी कहा कि पिछले डेटा की तुलना 2017-18 के आंकड़ों के साथ नहीं की जानी चाहिए. क्योंकि सर्वेक्षण के नवीनतम दौर में कई पद्धतिगत परिवर्तन हुए.
भले ही चार साल के दौरान सटीक आंकड़ों की तुलना न की जाए, लेकिन व्यापक स्तर पर शिक्षा के स्तर के साथ बेरोजगारी में वृद्धि हुई है. पूर्व चीफ statistician of India ने कहा, 'यह आश्चर्य की बात नहीं है, हमने कुछ समय के लिए शिक्षित बेरोजगारी की बढ़ती दर के बारे में जाना है. यह सिर्फ एक आधिकारिक पुष्टि है.'

Centre for Monitoring Indian Economy के CEO महेश व्यास ने कहा, एक पीढ़ी पहले ग्रेजुएशन की डिग्री के बिना संगठित क्षेत्रों में नौकरी पाना मुश्किल था. आज संगठित क्षेत्रों में नौकरी पाने के लिए आवश्यक न्यूनतम शिक्षा बहुत कम है और इसकी दर गिरती जा रही है. CMIE कुछ सालों से हर महीने नौकरी के सर्वे कर रहा है.

बता दें कि PLFS रिपोर्ट में शिक्षित व्यक्तियों के रूप में उन लोगों को परिभाषित किया गया है, जिन्होंने secondary और उससे ऊपर की शिक्षा ली हो. शिक्षितों पर किया अध्ययन 15 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों तक ही सीमित था. कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है रोजगार की स्थिति की जांच करने के लिए 15 साल की उम्र बहुत कम है, खासकर शहरी क्षेत्रों में.

विशेषज्ञों का मानना ​​है, यह संभव है कि बेरोजगारी की दर यंग उम्र के वर्ग में अधिक हो क्योंकि एक शिक्षित शहरी युवा 23-24 साल से पहले काम करना शुरू नहीं करता, जब तक वह पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा नहीं करते. सर्वे के लिए, 15-29 साल के व्यक्ति को युवा माना गया है.

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