बड़ी बात: इंटरनेट की राह देख रहे इन बच्चों के लिए घर पहुंचा स्कूल, पढ़िए ये अनूठी खबर

बड़ी बात: इंटरनेट की राह देख रहे इन बच्चों के लिए घर पहुंचा स्कूल, पढ़िए ये अनूठी खबर
कोरोना वायरस के चलते देशभर में ऑनलाइन पढ़ाई का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन अब भी कई जगह ऐसी हैं, जहां इंटरनेट की पहुंच नहीं हैं.

जिन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी (Internet Connectivity) नहीं हैं, वहां बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई (Online Study) करने में बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 24, 2020, 7:57 AM IST
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नई दिल्ली. चीन के वुहान शहर से निकली जानलेवा महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) ने देखते ही देखते पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया. अब आलम ये है कि दुनियाभर में 2 करोड़ से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं, जबकि भारत में ये आंकड़ा 30 लाख की संख्या को पार कर गया है. शिक्षा व्यवस्था पर नजर डालें तो मार्च से ही स्कूल और कॉलेज (Schools-Colleges) समेत देशभर के शिक्षण संस्थान बंद हैं. ऐसे में सारा भार ऑनलाइन पढ़ाई (Online Education) पर आ गया है, जिसका चलन काफी बढ़ा है. मगर अब भी देश के कई हिस्से ऐसे हैं, ​जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी (Internet Connectivity) नहीं है. ऐसी जगहों पर बच्चों को पढ़ाने के लिए अब एक अनूठी पहल की जा रही है.

घर पहुंचा स्कूल
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मामला दक्षिण सिक्किम जिले के ग्रामीण इलाके का है, जहां गणित और विज्ञान की टीचर इंदिरा मुखी छेत्री ने बच्चों की पढ़ाई को लेकर बड़ा फैसला किया. दरअसल, कोरोना काल में स्कूल ऑनलाइन क्लासेज ले रहे हैं. मगर छेत्री जानती थीं कि कई जगह ऐसी भी हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी तो दूर, फोन करने के लिए भी सिग्नल नहीं मिलते हैं. ऐसे में उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया.

ऐसे शुरू की अनूठी पहल
इस बारे में इंदिरा मुखी छेत्री ने बताया, मैं बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी चिंतित थी. मेरे गांव के अधिकतर लोग किसान हैं ऐसे में शहरी क्षेत्रों के मुकाबले यहां बच्चों को शिक्षा मुहैया कराना और बड़ी चुनौती थी. इसीलिए मैंने हर दिन गांव में नौ बजे एक के बाद स्टूडेंट्स के घर जाकर क्लास लेने का फैसला किया. मैं इन बच्चों को मैथ्स, विज्ञान, इंग्लिश से लेकर सामान्य ज्ञान तक सभी कुछ पढ़ाती हूं.



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बता दें कि सिक्किम सरकार ने नौवीं से 12वीं क्लास तक के बच्चों के लिए सिक्किम एजुटेक ऐप भी शुरू किया ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो. मगर निचली क्लासों के बच्चों के लिए समस्याएं कायम हैं. छेत्री की तरह ही अब अन्य टीचर भी बच्चों के घर जाकर उन्हें पढ़ा रहे हैं. यहां तक कि शिक्षा विभाग ने भी सरकारी टीचरों की पहचान कर उन्हें अलग-अलग जगह सौंप दी है, जहां जाकर वे बच्चों को पढ़ा रहे हैं.
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