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ओडिशा ‘सुपर 30’ के अजय: गरीबी के चलते नहीं कर पाए थे मेडिकल की पढ़ाई, अब गरीबों को कराते हैं NEET की तैयारी

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Updated: September 28, 2019, 11:34 AM IST
ओडिशा ‘सुपर 30’ के अजय: गरीबी के चलते नहीं कर पाए थे मेडिकल की पढ़ाई, अब गरीबों को कराते हैं NEET की तैयारी
अजय अपने यहां पढ़ाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का ही चयन करते हैं.

अजय अपने सपने को इन बच्चों के जरिए पूरा करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, संघर्ष के बावजूद शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहने की उनकी चाहत ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है.

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  • Last Updated: September 28, 2019, 11:34 AM IST
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Inspiring Story: बिहार के आनंद की तरफ से गरीब बच्चों को पढ़ा इंजीनियर बनने के काबिल बनाने वाले 'सुपर-30' को देश में सभी जानते हैं. आनंद ने सुपर-30 की नींव बिहार के पूर्व डीजीपी अभ्यानंद के साथ रखी थी. अभ्यानंद और आनंद की पहले से खोले संस्थान की तरह देश में और भी संस्थान हैं, जो गरीब बच्चों को परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं. जानिए ऐसे ही एक संस्थान और उसे शुरू करने वाले शख्स के बारे में.

‘सुपर 30’ से प्रेरित एक पहल की शुरुआत ओडिशा में भी हुई है. लेकिन इसमें इंजीनियरिंग के बजाय मेडिकल की तैयारी कराई जाती है. 'जिन्दगी' नाम की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के सपनों की उड़ान को पंख दे रही है. एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा संचालित इस कार्यक्रम के तहत नीट की तैयारी कराने के लिए सब्जी विक्रेताओं, मछुआरों और गरीब किसानों जैसे समाज में हाशिये पर पड़े लोगों के बच्चों को चुना जाता है.

आर्थिक तंगी के कारण अपनी मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ी
इस पहल को शुरू करने की कहानी के पीछे जो शख्स है, उनका नाम है- अजय बहादुर सिंह. उन्हें अपने परिवार की आर्थिक तंगी के कारण अपनी मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी. परिवार का पेट भरने के लिए चाय और शर्बत बेचा.

19 मेधावी छात्रों को मेडिकल की तैयारी
अजय की कोशिश से ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में वर्ष 2016 में शुरू जिंदगी कार्यक्रम किया गया. वर्तमान में 19 मेधावी छात्रों को मेडिकल की तैयारी करवा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आये हुए हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं.

इस कार्यक्रम के तहत, बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें मुफ्त भोजन, आवास और अन्य तमाम सुविधाएं दी जाती है. इसके चौदह छात्रों ने 2018 में नीट में सफलता पाई, जिनमें से 12 को ओडिशा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिला. जिनकी उपलब्धियों के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जुलाई में उन्हें सम्मानित किया था.

एक साल का कार्यक्रम
जिंदगी फाउंडेशन के वरिष्ठ समन्वयक शिवेन सिंह चौधरी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, इसका एक साल का कार्यक्रम होता है, जो जुलाई के पहले सप्ताह में प्रवेश की औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शुरू होता है.

सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार प्रेरणास्रोत
उन्होंने कहा कि इसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का ही चयन किया जाता है. सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले जिंदगी फाउंडेशन के संस्थापक अजय बहादुर सिंह ने कहा कि वह यह सब गरीब बच्चों को उनके सपने पूरे करने में मदद करने के लिए कर रहे हैं . वह अपने सपने को इन बच्चों के जरिए पूरा करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि संघर्ष के बावजूद शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहने की उनकी चाहत ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है. (इनपुट- भाषा)

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First published: September 28, 2019, 11:30 AM IST
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