जम्मू-कश्मीर के स्टूडेंट पढ़ेंगे पुनर्गठन अधिनियम, जानेंगे क्यों हटा अनुच्छेद 370

जम्मू-कश्मीर के स्टूडेंट पढ़ेंगे पुनर्गठन अधिनियम, जानेंगे क्यों हटा अनुच्छेद 370
अब जम्मू-कश्मीर के स्टूडेंट्स स्कूल में पुनर्गठन अधिनियम पढ़ेंगे.

कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान (Social science) की पाठ्यपुस्तक में, J&K के लेफ्टिनेंट गवर्नर (Lieutenant Governor) गिरीश चंद्र मुर्मू और लद्दाख लेफ्टिनेंट गवर्नर आर के माथुर के चित्रों को यूनियन टेरिटरी की प्रशासनिक संरचना (Administrative structure) की व्याख्या करते हुए शामिल किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2020, 3:17 PM IST
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J&K School Books Get New Chapter: जम्मू-कश्मीर के बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ने अपने सिलेबस में एक नया चैप्टर शामिल किया है. यह चैप्टर जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 (J&K Reorganisation Act, 2019) है. सामाजिक विज्ञान की कक्षा 6वीं से दसवीं तक की किताबों में इसको शामिल किया जाएगा. इस सिलेबस में बच्चों को बताया जाएगा कि जम्मू और कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीनकर उनको संघ शासित प्रदेश क्यों बनाया गया है. इससे यहां के नागरिकों को क्या लाभ हो सकता है. इसके बारे में बताया जाएगा.

जम्मू-कश्मीर के बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की चेयरमैन वीना पंडित ने बताया कि नए सत्र में हमने इस सिलेबस को कोर्स में शामिल किया है. कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में J&K के लेफ्टिनेंट गवर्नर गिरीश चंद्र मुर्मू और लद्दाख लेफ्टिनेंट गवर्नर आर के माथुर के चित्रों को यूनियन टेरिटरी की प्रशासनिक संरचना की व्याख्या करते हुए शामिल किया गया है. दसवीं के पाठ्यपुस्तक में 'विशेष राज्य के दर्जे' की पृष्ठभूमि को शामिल किया गया है. साथ ही नए अधिनियम के तहत प्रावधानों की व्याख्या को समझाया गया है.

बता दें कि संसद के दोनों सदनों में पारित एक प्रस्ताव के आधार पर राष्ट्रपति ने 6 अगस्त को एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अनुच्छेद 370 के सभी खंडों (1) को छोड़कर निष्क्रिय किए जाते हैं. इस प्रकार से जम्मू और कश्मीर पर विशेष अधिकारों और विशेषाधिकारों को समाप्त किया गया था.



यह भी पढ़ाया जाएगा



इस अध्याय में इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेस के तहत राज्य के लिए गारंटी प्रावधानों का भी विवरण है और अनुच्छेद 35ए के तहत प्रदान किए गए अधिकारों के बारे में भी इसमें बताया गया है. राज्य बोर्ड की अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने पुनर्गठन अधिनियम को मंजूरी देने के तुरंत बाद पाठ्यपुस्तकों में बदलाव को मंजूरी दे दी है. नई किताबें मार्च से लगभग 1,200 उच्च विद्यालयों में छात्रों के लिए उपलब्ध होंगीं.

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