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राष्ट्रपति कोविंद बोले, नई शिक्षा नीति भविष्य की चुनौतियों को अवसर में बदलेगी

राष्ट्रपति कोविंद बोले, नई शिक्षा नीति भविष्य की चुनौतियों को अवसर में बदलेगी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित किया.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित किया.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी. ये 34 वर्ष पुरानी नीति का स्थान लेगी, जिसे 1986 में तैयार किया गया था.

    नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति दीर्घकालीन सोच को प्रदर्शित करती है, जिसके दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे. यह नीति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली विकसित कर भविष्य में चुनौतियां को अवसर में बदलकर नये भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी. देश के 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने ये बात कही. उन्होंने कहा कि नई नीति समावेशिता, नवोन्मेष और संस्थान की संस्कृति को मजबूत बनायेगी .

    नई गुणत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली विकसित
    रामनाथ कोविंद ने कहा, मुझे विश्वास है कि इस नीति के लागू होने से देश में नई गुणत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली विकसित होगी. यह भविष्य में चुनौतियां को अवसर में बदलकर नये भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी.

    प्रतिभा के मुताबिक विषय चुनने की स्वतंत्रता
    कोविंद ने कहा, हमारे युवाओं को अपनी पसंद और प्रतिभा के मुताबिक विषय चुनने की स्वतंत्रता होगी. उन्हें अपनी क्षमता को हासिल करने का अवसर मिलेगा. हमारी भावी पीढ़ी को न केवल उनकी क्षमता के अनुरूप रोजगार का अवसर प्राप्त होगा बल्कि वे दूसरों के लिये भी रोजगार पैदा कर सकेंगे.

    युवा मस्तिष्क के विकास में मदद 
    राष्ट्रपति ने कहा, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति दीर्घकालीन सोच को प्रदर्शित करती है, जिसके दूरगामी प्रभाव होंगे. यह समावेशी, नवोन्मेष और संस्थान की संस्कृति को मजबूत बनायेगी. मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने से युवा मस्तिष्क के विकास में मदद मिलेगी. इससे भारतीय भाषाएं और देश की एकता मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिये युवाओं का सशक्तिकरण जरूरी है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

    पांचवी कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई 
    नई शिक्षा नीति में पांचवी कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई की बात कही गई है. ऐसा बोर्ड परीक्षा के भार को कम करने के लिए किया गया है. विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने की अनुमति देने, विधि और मेडकिल को छोड़कर उच्च शिक्षा के लिये एकल नियामक बनाने, विश्वविद्यालयों के लिये साझा प्रवेश परीक्षा आयोजित करने सहित स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक अनेक सुधारों की बात कही गई है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी. ये 34 वर्ष पुरानी नीति का स्थान लेगी, जिसे 1986 में तैयार किया गया था.

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    कठिन समय ज्यादा लम्बा नहीं चलेगा
    कोविड-19 महामारी के कारण शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि यह कठिन समय ज्यादा लम्बा नहीं चलेगा. उन्हें अपने सपनों पर काम करना बंद नहीं करना चाहिए. अतीत ऐसे प्रेरक उदाहरणों ने भरा हुआ है जब ऐसी त्रासदी के बाद समाज, अर्थव्यवस्थाओं और देशों का पुनर्निर्माण हुआ. मुझे विश्वास है कि हमारे देश और युवाओं का भविष्य उज्जवल है.

    Tags: Education Policy

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